बंदर व आवारा कुत्तों ने जीना किया दुश्वार
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 28 Dec 2015 8:21 PM
बंदर व आवारा कुत्तों ने जीना किया दुश्वार बंदरों के उत्पात से नहीं बचा शहर का कोई भी मुहल्ला गोपालगंज. इन दिनों शहर के लोग बंदर और आवारा कुत्तों से खौफजदा हैं. शहर के तमाम मुहल्लों के लोग बंदरों के उत्पात तथा उनके हमलों से दशहत में हैं. आवारा कुत्ते लोगों को गलियों में दौड़ा […]
बंदर व आवारा कुत्तों ने जीना किया दुश्वार बंदरों के उत्पात से नहीं बचा शहर का कोई भी मुहल्ला गोपालगंज. इन दिनों शहर के लोग बंदर और आवारा कुत्तों से खौफजदा हैं. शहर के तमाम मुहल्लों के लोग बंदरों के उत्पात तथा उनके हमलों से दशहत में हैं. आवारा कुत्ते लोगों को गलियों में दौड़ा कर काट रहे हैं. इनके शिकार लोगों की अस्पतालों में लंबी लाइनें लग रही हैं. कई लोग रैबीज के शिकार होकर जान भी गंवा चुके हैं. चिंताजनक पहलू यह है कि इंतजामिया बंदर और कुत्तों के आतंक के सामने दुम दबा कर बैठा है. इनकी धर-पकड़ या इन पर नियंत्रण का आजतक कोई मुकम्मल इंतजाम नहीं हो पाया है. उचकागांव थाना क्षेत्र के लुहसी में एक किसान की मौत के बाद सड़क पर उतरे लोगों ने हंगामा भी किया था. इस हंगामे के बाद उचाकगांव के सीओ और थानाध्यक्ष ने बंदरों को पकड़ने की भरोसा दिलाया, जो सिर्फ आश्वासन बन कर रह गया. कुत्तों की नहीं हो रही नसबंदी आवारा कुत्तों की संख्या सीमित करने के लिए उनकी नसबंदी करने की लिए पशुपालन विभाग के पास योजना है, लेकिन नसबंदी की जाती है. न ही उन्हें एंटी रैबिज वैक्सीन दिया जाता है. पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ डीके चौधरी ने कहा कि कुत्तों की नसबंदी के लिए मेरे पास कोई योजना नहीं है. बंदरों को पकड़ने के लिए नहीं चला अभियानउचकागांव के लाइन बाजार से लेकर बड़का गांव हथुआ, भोरे, कुचायकोट के अलावा गोपालगंज शहर में बंदरों को निगम ने पकड़ने का अभियान नहीं चलाया गया. इससे बंदर जानलेवा बन गये हैं. बंदरों को पकड़ने पर न्यूनतम 285 रुपये तथा 50 रुपये बंदर के खाने का खर्च आता है, जो कहां से आयेगा प्रशासन नहीं समझ पा रहा है. बंदर व कुत्तों के 13 हजार शिकारहर माह करीब 13 हजार लोग बंदर और आवारा कुत्तों के हमलों के शिकार होे रहे हैं. गरमी में इस संख्या में और भी इजाफा हो जाता है. सदर अस्पताल के आंकड़े बताते हैं कि प्रत्येक नये व पुराने दस से 12 हजार लोगों को इंजेक्शन लगाये जाते हैं. यानी प्रतिदिन का आंकड़ा चार सौ को पार कर रहा है. अस्पताल में पिछले चार महीनों से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं है. कहतीं हैं मुख्य पार्षदशहर में अचानक फिर से बंदरों के आतंक की शिकायतें मिलने लगी हैं. बंदर पकड़ने का अभियान चलाया जायेगा. कुत्तों पर कार्रवाई का पशुप्रेमी विरोध करते हैं. इस संबंध में भी विचार किया जा रहा है.संजु देवी, नगर पर्षद, गोपालगंज
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