Darbhanga News: बारूद की ढेर पर बैठी दुनिया को बचा सकता सिर्फ संत कबीर के विचार

Edited by PRABHAT KUMAR
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Darbhanga News:शनिवार को दरभंगा प्रेक्षागृह में ्सत धर्म फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से सद्गुरु कबीर साहेब प्राकट्य दिवस वचनवंशीय मूल गद्दी रोसड़ा के आचार्य महंथ सुरेश साहेब की अध्यक्षता में मनाया गया.

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Darbhanga News: दरभंगा. शनिवार को दरभंगा प्रेक्षागृह में ्सत धर्म फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से सद्गुरु कबीर साहेब प्राकट्य दिवस वचनवंशीय मूल गद्दी रोसड़ा के आचार्य महंथ सुरेश साहेब की अध्यक्षता में मनाया गया. कार्यक्रम की शुरुआत ध्वज फहराकर और दीप प्रज्ज्वलित कर की गयी. फाउंडेशन के अध्यक्ष शंभू साहेब ने कहा कि आज दुनिया बारूद की ढ़ेर पर बैठकर अंतिम श्वांस गिन रही है. इस विषम परिस्थिति में संत कबीर के विचार ही हमें बचा सकते हैं. कहा कि मध्यकाल विभिन्न तापों से तप रहा था. वर्ण व्यवस्था, वर्ग व्यवस्था, जाति व्यवस्था लोगों को परेशान किये थी. भगवान और भाग्य, मंदिर-मस्जिद जैसे विवादों से भारत की भूमि रक्त रंजित हो रही थी. ऐसे विकट काल में सद्गुरु कबीर साहेब का आना एक ऐतिहासिक उपलब्धि रही.

जिस कबीर साहेब के कारण मिला उंचा पद, उनको ही भुलाया

संतों ने आश्चर्य जताया कि जिस कबीर साहेब के सामाजिक न्याय व समतामूलक समाज स्थापना के कारण आज उंचे-उंचे ओहदे पर वंचित समाज के लोग हैं, वे कबीर साहेब का ख्याल नहीं कर रहे. सद्गुरु कबीर साहेब के विभिन्न आश्रमों की संपति या तो सरकार कब्जा कर रही या दबंग लोग कब्जा करते जा रहे. प्रशासनिक पदाधिकारी किसी तरह की कार्रवाई नहीं कर रहे. कहा गया कि बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड में कबीर पंथी को भी शामिल कर दिया गया है, परंतु कबीर पंथी संत-महंथों को समिति में शामिल नहीं किया गया है. इस कारण सरकार तक कबीर पंथी समाज की बातें नहीं पहुंच पा रही.

बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड से कबीर पंथ को रखा जाये अलग

संतों ने कहा कि कबीर पंथ को बिहार धार्मिक न्यास बोर्ड से अलग रखा जाए. कहा कि आज तक कबीर धर्म को संवैधानिक मान्यता भी नहीं मिली है. इसके कारण कबीर पंथी को सामाजिक न्याय नहीं मिल रहा है. सबसे पहले अन्य धर्म की तरह ही इसे संवैधानिक मान्यता मिले. कार्यक्रम में आचार्य दीप नारायण साहेब, धनवंती साहेब, महंथ डॉ सुन्दर दास शास्त्री साहेब, महंथ साहेब रमेश दास, साध्वी सूचित साहेब, महंथ नारायण साहेब, महंथ डॉ धर्मवीर भाष्कर साहेब, शंकर दयाल साहेब आदि संत- महंथ ने विचार रखा. मंच संचालन महंत रीतिलाल साहेब ने किया. मौके पर संत बद्री चौपाल, अमित कुमार, चंदन साहेब, आजाद साहेब, रामचंद्र साहेब आदि मौजूद थे.

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