वार्डों में खुलेंगे पार्षदों का कार्यालय

Published at :04 Jan 2016 7:47 PM (IST)
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वार्डों में खुलेंगे पार्षदों का कार्यालय

वार्डों में खुलेंगे पार्षदों का कार्यालय आठ वर्ष पूर्व निगम बोर्ड ने लिया था निर्णयसरकार ने बोर्ड के निर्णय पर नहीं दिया था प्रत्युत्तर फोटो संख्या- 14परिचय- मेयर की तसवीर फोटो संख्या- 16परिचय- पूर्व मेयर की तसवीर फोटो संख्या- 15, 17 एवं 18 परिचय- पार्षदों की तसवीर नाम के साथ दरभंगा. आठ वर्ष पूर्व दरभंगा […]

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वार्डों में खुलेंगे पार्षदों का कार्यालय आठ वर्ष पूर्व निगम बोर्ड ने लिया था निर्णयसरकार ने बोर्ड के निर्णय पर नहीं दिया था प्रत्युत्तर फोटो संख्या- 14परिचय- मेयर की तसवीर फोटो संख्या- 16परिचय- पूर्व मेयर की तसवीर फोटो संख्या- 15, 17 एवं 18 परिचय- पार्षदों की तसवीर नाम के साथ दरभंगा. आठ वर्ष पूर्व दरभंगा नगर निगम की बोर्ड ने तत्कालीन मेयर अजय पासवान की अध्यक्षता में सभी 48 वार्डों में कार्यालय खोलने तथा उनमें उपस्कर आपूर्ति करने का निर्णय लिया था. निगम बोर्ड के निर्णय के आलोक में तत्कालीन नगर आयुक्त ने राज्य सरकार के पास इसके अनुमोदन तथा राशि आवंटन के लिए प्रस्ताव भेजा था. लेकिन विगत आठ वर्षों से वह नगर विकास एवं आवास विभाग की संचिका में दबी रही. अब राज्य सरकार ने स्वयं सभी नगर निकायों के वार्डों में कार्यालय खोलने का निर्णय लिया है. प्रभात खबर में सोमवार को इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित होने पर वर्तमान, पूर्व मेयर सहित कई पार्षदों ने भी इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आठ वर्ष पूर्व बोर्ड की बैठक में लिये गये निर्णय पर यदि सरकार अनुमोदित कर देती तो वार्डों में कार्यालय खोलने वाला दरभंगा नगर निगम सबसे पहली पंक्ति में होता. ज्ञात हो कि निगम बोर्ड के उस निर्णय के बाद वार्ड नंबर 11 के पार्षद सुबोध प्रसाद ने हसनचक स्थित नगर निगम की जमीन पर अपना कार्यालय भी खोल लिया. वार्ड चुनाव के समय आचार संहिता का हवाला देकर जिला प्रशासन ने उसे हटा दिया था. लेकिन पुन: पार्षद बनते ही सुबोध प्रसाद ने वहां कब्जा जमा लिया. मेयर गौड़ी पासवान ने सरकार के इस निर्णय की सराहना करते हुए बताया कि वार्ड में कार्यालय होने के बाद आमजन को छोटे-मोटे कार्य के लिए निगम कार्यालय का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा. वार्ड पार्षद से लेकर सफाई जमादार एवं राजस्व कर्मी के माध्यम से वे अपनी समस्या का निदान कर पायेंगे. उन्होंने सरकार के इस निर्णय को जनहितैषी बताया. पूर्व मेयर अजय पासवान ने बताया कि वर्ष 2008 में निगम बोर्ड के निर्णय को यदि सरकार अनुमोदित कर देती तो वर्षों पूर्व शहर के सभी वार्डों में अपना कार्यालय हो गया होता तथा आमजन इससे लाभान्वित हो रहे होते. लेकिन देर से ही सही, सरकार ने जो निर्णय लिया है वह शहरवासियों के हित में है. निगम पार्षद रीता सिंह ने बताया कि पार्षद कार्यालय नहीं होने के कारण सुबह से देर रात तक विभिन्न समस्याओं के निदान के लिए वार्ड के लोग पार्षद के घर पर ही आते हैं. यदि सरकार कार्यालय का प्रावधान कर देती है तो वैसी स्थिति में पार्षद के साथ-साथ आमजन को भी सहूलियत होगी तथा बार-बार किसी कार्य को लेकर नगर निगम कार्यालय का चक्कर लगाने से भी लोगों को निजात मिलेगी. पार्षद मधुबाला सिन्हा का मानना है कि यदि वार्ड में कार्यालय होगा तो लोगों के अधिकांश समस्याओं का निदान वार्ड स्तर पर हो जायेगा. उन्होंने बताया कि जिस वक्त निगम बोर्ड ने यह निर्ण्य लिया था, यदि उसी वक्त सरकार की ओर से इसपर स्वीकृति मिल जाती तो यहां के लोगों को यह सुविधा वर्षों पूर्व से मिलती होती. लेकिन विलंब से ही सही सरकार का यह निर्णय सराहनीय है. तत्कालीन निगम बोर्ड के सशक्त स्थायी समिति सदस्य प्रदीप गुप्ता ने कहा कि विलंब से ही सही सरकार का यह निर्णय जनहित से जुड़ा है. इससे वार्ड के लोगों को काफी सहूलियत होगी. उन्होंने बताया कि विभिन्न कार्यों से पार्षदों के आवास पर जो लोगों की भीड़ लगी रहती है उससे निदान मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर समस्या का निदान होने से आमजन को सहूलियत होगी.

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