रहें सावधान: इनसेफ्लाइटिस की दस्तक कभी भी

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Apr 2016 8:45 AM

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गया : मुजफ्फरपुर में इनसेफ्लाइटिस के कुछ पॉजिटिव मरीजों के मिलने की सूचना के बाद से मगध मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है. डाॅक्टर मान रहे हैं कि गया में भी इस बीमारी से पीड़ित मरीज कभी भी सामने आ सकते हैं. अगले कुछ दिनों में अगर बारिश होती […]

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गया : मुजफ्फरपुर में इनसेफ्लाइटिस के कुछ पॉजिटिव मरीजों के मिलने की सूचना के बाद से मगध मेडिकल काॅलेज व अस्पताल में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है. डाॅक्टर मान रहे हैं कि गया में भी इस बीमारी से पीड़ित मरीज कभी भी सामने आ सकते हैं. अगले कुछ दिनों में अगर बारिश होती है, तो यह खतरा बढ़ जायेगा. अस्पताल प्रबंधन ने इस बीमारी के इलाज की बेहतर सुविधा मिल सके, इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं.

पिछले साल इस बीमारी के कुल 124 मामले मगध मेडिकल अस्पताल में आये थे. इनमें से 25 मरीजों की मौत हो गयी थी. दुखद पहलू यह है कि इस बीमारी की चपेट में आनेवाले 90 % मरीजों की उम्र एक से 16 साल के बीच की होती है. बच्चों की मौत किसी को भी परेशान कर सकती है.

आज से पटना में होगा विशेष प्रशिक्षण
इनसेफ्लाइटिस के मरीजों का बेहतर इलाज हो सके, इसके लिए सोमवार यानी 25 अप्रैल से विशेष ट्रेनिंग का इंतजाम किया गया है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित इस ट्रेनिंग में बिहार के उन सभी जिलों से डाॅक्टर पहुंचेंगे, जहां इनसेफ्लाइटिस का खतरा है. मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भी चार डाॅक्टरों की टीम इसमें शामिल होगी. इससे पहले 19 अप्रैल को अस्पताल में एसओपी (standard operating procedure) की जानकारी शिशु विभाग के डाॅक्टरों को दी गयी. इनसेफ्लाइटिस नोडल अॉफिसर ने सभी को इस बीमारी से पीड़ित मरीजों के इलाज के बारे में समझाया.
पीड़ित मरीजों की पहचान
तेज बुखार आना व लगातार बुखार का बने रहना.
शरीर मेें चमकी आना .
दांत पर दांत बैठना.
पूरे शरीर या किसी खास अंग में एेंठन होना.
बच्चे का बेहोश होना.
पिन (चिकोटी) करने पर भी शरीर में हरकत न होना
बुखार की पहचान होने पर
तेज बुखार होने पर पूरे शरीर को ताजे पानी से पोंछे व पंखे से हवा करे.
यदि बच्चा बेहोश नहीं है, तब साफ पानी में ओआरएस का घोल बना कर पिलाएं.
बेहोशी या मिरगी की अवस्था में बच्चे को हवादार स्थान पर रखें.
शरीर से कपड़े हटा दें व छायादार स्थान पर लिटाएं.
यह नहीं करें
बच्चे को कंबल या गरम कपड़े में न लिटाएं.
बच्चे की नाक बंद न हो.
बेहोशी या मिरगी की अवस्था में मुंह से कुछ भी न दें.
बच्चे की गरदन झुकी न रहे.
सावधानी ही बचाव
बिस्तर पर मच्छरदानी का प्रयोग करें.
कमरों में मच्छर भगानेवाली अगरबत्ती या दूसरी दवाइओं का प्रयोग करें.
पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहले, ताकि मच्छर न काट सके.
जमे हुए पानी में केरोसिन तेल की कुछ बूंदे डाल दें या फिर वहां मिट्टी भर दें, ताकि मच्छरों का प्रजनन रोका जा सके.
घर के आस पास झाड़ी व कचरा साफ रखें.
जलीय पक्षी जैसे-सारस, बगुला व बत्तख आदि के माध्यम से मस्तिषक ज्वर फैलता है. इसलिए बारिश के मौसम में धान के खेतों में जमे पानी में, पोखर या तालाबों के नजदीक बच्चों को न जानें दें.
बागीचे में गिरे हुए फल बच्चों को न खाने दें.
आबादी वाले झेत्र में सूअरों को भटकने न दें.
सुअरबाड़ा घर से दूर हो.
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