कलाकारों का दर्द, हुनर के मुताबिक नहीं मिलता पैसा

Updated at : 10 Sep 2017 6:10 AM (IST)
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कलाकारों का दर्द, हुनर के मुताबिक नहीं मिलता पैसा

मोतिहारी : जिले में दुर्गापूजा को लेकर उल्लास चरम पर है. पूजा-पंडाल निर्माण कार्य भी जोरों पर है. पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से पूजा-पंडाल निर्माण कार्य के मद्देनजर पहुंचे कलाकार अपने हुनर से दुर्गापूजा की रौनक में चार चांद लगाने की तैयारी में जुटे हैं. यह सिलसिला पिछले कई वर्ष से यूं ही जारी […]

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मोतिहारी : जिले में दुर्गापूजा को लेकर उल्लास चरम पर है. पूजा-पंडाल निर्माण कार्य भी जोरों पर है. पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से पूजा-पंडाल निर्माण कार्य के मद्देनजर पहुंचे कलाकार अपने हुनर से दुर्गापूजा की रौनक में चार चांद लगाने की तैयारी में जुटे हैं.

यह सिलसिला पिछले कई वर्ष से यूं ही जारी है. हर बार की तरह काम पूरा होते ही लौट आते ही वापस अपने घर. लेकिन, उस कलाकार को लोगों द्वारा उसकी हुनर की तारीफ शायद ही सुनने को मिलती हो.
एक कलाकार को और चाहिए भी क्या? छोड़िए भी, कई बार तो पूजा पंडाल को आकर्षक रंग व रूप देकर विभिन्न प्रतिरूपों में ढालने वाले ऐसे कलाकार आर्थिक बोझ के तले इतने दबे होते हैं कि इनकी जिंदगी निरस व उबाऊ भी हो जाती है. एक कलाकार की मनोदश को जानने के लिए प्रभात खबर की टीम जब कचहरी चौक स्थित जगदंबा आनंदधाम मंदिर परिसर में पूजा-पंडाल निर्माण कार्य में जुटे कोलकाता के हुगली शहर स्थित मोनरा गांव से पहुंचे कलाकार शोमेर साहा से बातचीत की तो कई अनसुलझे प्रश्नों का जवाब मिल गया. पूछने पर कि एक कलाकार के रूप में अपने योगदान का पैसा वसूल हो जाता है, तो जवाब मिलता है नहीं.
हां इतना पैसा जरूर मिल जाता है कि दो वक्त की रोटी नसीब हो सकी. फिर यह पेशा छोड़ क्यों नहीं देते, तो रूंधे गले से बरबस बोल पड़ते हैं कि साहब इस पेशे से पिछले तीस वर्षों से जुड़ा हूं. अब जब छोड़ दूंगा को खाऊंगा क्या? घर कैसे चलेगा? सब मां की कृपा है. आगे जो भी होगा वह मां की कृपा से अच्छा ही होगा. पिछले तीन साल से पूजा-पंडाल निर्माण कार्य के लिए मोतिहारी आनेवाले शोमेर अपने घर लौटने के बाद फिर कुछ काम तो मिलेगा के सवाल पर चुप्पी साध लेते हैं. फिर हल्की मुस्कान छेड़ते हुए बोल पड़ते हैं, यह तो कहा नहीं जा सकता. हां कभी एक माह तो कभी चार से पांच माह भी लग जाते हैं. लेकिन, मोतिहारी आना मुझे अच्छा लगता है. पैसा भी मिलता हैं. हां एक कलाकार को उसकी हुनर की तारीफ होती है तो अच्छा लगता है. यह होना ही चाहिए.
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