मरीजों को देने होंगे 1493 रुपये

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Apr 2016 8:51 AM

विज्ञापन

बदलाव. मगध मेडिकल में डायलिसिस चार्ज में वार्षिक वृद्धि लागू मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किडनी के मरीजों को अब प्रति डायलिसिस 43 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे. यह वृद्धि डायलिसिस करनेवाली कंपनी व सरकार के बीच हुए करार का परिणाम है. इसमें तय हुआ था कि कंपनी हर साल प्रति डायलिसिस चार्ज में तीन […]

विज्ञापन
बदलाव. मगध मेडिकल में डायलिसिस चार्ज में वार्षिक वृद्धि लागू
मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किडनी के मरीजों को अब प्रति डायलिसिस 43 रुपये ज्यादा खर्च करने होंगे. यह वृद्धि डायलिसिस करनेवाली कंपनी व सरकार के बीच हुए करार का परिणाम है. इसमें तय हुआ था कि कंपनी हर साल प्रति डायलिसिस चार्ज में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगी. कंपनी ने सात अप्रैल को एक साल पूरा किया है.
गया : मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किडनी के मरीजों को अब डायलिसिस कराने के लिए 1493 रुपये देने होंगे. पहले प्रति डायलिसिस 1450 रुपये लिये जाते थे. बी-ब्रॉन मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की ओर से अस्पताल में पीपीपी मोड पर डायलिसिस की सुविधा दी जा रही है. बिहार सरकार व कंपनी के बीच हुए हुए करार के मुताबिक प्रतिवर्ष दर में 3% की बढ़ोतरी की जायेगी. कंपनी ने सात अप्रैल को ही अस्पताल में अपने एक साल पूरे किये हैं. कंपनी के अधिकारियों ने अस्पताल अधीक्षक को पत्र लिख कर यह जानकारी भेजी है.
नौ डायलिसिस के बाद एक मुफ्त: अस्पताल प्रबंधन व कंपनी की ओर से किडनी के मरीजों को डायलिसिस के दौरान होनेवाले खर्च में थोड़ी राहत भी देने की कोशिश की गयी है. एक मरीज को नौ डायलिसिस के बाद एक डायलिसिस की फी नहीं देनी होगी. एक डायलिसिस नि:शुल्क होगी. गौरतलब है कि एक मरीज को सप्ताह में दो बार डायलिसिस कराना होता है. गंभीर स्थिति होने पर प्रति सप्ताह तीन कर दिया जाता है.
संसाधन बढ़ाने की जरूरत: सीनियर तकनीकी विशेषज्ञ अयान भट्टाचार्य ने बताया कि इधर के कुछ महीनों में मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. इस अनुपात में अब संसाधनों को बढ़ाये जाने की जरूरत महसूस हो रही है. अभी डायलिसिस सेंटर में पांच मशीनें हैं
इनमें चार सामान्य किडनी की बीमारी के लिए और एक स्पेशल ट्रीटमेंट के लिए हैं. मरीजों की संख्या बढ़ जाने से कई बार तीन शिफ्ट में डायलिसिस करनी पड़ रही है, जबकि यहां दो ही शिफ्टों में डायलिसिस होती है. सेंटर में कुल 36 मरीज आते हैं. इनमें आठ मरीज इसी महीने शुरू हुए हैं. डायलिसिस की पूरी प्रक्रिया में चार घंटे लगते हैं. गौरतलब है कि गया के अलावा औरंगाबाद व नवादा के भी मरीज आते हैं. प्राइवेट स्तर पर कहीं भी डायलिसिस की सुविधा नहीं हैं. पटना में किसी प्राइवेट संस्थान में डायलिसिस करानेवाले को प्रति डायलिसिस 3500 से 4000 रुपये देने पड़ते हैं.
डायलिसिस क्या है, ये भी जानें
डायलिसिस (अपोहन) रक्तशोधन की एक कृत्रिम विधि होती है. डायलिसिस की प्रक्रिया को तब अपनाया जाता है, जब किसी व्यक्ति की किडनी सही से काम नहीं कर रही होती है. किडनी से जुड़े रोगों, लंबे समय से मधुमेह के रोगी व उच्च रक्तचाप जैसी स्थितियों में कई बार डायलसिस की आवश्यकता पड़ती है.
स्वस्थ व्यक्ति में किडनी द्वारा जल व खनिज (सोडियम, पोटेशियम क्लोराइड, फॉस्फोरस सल्फेट) का सामंजस्य रखा जाता है. डायलिसिस स्थायी व अस्थायी दोनों तरीके से होती है. यदि रोगी की किडनी बदल कर नयी किडनी लगानी हो, तो डायलिसिस की प्रक्रिया अस्थायी होती है.
डायलिसिस के दौरान बरती जानेवाली सावधानियां
सीनियर तकनीकी विशेषज्ञ अयान भट्टाचार्य ने बताया कि डायलिसिस के दौरान मरीजों को कई प्रकार की सावधानियां बरतनी होती हैं. खास बात यह कि किडनी के मरीजों के शरीर से तरल पदार्थ नहीं निकल पाता है. इसकी वजह से उनके शरीर का वजन बढ़ जाता है.
ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है. हालांकि, गरमी का मौसम होने से मरीज पानी कम पीने से नहीं रोक पाते हैं. इस वजह से ही इस मौसम में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. डायलिसिस के दौरान खून में से इन द्रव्यों को ही अलग किया जाता है. अयान ने बताया कि डायलिसिस कराने आनेवाले मरीजों को कम पानी पीने की सलाह दी जाती है. इससे कोई नुकसान नहीं होता है, क्योंकि किडनी के मरीजों में डिहाइड्रेशन की समस्या कम होती है. इसके साथ ही नमक की भी मात्रा कम लेनी होती है. साथ ही, हेवी प्रोटीन व मसालेदार खाने से भी बचना जरूरी है.
मशीन बढ़ाने की हुई है गुजारिश
किडनी डायलिसिस के मरीजों की संख्या हाल के दिनों में बढ़ गयी है. यहां कुल 36 मरीज आ रहे हैं. कंपनी के वरीय पदाधिकारियों से मशीनों की संख्या बढ़ाने की गुजारिश की गयी है. साथ ही, अस्पताल प्रबंधन से बात हो रही है कि सीरियस किडनी मरीजों के लिए इमरजेंसी वार्ड की व्यवस्था करा दी जाये. इससे यहां अति गंभीर मरीजों का भी इलाज हो सकेगा. अभी ऐसे मरीजों को पटना जाना पड़ता है.
अयान भट्टाचार्य, सीनियर तकनीकी विशेषज्ञ, बी-ब्रॉन मेडिकल प्राइवेट लिमिटेड कंपनी
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन