कदम-कदम पर मिल रहे हैं सेहत के सौदागर
कदम-कदम पर मिल रहे हैं सेहत के सौदागर छोटे से मॉडल बैग में लेकर चलते हैं पूरा हॉस्पिटललाइलाज बीमारियों का करते हैं इलाजफोटो- 15संवाददाता, भोरे/पंचदेवरीयहां सेहत के सौदागरों का राज है. कदम-कदम पर झोला छाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. कोई दरबे जैसे कमरे में नर्सिंग होम चला रहा है, तो कहीं मोमबत्ती […]
कदम-कदम पर मिल रहे हैं सेहत के सौदागर छोटे से मॉडल बैग में लेकर चलते हैं पूरा हॉस्पिटललाइलाज बीमारियों का करते हैं इलाजफोटो- 15संवाददाता, भोरे/पंचदेवरीयहां सेहत के सौदागरों का राज है. कदम-कदम पर झोला छाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. कोई दरबे जैसे कमरे में नर्सिंग होम चला रहा है, तो कहीं मोमबत्ती की रोशनी में खुलेआम ऑपरेशन किया जा रहा है. इन सेहत के सौदागरों पर नकेल कसनेवाला कोई नहीं है. कहने को तो स्वास्थ्य महकमा इन पर कार्रवाई की बात करती है, लेकिन जितनी बार वह कार्रवाई की बात करती है, उतनी ही तेजी से इनका प्रसार हो रहा है. आलम यह है कि सेहत के सौदागर एक छोटे से बैग में बड़ा-सा हॉस्पिटल लेकर चलते हैं. मर्ज चाहे कैसा भी हो, सबके इलाज की गारंटी है इनके पास. यह हाल भोरे, पंचदेवरी, कटेया, विजयीपुर आदि जगहों पर साफ दिखता है. पंचदेवरी में तो हर चौक-चौराहे पर दो तीन डॉक्टर ऐसे मिल ही जायेंगे, जो बगैर डिग्री के कई वर्षों से प्रैक्टिस कर रहे हैं. हैरत की बात तो यह है कि ये डॉक्टर लाइलाज बीमारियों का इलाज करने से बाज नहीं आते. दवा दुकानों से लेकर जांच घरों एवं अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर इनका जबरदस्त सेटिंग है. मरीजों को इलाज के दौरान इन सभी जगहों पर शोषण का शिकार होना पड़ता है. स्वास्थ्य विभाग का शिकंजा भी ऐसे डॉक्टरों पर बेअसर है. बिना किसी रोक-टोक के इनका प्रैक्टिस लगातार जारी है. स्थानीय सरकारी अस्पताल में इलाज की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण मरीजों को मजबूरन इनके पास जाना ही पड़ता है. इसके बाद इन डॉक्टरों के चंगुल में फंस जाने पर मरीजों का जम कर शोषण किया जाता है. ऐसा नहीं है कि स्वास्थ्य विभाग इन सब बातों से अनभिज्ञ है. स्थानीय प्रशासन के अधिकारी भी इन बातों से अवगत है. सवाल यह उठता है कि प्रशासन को इसकी सूचना होने के बावजूद वे किस तरह सेहत के सौदागर बने हुए हैं.इंजेक्शन देना सीखें और बन जाएं डॉक्टरइस क्षेत्र में हर जगह मेडिकल की डिग्री बांटी जा रही है. यानी डॉक्टर बनना है, तो बस इंजेक्शन देना सीखना होगा. अभी हाल में गोपालगंज के बैकुंठपुर में जिस तरह एक डॉक्टर के हाथों एक महिला की मौत हो गयी, उससे यह साफ है कि ऐसे सेहत के सौदागरों को बस सिर्फ पैसा ही चाहिए.
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