मतगणना मामले में ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चुनाव आयोग के कदम को बताया सही

Published by :Ashish Jha
Published at :02 May 2026 12:24 PM (IST)
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मतगणना मामले में ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट से झटका, चुनाव आयोग के कदम को बताया सही

Bengal Elections: हाई कोर्ट के बाद तृणमूल कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट ने भी निराश किया. मतगणना कार्य में केंद्रीय कर्मचारियों को रखने संबंधी चुनाव आयोग के फैसले को सुप्रीमकोर्ट ने सही ठहराया है. कोर्ट ने कहा- आशंकाएं पूरी तरह निराधार हैं. सभी तर्कों और उत्तरों के बाद, सर्वोच्च न्यायालय ने अंततः कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा. आयोग द्वारा 13 अप्रैल को दिया गया आदेश लागू रहेगा. तृणमूल कांग्रेस की याचिका खारिज कर दी गई.

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Bengal Elections: कोलकाता/ नई दिल्ली: कलकत्ता हाई कोर्ट में मिली हार के बाद तृणमूल कांग्रेस को अब मतगणना के मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय से भी निराशा हाथ लगी है. शनिवार को इस मामले की सुनवाई आपातकालीन आधार पर हुई. न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की विशेष पीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग (ईसी) मतगणना कर्मियों का चयन कर सकता है और उसके 13 अप्रैल के परिपत्र को गलत नहीं कहा जा सकता है.

तृणमूल की याचिका पर हुई सुनवाई

मतगणना में सिर्फ केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कर्मचारियों को ही क्यों शामिल किया जा रहा है, तृणमूल ने आयोग के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने आयोग के फैसले को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी. इसके बाद तृणमूल सीधे सर्वोच्च न्यायालय चली गई. इस मामले में एक विशेष पीठ का गठन किया गया. न्यायमूर्ति पीएस नरसिंह और न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची इसकी सुनवाई की.

कपिल सिबल ने उठाए चार मुद्दे

आज सुनवाई की शुरुआत में वकील कपिल सिबल ने चार मुद्दे उठाए. इनमें राज्य सरकार के कर्मचारियों का मुद्दा भी शामिल था. उन्होंने कहा कि परिपत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार का एक अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, लेकिन किसी भी राज्य सरकार के कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की जा रही है. प्रतिवादी न्यायाधीश जयमाल्य बागची ने कहा कि दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि मतगणना पर्यवेक्षक और सहायक राज्य सरकार के कर्मचारी या केंद्र सरकार के कर्मचारी हो सकते हैं. जब विकल्प मौजूद है, तो हम यह कैसे कह सकते हैं कि यह कदम दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है. परिपत्र के अनुसार भी, दोनों केंद्र सरकार के कर्मचारी हो सकते हैं.

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दिशा-निर्देशों के आधार पर हुआ फैसला

सिब्बल ने दावा किया कि परिपत्र में इसके विपरीत कहा गया है. यह सुनकर न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने आगे कहा कि दिशानिर्देशों में कहा गया है कि या तो केंद्र सरकार का कर्मचारी या राज्य सरकार का कर्मचारी. यदि वे किसी पूल से लेते हैं, तो यह कभी गलत नहीं होता. कम से कम एक व्यक्ति केंद्र सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. सिब्बल ने यह कहकर इसका खंडन किया कि एक व्यक्ति राज्य सरकार का कर्मचारी होना चाहिए. जयमाल्य बागची ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार दोनों के कर्मचारी सरकारी कर्मचारी होने चाहिए, लेकिन आनुपातिकता के बारे में कुछ नहीं कहा गया है. दूसरी ओर, आयोग के वकील डीएस नायडू ने कहा कि इस मामले में रिटर्निंग ऑफिसर सर्वोच्च अधिकारी है. वह राज्य सरकार का कर्मचारी है. प्रत्येक राजनीतिक दल का अपना मतगणना एजेंट होगा.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

  • विशेष सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा मतगणना के लिए जो इंतजाम किये गये हैं, वे पर्याप्त हैं.
  • पीठ ने कहा कि मतगणना प्रक्रिया शुरू होने के इतने करीब आने पर किसी भी नये निर्देश से भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है.
  • अदालत ने भरोसा जताया कि आयोग और प्रशासन मिलकर एक पारदर्शी और निष्पक्ष मतगणना सुनिश्चित करेंगे.

क्या थी टीएमसी की मांग?

तृणमूल कांग्रेस ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की थी, जिसमें मतगणना कर्मियों की रैंडम नियुक्ति और विशेष सुरक्षा जांच की बात कही गयी थी. टीएमसी का तर्क था कि ये निर्देश राज्य सरकार के प्रशासनिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और इससे मतगणना में देरी हो सकती है.

4 मई को है महा-नतीजों का दिन

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद अब 4 मई को होने वाली मतगणना का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है. कलकत्ता हाईकोर्ट द्वारा दिये गये सुरक्षा और स्टाफ संबंधी दिशा-निर्देश ही लागू रहेंगे. चुनाव आयोग अब अंतिम परिणामों की घोषणा की तैयारी में जुट गया है.

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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