यहां छाड़ी नदी का जहर घोट रहे हैं शहरवासी

Published at :23 Aug 2016 4:02 AM (IST)
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यहां छाड़ी नदी का जहर घोट रहे हैं शहरवासी

मुहल्लावासी छाड़ी नदी का जहर घोंट रहे हैं. अधूरी सड़क और नाले में जलजमाव और गंदगी के बीच रहना मुहल्लावासियों की नियति बन गयी है. थाना चौक से लेकर ब्लॉक मोड़ तक जलजमाव की स्थिति रहती है. कई जगह कचरा फैला हुआ है. मुहल्ले की आबादी घनी है, लेकिन एक भी सुलभ शौचालय की व्यवस्था […]

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मुहल्लावासी छाड़ी नदी का जहर घोंट रहे हैं. अधूरी सड़क और नाले में जलजमाव और गंदगी के बीच रहना मुहल्लावासियों की नियति बन गयी है. थाना चौक से लेकर ब्लॉक मोड़ तक जलजमाव की स्थिति रहती है. कई जगह कचरा फैला हुआ है. मुहल्ले की आबादी घनी है, लेकिन एक भी सुलभ शौचालय की व्यवस्था नहीं है. जमाने के लगे एक-दो नल आज भी दिखते हैं, लेकिन शायद ही कभी पानी टपकता है. वार्ड नंबर 11 में समस्याओं का दंश झेल रहे वार्ड वासियों पर एक रिपोर्ट.

जहरीली छाड़ी नदी व संस्कृत विद्यालय बना कोयले का रोजगार स्थल.
गोपालगंज : शहर में अवस्थित है वार्ड नंबर 11. बीच से गुजर रही है छाड़ी नदी. नाम तो नदी है, लेकिन हालात गंदे नाले से भी बदतर. नदी की भूमि पर आलीशान मकान खड़े हैं. पानी का काला रंग जहर बन चुका है. बारिश होते ही नदी का पानी शहर की ओर बढ़ता है. आसपास के लोग दरुगध से तबाह हैं. यह दर्द है मुहल्लावासियों का है, जो नदी से निकलनेवाले जहर को प्रतिदिन घोट रहे हैं. वार्ड में बिजली की स्थिति ठीक है. विद्यालय की कमी नहीं है.
हां, पढ़ाई के संसाधन न होने से व्यवस्था ध्वस्त है. यहां दो दो हाइस्कूल वीएम और एसएस बालिका हैं, जहां शिक्षक और संसाधन का घोर अभाव है. संस्कृत पाठशाला के कैंपस में कोयला का कारोबार हो रहा है. वहीं थाना चौक से वीएम फील्ड की ओर जानेवाला नाला अवरुद्ध है. बरसात होते ही पानी नदी में जाने के बजाय शहर की ओर आने लगता है और उसमें चलना वार्डवासियों की विवशता होती है. थाना चौक से लेकर ब्लॉक मोड़ तक जलजमाव की स्थिति रहती है.
कई जगह कचरा फैला हुआ है. मुहल्ले की आबादी घनी है, लेकिन एक भी सुलभ शौचालय की व्यवस्था नहीं है. जमाने के लगे एक-दो नल आज भी दिखते हैं, लेकिन शायद ही कभी पानी टपकता है. मुहल्लावासियों की मानें, तो सफाई का यहां कोरम पूरा किया जाता है. आज तक कोई भी नाला पूरा नहीं हुआ और आउटलेट नहीं है.
छाड़ी नदी का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमित है. नदी में उपजी जलकुंभी और फेंका जानेवाला कचरा प्रतिदिन जहां पांच सौ घन सीएफटी कार्बन मोनो ऑक्साइड छोड़ रहा है, वहीं नदी में फैला जंगल सांप और जहरीले कीटों का बसेरा बन गया है जिससे प्रतिदिन मुहल्लावासियों के सर पर खतरा मंडरा रहा है.
यूं कहा जाये, तो वार्ड में सफाई और जलनिकासी की व्यवस्था नदारद है.
पीसीसी ने बिगाड़ी स्थिति : थाना चौक से लेकर श्रीराम मंदिर तक नगर पर्षद द्वारा सड़क का पीसीसी करा दिया गया. पीसीसी होने के बाद एसएस बालिका गेट से लेकर ब्लॉक मोड़ तक जलजमाव होने से पानी के बीच लोगों का चलना नियति बन गयी है. बिन बारिश भी इस सड़क पर बरसात का नजारा रहता है. इसी रोड पर अवस्थित संस्कृत विद्यालय का प्रांगण कोयले का कारोबार केंद्र बन गया है. यहां से एक व्यवसायी कोयले का कारोबार करते हैं.
संस्कृत पाठशाला पर कोल कारोबारियों का है कब्जा
जलजमाव व गंदगी के बीच रहना बनी नियति
बरसात में होता है चलना मुश्किल
वार्ड में सबसे बड़ी समस्या नाले की है. सफाई कर्मी आते नहीं, योजना का चयन मनमानी होता है. कई बार कार्यपालक पदाधिकारी और अन्य अधिकारियों से शिकायत की गयी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अधिकतर सफाईकर्मी फर्जी हैं और कागजों पर सफाई करायी जा रही है.
रुक्मिनी देवी, वार्ड पार्षद, वार्ड 11
क्या कहते हैं वार्डवासी
छाड़ी नदी में पानी भर जाने से चारों तरफ गंदगी रहती है. नदी की सफाई के लिए मांग होती रही है, लेकिन आज तक नहीं हुई, जिससे पूरा मुहल्ला परेशान है.
अमित कुमार
नाला नहीं बनने से दुकान के सामने कचरा फैला रहता है. कचरे की सफाई नहीं होती है. नगर पर्षद के सफाई कर्मचारी यहां आते जरूर हैं, पर कोरम पूरा कर चले जाते हैं.
रामजी शर्मा
वीएम फील्ड से थाना मोड़ तक दोनों ओर का नाला अवरुद्ध है. गंदा पानी नदी में जाने के बजाय बैक होकर घर में आता है जिससे सभी लोग परेशान रहते हैं. गंदगी में जीना नियति बन गयी है.
विकास कुमार सिंह
जलजमाव यहां की प्रमुख समस्या है. नाले की सफाई नहीं होती है. नप की व्यवस्था आधी अधूरी है. नगर कर्मी कभी भी नाले की ठीक से सफाई नहीं करते, जिससे चारों तरफ गंदगी रहती है. यहां महामारी फैलने की आशंका से लोग सहमे रहते हैं़
जयप्रकाश कुमार
थाना चौक से श्रीराम मंदिर तक ढलाई होने के बाद उसके आगे जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. एसएस बालिका में पढ़ने जानेवाली छात्राओं को पानी के बीच से होकर जाना पड़ता है. इस पर किसी भी अिधकारी एवं नगर पर्षद का ध्यान नहीं जा रहा है़
राकेश प्रसाद
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