बंगाली समुदाय करता है परंपरागत तरीके से पूजा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :04 Oct 2016 4:05 AM (IST)
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वीणा पाणि क्लब में 100 वर्ष से अधिक समय से हो रहा आयोजन शहर में दो जगहों पर समुदाय सार्वजनिक रुप से करता पूजा दरभंगा : दुर्गा पूजा दरभंगा शहर में अनेक जगहों पर होती है, लेकिन यहां वर्षों से जीवन-यापन करनेवाले बंगाली समुदाय के लोग इस पूजनोत्सव खास बंगाली पद्धति से मनाते चले आ […]
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वीणा पाणि क्लब में 100 वर्ष से अधिक समय से हो रहा आयोजन
शहर में दो जगहों पर समुदाय सार्वजनिक रुप से करता पूजा
दरभंगा : दुर्गा पूजा दरभंगा शहर में अनेक जगहों पर होती है, लेकिन यहां वर्षों से जीवन-यापन करनेवाले बंगाली समुदाय के लोग इस पूजनोत्सव खास बंगाली पद्धति से मनाते चले आ रहे हैं. लहेरियासराय बंगाली टोला में वीणा पाणि क्लब स्थापना 1891 के अलावा लालबाग स्थित पिताम्बरी बंगला स्कूल में ‘विचित्रा क्लब’ एवं लालबाग में डॉ एसके दास के प्रांगण में पूजा होती है. वीणा पाणि क्लब एवं विचित्रा क्लब में बंगाली समुदाय के लोगों के अलावा अन्य लोग सार्वजनिक दुर्गा पूजा मनाते हैं.
डॉ दास के यहां घरोपा पूजा (वारोयारि) मनाया जाता है. वीणा पाणि क्लब में दुर्गा पूजा का आकर्षण दुर्गाजी का भव्य रुप होता है. पिछले 30-35 वर्षों से इसी मोहल्ले के कलाकार रजत किशोर दत्ता (पांतु दा) अपने हाथों से मूर्ति बनाने से लेकर सजाने का काम करते चले आ रहे है. खराब होने के कारण दो सालों से कोलकाता से कारीगर बुलाकर मूर्ति बनायी जाती है.
वीणा पाणि क्लब के अध्यक्ष वरुण कुमार बनर्जी बताते हैं कि षष्ठी की रात को पट खुलने के पश्चात पूजा-अर्चना शुरू हो जाती है. सप्तमी की सुबह केला के पेड़ को पोखर से नहलाने के बाद पूजा स्थल पर विराजमान किया जाता है. सुबह प्रसाद में नारियल के लड्डू के अलावा फल दिया जाता है. दोपहर में खिचड़ी को भोग लगाया जाता है. रात में हलवा का प्रसाद वितरित किया जाता है. अष्टमी की रात संधि पूजो (निशा पूजा) का विशेष महत्व है. नवमी की दोपहर खिचड़ी का भोग भक्तों को बैठाकर खिलाया जाता है. दशमी को गरीबों के बीच चावल, दाल, आलू और पैसों का वितरण क्लब के सदस्यों के द्वारा किया जाता है. दशमी की दोपहर महिलाएं एक दूसरे को सिंदूर लगाकर बधाई देती है.
राम में बच्चों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं नाटक प्रस्तुत किया जाता है. यहां (ढाक) का विशेष महत्व है. बिना ढाक बजने के पूजा को शुभ नहीं माना जाता है. दशमी को विसर्जन के उपरांत बंगाली समुदाय के लोग एक-दूसरे से गले मिलते हैं और शुभो विजया कहकर अभिनंदन करते हैं.
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