कुव्यवस्था. 800 स्टूडेंट्स, पर शौचालय एक भी नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Apr 2016 8:18 AM

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय की योजना चलायी जा रही है, पर जिस स्कूल में तीन सौ छात्राएं पढ़ती हों व 16 शिक्षिकाओं की प्रतिनियुक्ति हो, वहां शौचालय नहीं होना बड़ी समस्या है. विभाग को बार-बार लिखे जाने के बाद भी अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी. गया: शहर के […]

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स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय की योजना चलायी जा रही है, पर जिस स्कूल में तीन सौ छात्राएं पढ़ती हों व 16 शिक्षिकाओं की प्रतिनियुक्ति हो, वहां शौचालय नहीं होना बड़ी समस्या है. विभाग को बार-बार लिखे जाने के बाद भी अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं हो सकी.
गया: शहर के बीच में स्थित गुरुनानक मध्य विद्यालय के आठ कमरों में एक साथ तीन स्कूल के आठ सौ छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जा रहा है. इस स्कूल में व्यवस्था के नाम पर एक यूनिट भी शौचालय नहीं है. शौचालय नहीं होने के कारण शिक्षिकाओं व छात्राओं को ज्यादा परेशानी होती है. गुरुनानक मध्य विद्यालय में ही एमआर माला बालिका मध्य विद्यालय व शिक्षा मंदिर मध्य विद्यालय को भी चलाया जाता है. ऐसे तो विद्यालय में सुरक्षा के पूर्ण इंतजाम पहले कराये गये थे.

इसके तहत विद्यालय की चहारदीवारी करायी गयी थी, पर शरारती तत्वों ने चहारदीवारी को क्षति पहुंचाया है. फिलहाल चहारदीवारी काफी खराब स्थिति में पहुंच चुकी है. कई बार विद्यालय से कुर्सी व टेबल आदि की भी चोरी हुई है. विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक ने कोतवाली थाने में प्राथमिकी भी दर्ज करायी है. शिक्षकों की माने, तो विद्यालय के आसपास हर वक्त असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा रहता है. इससे यहां छात्राओं व शिक्षिकाओं को भी कई बार असहजता का सामना करना पड़ा है.

अब एक शिफ्ट में चलता है स्कूल: गुरुनानक मध्य विद्यालय में 1982 में एमआर माला बालिका मध्य विद्यालय को टैग किया गया. इसके बाद गुरुनानक विद्यालय व बालिका विद्यालय को दो शिफ्ट में चलाया जा रहा था. लेकिन, 2015 में शिक्षा मंदिर मध्य विद्यालय को भी इसी में टैग कर दिया गया. उसके बाद आठ कमरे में ही तीनों विद्यालय के आठ सौ छात्र-छात्राओं को एक ही शिफ्ट में पढ़ाया जाने लगा. स्कूल के सात कमरे में क्लास चलते है व एक कमरे में तीनों स्कूल का कार्यालय चलाया जाता है. सात कमरे में 800 विद्यार्थियों के बैठने तक की जगह नहीं होती है. गौर करनेवाली बात यह है कि शिक्षा मंदिर मध्य विद्यालय का पोषक इलाका व सीआरसी दोनों ही इन विद्यालयों से भिन्न है.
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