उत्तरपुस्तिकाओं की खरीद में एमयू को 57 लाख रुपये की बचत

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 19 Apr 2016 8:47 AM

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बोधगया : एमयू में आये दिन वित्तीय अनियमितता की शिकायत को लेकर पटना से विजिलेंस की टीम का दौरा होते रहता है. लेकिन, हाल के वर्षों में विजिलेंस के अधिकारी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि एमयू में वित्तीय अनियमितता हुई भी है या नहीं. इस मामले पर सोमवार को अपने कार्यालय में […]

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बोधगया : एमयू में आये दिन वित्तीय अनियमितता की शिकायत को लेकर पटना से विजिलेंस की टीम का दौरा होते रहता है. लेकिन, हाल के वर्षों में विजिलेंस के अधिकारी किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं कि एमयू में वित्तीय अनियमितता हुई भी है या नहीं.

इस मामले पर सोमवार को अपने कार्यालय में बातचीत के दौरान कुलपति प्रो (डॉ) मोहम्मद इश्तियाक ने मीडिया को बताया कि किसी पर भी आरोप लगाना आसान है, लेकिन कोई एमयू के अंदर हो रहे कामकाज की ओर झांके, तो तब उसे समझ में आयेगा कि कितनी पारदर्शिता से कामकाज हो रहा है. कुलपति ने कहा कि हर साल एमयू में करीब दो करोड़ रुपये की उत्तर पुस्तिका खरीदी जाती थी. उत्तर पुस्तिकाओं की सप्लायर एक प्राइवेट एजेंसी थी. लेकिन, इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की खरीदारी सरकारी एजेंसी से करने का निर्णय लिया गया.

इसमें प्रतिकुलपति ने भी रुचि दिखायी और सरकारी एजेंसी से उत्तर पुस्तिकाओं की खरीदारी की गयी. इसका लाभ हुआ कि एमयू को 57 लाख रुपये की बचत हुई. कुलपति ने बताया कि तीन सौ मीटरिक टन उत्तर पुस्तिकाओं को खरीदने में पहले हर वर्ष एमयू द्वारा करीब दो करोड़ रुपये खर्च किये जाते थे. लेकिन, इस बार उत्तर पुस्तिकाओं की खरीदारी में 57 लाख रुपये कम भुगतान करना पड़ा.

इसी प्रक्रिया से होगी अगली खरीदारी : प्रतिकुलपति प्रो (डॉ) कृतेश्वर प्रसाद ने बताया कि तीन सौ मीटरिक टन उत्तर पुस्तिकाओं की खरीदारी के करने के बाद एमयू को 57 लाख रुपये बचे हैं. साथ ही, अब भी एमयू के पास पर्याप्त मात्रा में उत्तर पुस्तिकाएं मौजूद हैं, जो आगामी परीक्षा में काम आयेंगी.

प्रतिकुलपति ने कहा कि सरकारी एजेंसी के भाव को देखते हुए अगली खरीदारी भी इसी प्रक्रिया से होगी.कुलपति प्रो (डॉ) मोहम्मद इश्तियाक ने बताया कि एक अच्छी पहल की गयी, तो एमयू को उत्तर पुस्तिकाओं की खरीदारी में 57 लाख बचे. इसके अतिरिक्त कई बिल्डिंगों के निर्माण कार्य में गुणवत्ता के साथ प्राक्कलन राशि को कम किया गया. कुलपति ने बताया कि हाल के महीनों में ऐसे मामलों पर लिये गये कई निर्णयों से अनुमान है कि एमयू को कम से कम 20 करोड़ का फायदा जरूर हुआ है.

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