लालन के पालन को मिलेगा अधिकार

Published at :25 Aug 2016 3:51 AM (IST)
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लालन के पालन को मिलेगा अधिकार

दो बच्चों के जन्म पर मिलेगा 26 सप्ताह का अवकाश बच्चे को गोद लेनेवाली माता को भी 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश गोपालगंज : राज्यसभा में मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद कामकाजी महिलाओं में खुशी की लहर है. यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो कामकाजी महिलाएं शिशु की देखभाल के साथ […]

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दो बच्चों के जन्म पर मिलेगा 26 सप्ताह का अवकाश

बच्चे को गोद लेनेवाली माता को भी 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश
गोपालगंज : राज्यसभा में मातृत्व लाभ (संशोधन) विधेयक पारित होने के बाद कामकाजी महिलाओं में खुशी की लहर है. यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो कामकाजी महिलाएं शिशु की देखभाल के साथ घर बैठे ही अपना काम कर सकती हैं. पहले 12 सप्ताह का मातृत्व अवकाश दिया जाता था. इसे बढ़ा कर अब 26 सप्ताह कर दिया गया है. नियोक्ता द्वारा कानून का पालन न करने पर जुर्माने के आलावा सजा का भी प्रावधान बनाया है. कामकाजी महिलाओं ने सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कानून के सफल क्रियान्वयन की चिंता जतायी है.
शिशु की देखरेख भी करेगी संस्था : विधेयक में 50 से अधिक महिला कर्मचारी वाले संस्थान को शिशु की देखरेख के लिए क्रेच(शिशु गृह) की स्थापना का प्रावधान अनिवार्य कर दिया गया है. इसके अलावा यदि कोई महिला किसी शिशु को गोद लेती है, तो उसे भी 12 सप्ताह का अवकाश प्रदान किया जायेगा.
आठ महीने करने का था प्रस्ताव : मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के तहत मां बनने पर शिशु की देखभाल के लिए पूर्ण वेतन के साथ अवकाश देने का प्रावधान है.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आठ महीने के लिए मातृत्व लाभ बढ़ाने का प्रस्ताव पारित किया था. विधेयक के अनुसार यदि कोई महिला दो बच्चों के अतिरिक्त बच्चा पैदा करती है, तो उसे तीन महीने का अवकाश प्रदान किया जायेगा. संस्थान बतायेगा अधिनियम जिस संस्थान में दस या उससे अधिक महिला कर्मचारी कार्यरत हैं, वह इस कानून के दायरे में आ जायेंगी. गर्भवती बच्चे को जन्म देने से आठ सप्ताह पहले से अवकाश लेने की हकदार हैं. महिला कर्मचारी को नौकरी पर रखने से पहले ही अधिकारी को इस अधिनियम की जानकारी और लाभ बताने होंगे.
पारित विधेयक का लाभ सभी माताओं को मिलाना चाहिए. यह उनका अधिकार है. शिशु के जन्म के बाद महिलाएं शारीरिक तौर पर कमजोर हो जाती हैं. इससे स्वास्थ्य सुधार के लिए भी पर्याप्त समय मिल जायेगा.
गरू प्यारी संध्या
प्राइवेट संस्थान नहीं चाहते हैं कि वह अपने यहां काम करनेवाली महिलाओं को छह महीने घर बैठे वेतन दे. महिलाओं को एकता की मिशाल कायम करते हुए अपने अधिकार के लिए लड़ना चाहिए.
शारदा देवी
ज्यादातर कॉलेज या प्राइवेट संस्थान महिलाओं को वेतन सहित अवकाश नहीं देते हैं. सरकार ने विधेयक पास करा कर महिलाओं की उम्मीदें बढ़ा दी हैं. कानून बनता है, तो दोषी के खिलाफ कार्रवाई होगी.
लता सिंह
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