ऐतिहासिक कदम: राज्य में पूर्ण शराबबंदी, अब न देसी मिलेगी, न ही विदेशी शराब पहिला बार कुछ अच्छा हुआ है, केतना के घर आबाद हो जइतो बाबू ...

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Apr 2016 8:15 AM

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गया : बिहार में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा के बाद चंदौती रोड की सीमा देवी काफी खुश हैं. कहने लगीं, ‘पहिला बार बिहार में कोई बढ़िया फैसला हुआ है, केतना के घर आबाद हो जइतो बाबू, नीतीश बाबू बहुते अच्छा काम किये हैं’. वह कहती हैं कि पिछले कई साल से वह अपने बेटे से […]

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गया : बिहार में पूर्ण शराबबंदी की घोषणा के बाद चंदौती रोड की सीमा देवी काफी खुश हैं. कहने लगीं, ‘पहिला बार बिहार में कोई बढ़िया फैसला हुआ है, केतना के घर आबाद हो जइतो बाबू, नीतीश बाबू बहुते अच्छा काम किये हैं’.
वह कहती हैं कि पिछले कई साल से वह अपने बेटे से परेशान हैं. रोज शराब पी कर घर आता है. गाली गलौज, अभद्र व्यवहार, परिवार वालों की बेइज्जती. यह सब घर में रोज का हो गया था. लेकिन इधर कुछ दिनों से शराब नहीं मिलने की वजह से उसमें काफी बदलाव दिखने लगा. वह वक्त पर घर आता है, उसने घर के खर्च के लिए भी कुछ पैसे दिये. सब के साथ अच्छा व्यवहार भी किया. सीमा देवी खुश हैं, क्योंकि अब हमेशा के लिए शराब की बिक्री पर रोक लग गयी है. अब उनका बेटा शराब नहीं पीयेगा और उसकी आदत भी धीरे-धीरे छूट जायेगी. सीमा कहती हैं कि उनके जैसे ही और भी कई घर के सदस्य शराब की लत से परेशान होंगे. सभी लोग मुख्यमंत्री के इस फैसले पर खुश हैं. कहती है कि इस शराब ने न जाने कितने घरों को बरबाद किया है.
मजदूरों की परेशानी
शराब गोदाम में वर्षों से काम कर रहे मजदूर भी परेशान दिखे. शराब बंद होने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. वह तो परेशान इस बात से हैं कि उनका घर कैसे चलेगा . शहर के दुर्गाबाड़ी रोड स्थित शराब गोदाम में करीब 32 मजदूर पिछले 20 से अधिक वर्षों से काम कर रहे हैं. हर रोज सैकड़ों शराब की पेटियां उतारते हैं. हर पेटी पर तीन रुपये मिलते हैं. कुल मिला कर रोज 200-300 रुपये की कमायी हो जाती है. बिहार में सभी प्रकार की शराब की बिक्री पर रोक के साथ ही गोदाम में सभी कामकाज बंद हो गये. अब न तो ट्रक आयेंगे और न शराब. इन मजदूरों के सामने मुश्किल है कि अब वह क्या करेंगे.
.. और मायूस हो गये शराब के खरीदार
इधर सभी प्रकार की शराब बंदी की सूचना के साथ ही वैसे लोग बेहद उदास नजर आये, जो इस बात से खुश थे कि शहर में शराब की दुकानें खुल रही हैं. सूचना पाने के बाद विश्वास नहीं हुआ, तो सब शराब गोदाम तक पहुंच गये. यहां आ कर कंफर्म किया. आपस में बातचीत कर अफसोस भी जताते रहे. इनमें से कुछ ने कहा कि दो तीन दिनों से शहर में शराब नहीं मिल रही थी. अखबारों में पढ़ा कि मंगलवार से शहर में कुछ जगहों पर शराब मिलने लगेंगी .
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