कर्तव्यपरायणता का दूसरा नाम धर्म : मां जसजीत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 24 Apr 2016 8:50 AM

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धर्मसभा भवन में आयोजित तीन दिवसीय अध्यात्मिक कार्यक्रम का आज अंतिम दिन गया : कर्तव्यपरायणता का दूसरा नाम धर्म है. धर्म में कर्तव्य का बोध होता है. इससे विकसित गुणों के कारण मनुष्य परमार्थ हासिल करता है. विश्व में कई पंथ व संप्रदाय हैं. सभी पंथ व संप्रदाय लोगों को एक सूत्र में बांधने की […]

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धर्मसभा भवन में आयोजित तीन दिवसीय अध्यात्मिक कार्यक्रम का आज अंतिम दिन
गया : कर्तव्यपरायणता का दूसरा नाम धर्म है. धर्म में कर्तव्य का बोध होता है. इससे विकसित गुणों के कारण मनुष्य परमार्थ हासिल करता है. विश्व में कई पंथ व संप्रदाय हैं. सभी पंथ व संप्रदाय लोगों को एक सूत्र में बांधने की शिक्षा देते हैं. ये बातें शनिवार को धर्मसभा भवन में आयोजित तीन दिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम में प्रवचन के दौरान मानव कल्याण आश्रम की मां जसजीत जी ने कहीं.
उन्होंने कहा कि आज के दौर में विकसित विज्ञान भी प्राकृतिक आपदा से निबटने में सक्षम नहीं हो पाया है. अध्यात्म के पीछे विज्ञान होता है. जो मनुष्य धर्म को धारण करता है, उसे भूकंप, तूफान व अन्य प्राकृतिक अन्य आपदाओं का बोध होने लगता है. मां ने कहा कि बदले हालात में आज समाज में आपसी सहभागिता में भारी गिरावट आयी है. मनुष्य दिग्भ्रमित होता जा रहा है.
निर्मल मन से ही मनुष्य ईश्वर को प्राप्त कर सकता है. इसके लिए अपने आप में दया, क्षमा व शिष्टता आदि गुणों का विकास करना होगा. काम, क्रोध, लोभ, मोह व अहंकार आदि का त्याग करना होगा. मानव जीवन में ये सब सद्गुरु के बिना संभव नहीं है. सद्गुरु के महत्व का उल्लेख धार्मिक ग्रंथों में भी किया गया है. सद्गुरु के शरण में पहुंच कर मनुष्य अपने जीवन को सफल बना लेता है.
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