गया में विदेशी परिवार ने किया पिंडदान, रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए जवान के लिए की प्रार्थना
Published by : Sakshi kumari Updated At : 15 May 2026 12:48 PM
पिंडदान करते हुए परिजनों की तस्वीर
पवित्र फल्गु नदी तट पर रूस देश से आए एक परिवार ने रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए अपने परिजन की आत्मा की शांति के लिए विधिवत पिंडदान किया.
Gaya News:(गया से संजीव कुमार सिन्हा) मोक्षभूमि गया में एक बार फिर विदेशी श्रद्धालुओं की आस्था देखने को मिली. पवित्र फल्गु नदी तट पर रूस देश से आए एक परिवार ने रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए अपने परिजन की आत्मा की शांति के लिए विधिवत पिंडदान किया. रूस-यूक्रेन युद्ध में शहीद हुए जवान की स्मृति में उसकी बहन, जीजा और छोटी बच्ची ने एक साथ पिंडदान कर श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान फल्गु तट का माहौल भावुक हो गया.

रूस -यूक्रेन युद्ध में मारे गए थे जवान
बताया गया कि शहीद जवान का नाम फेस टू बाल गए है.जो रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में मारे गए थे. उनकी आत्मा की शांति के लिए उनकी बहन ललिता राधा रानी फेस, जीजा सुंदरा फेस और परिवार के अन्य सदस्य गया पहुंचे. सभी ने वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पिंडदान संपन्न किया. शहीद जवान के जीजा सुंदरा फेस ने कहा कि युद्ध में उनके साले की मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट गया था. उन्होंने कहा कि गयाजी में पिंडदान करने की मान्यता पूरे विश्व में है, इसलिए वे यहां आए हैं ताकि मृत आत्मा को शांति मिले और परिवार में सुख-शांति बनी रहे.

पिडंदान करने के लिए गया पहुंचा परिवार
उन्होंने कहा कि, हम अपने साले और अपने पिता की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान कर रहे हैं. उनका साला युद्ध में शहीद हो गया था. उसकी आत्मा की शांति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए वे गया में पिंडदान करने आए हैं. ताकि परिवार में सुख-शांति और खुशहाली बनी रहे.

स्थानीय पुरोहित ने कराया पिंडदान
फल्गु नदी तट पर पिंडदान की प्रक्रिया स्थानीय पुरोहित कुमार गौरव की देखरेख में संपन्न हुई. पुरोहित कुमार गौरव ने बताया कि यह पूरा परिवार रूस देश का रहने वाला है और विशेष रूप से गया में पिंडदान करने पहुंचा है. उन्होंने कहा कि गया की धार्मिक मान्यता पूरे विश्व में है और यहां आने वाले श्रद्धालुओं का विश्वास है कि पिंडदान से पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है.

हर साल हजारों श्रद्धालु करते हैं मोक्षनगरी में पिंडदान
गौरतलब है कि फल्गु रिवर तट पर हर साल देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान करने आते हैं. विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या गयाजी की आध्यात्मिक और धार्मिक महत्ता को दर्शाती है. इस दौरान स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने भी विदेशी परिवार की आस्था को देखकर भावुकता व्यक्त की. युद्ध में जान गंवाने वाले जवान को श्रद्धांजलि देते हुए परिवार के सदस्यों ने ईश्वर से आत्मा की शांति की प्रार्थना की.
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साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में अपनी करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.
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