निगम में नियमों को ताक पर रख भर्ती किये जा रहे दैनिक व संविदा कर्मचारी !

Updated at : 21 Jul 2018 9:56 AM (IST)
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निगम में नियमों को ताक पर रख भर्ती किये जा रहे दैनिक व संविदा कर्मचारी !

नगर निगम में संविदा पर कर्मचारी रखने के लिए बनी है पहले से कमेटी डीएम स्तर की गठित स्क्रीनिंग समिति की अनुशंसा के बगैर ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किया जा रहा बहाल गया : नगर निकायों में देखा जा रहा है कि निगम के रिटायर्ड कर्मचारियों की भर्ती बोर्ड व स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में […]

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नगर निगम में संविदा पर कर्मचारी रखने के लिए बनी है पहले से कमेटी
डीएम स्तर की गठित स्क्रीनिंग समिति की अनुशंसा के बगैर ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को किया जा रहा बहाल
गया : नगर निकायों में देखा जा रहा है कि निगम के रिटायर्ड कर्मचारियों की भर्ती बोर्ड व स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में प्रस्ताव पारित कर संविदा पर कर ली जा रही है.
कमोबेश यही स्थित अस्थायी कर्मचारियों को रखने को लेकर बनी है. अस्थायी कर्मचारियों को रखने में अब तक सिर्फ पैरवी को महत्व दिया गया है. इस अराजकता को समाप्त करने के लिए नगर विकास विभाग ने पहले से चली आ रही एक कमेटी की जानकारी देते हुए कहा है कि कमेटी के माध्यम से ही किसी कर्मचारी को संविदा पर बहाल किया जायेगा. बावजूद इसके अब तक संविदा पर रखने के लिए कमेटी की सहमति नहीं ली गयी है.
हाल ही में स्टैंडिंग कमेटी की बैठक में कुछेक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दोबारा से पूर्व के ही पद पर संविदा पर रखने के लिए प्रस्ताव पारित करने का खेल खेला गया है. प्रस्ताव पारित होने के बाद एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गयी हैं.
प्रदेश भर के निकायों में सबसे अधिक यहां हैं कर्मचारी : प्रदेश के नगर निकायों पर ध्यान दिया जाये, तो गया नगर निगम में हर स्तर के कर्मचारियों की संख्या सबसे अधिक है. इसके बावजूद हर प्रकार के काम के बारे शिकायत मिलती रहती है.
जानकारों का कहना है कि नगर निगम के कर्मचारी अगर ट्रेंड होते और दृढ़ इच्छाशक्ति से काम करते, तो यहां होल्डिंग टैक्स वसूली के लिए किसी प्राइवेट एजेंसी को जिम्मेदारी देने के बात सामने नहीं आती. इसके बाद भी टैक्स वसूली का प्लान सक्सेस होता है,तो यहां की नगर सरकार सफाई व्यवस्था भी प्राइवेट एजेंसी के हाथों में सौंपने पर विचार कर सकती है. इसके बाद यहां अस्थायी कर्मचारियों के सामने काम का संकट सामने होगा.
संविदा पर रखने का नियम
नगर विकास व आवास विभाग के निदेशक सह संयुक्त सचिव द्वारा 2016 में जारी पत्र में साफ कहा गया है कि नियोक्ता नगर निकाय हो और रिटायर्ड कर्मचारियों का चयन किया जाना हो तो ऐसी स्थिति में डीएम स्तर की गठित स्क्रीनिंग समिति की अनुशंसा पर ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संविदा पर लिया जा सकेगा. कमेटी में डीएम अध्यक्ष, सदस्य के रूप में डीडीसी, अपर समाहर्ता, स्थानीय नगर निकाय के नगर आयुक्त या कार्यपालक पदाधिकारी,अनुसूचित जाति के उप समाहर्ता स्तर के एक पदाधिकारी होंगे. अब तक इस नियम का पालन निगम में नहीं किया जा सका है.
यही नहीं नगर विकास व आवास विभाग का यह भी आदेश है कि उन्हीं कर्मचारियों को संविदा पर रखा जायेगा जिनके ऊपर किसी प्रकार को कोई आपराधिक मुकदमा या विभागीय जांच लंबित नहीं हो. यह सारे आदेश फाइलों में ही दब कर रह गये हैं. नगर निकाय की परिपाटी रही है कि रिटायर्ड कर्मचारी को संविदा पर रखने के लिए बगैर स्क्रीनिंग समिति की अनुशंसा के ही स्टैंडिंग व बोर्ड में प्रस्ताव पारित कर लिया जाता है और नगर आयुक्त धीरे से ज्वाइनिंग का एक पत्र निर्गत कर देते हैं.
अस्थायी कर्मचारियों को रखने के मानक
अस्थायी कर्मचारियों को रखने के लिए नगर निगम में कोताही बरती गयी है. आश्चर्य की बात यह है कि इनकी बहाली में अब तक किसी तरह की योग्यता व आचरण की जांच नहीं की गयी है. यहां ड्राइवर, कंप्यूटर ऑपरेटर, जलापूर्ति केंद्र ऑपरेटर, सहायक व सफाई कर्मचारी के पद पर 1800 लोगों को बहाल अस्थायी तौर पर किया गया है. कई बार यहां के ड्राइवर की गलती से निगम को लाखों रुपये का जुर्माना भरना पड़ा है. इसके अलावा जलापूर्ति केंद्र ऑपरेटर के कारण कई मोटर फूंक गयी हैं.
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