बबुआ अभी तक कोनो डॉक्टर नइखे आइल...

Updated at : 22 Aug 2017 4:54 AM (IST)
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बबुआ अभी तक कोनो डॉक्टर नइखे आइल...

मोतिहारी : स्थान शहर का गौरीशंकर राजकीय मध्य विद्यालय, प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ पीड़ितों के लिए बनी राहत शिविर. दिन सोमवार. समय 11:10 बजे थे. परिसर में जमा बाढ़ के पानी के बीच किलकारियां गूंज रही थी. बच्चे खेल में मशगूल थे. एक झन्नाटेदार आवाज और खींच लाती है उन्हें परिजन के पास. फिर हल्का […]

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मोतिहारी : स्थान शहर का गौरीशंकर राजकीय मध्य विद्यालय, प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ पीड़ितों के लिए बनी राहत शिविर. दिन सोमवार. समय 11:10 बजे थे. परिसर में जमा बाढ़ के पानी के बीच किलकारियां गूंज रही थी. बच्चे खेल में मशगूल थे. एक झन्नाटेदार आवाज और खींच लाती है उन्हें परिजन के पास. फिर हल्का भोजन और पानी में खेलने की व्याकुलता व छटपटाहट जाने को मजबूर करती है.

इस बीच परिजन के ‘पानी में जइबे त तबीयत खराब हो जाइ, अभी तक त कोनो डॉक्टरों नइखे आइल’ सुन उनके पानी में जाने के बढ़े कदम रूक जाते हैं.
परिजन व बच्चों के बीच हल्की व मीठी अटखेलियों के बीच राजू राम आ पहुंचते हैं. पूछने पर बताते हैं बाढ़ ने सब कुछ छिन लिया. मेहनत से बसा-बसाया आशियाना बाढ़ ने तहस-नहस हो गया. अब आशियाने को बसाने में पैसे कहां से आयेंगे. काम धंधा चौपट हो गया है. अब प्रशासन ही हमारे सुख के दिन लौटा सकता है. एक ही सांस ने बोलते-बोलते राजू के त्योरियों पर बल पड़ने लगे थे. यह दास्तान एक राजू नहीं, बल्कि शत्रुघ्न राम, सविता देवी ऐसे सैकड़ों लोगों की थी,
जो हनुमानगढ़ी के खुशबूनगर व सलामपुर आदि क्षेत्रों में बाढ़ से मची तबाही के बाद गौरीशंकर राजकीय मध्य विद्यालय में शरण लिए हुए हैं. बाढ़ पीड़ित गीता देवी, रंभा देवी, शैलकुमारी देवी, आयशा खातुन, नुरजहां खातुन, सपना देवी आदि ने प्रशासनिक स्तर पर मिल रही राहत सामग्री पर खुशी जाहिर की, कहा कि सुबह व शाम पूरी व सब्जी मिल रही है. बीच-बीच में नाश्ते में दूध व पावरोटी के अलावा फल का भी वितरण किया जाता है. इस स्थिति में नमक-रोटी भी मिले तो काफी है. फिर सभी शांत हो जाते हैं. कहती हैं कि अब हमारे पुराने दिन कैसे लौटेंगे. यह सवाल है, जो परेशान कर रहा है. सवाल बड़ा है. इसलिए कि इन पीड़ितों के दुख के दिन कैसे छटेंगे और कब उनके आशियाने किलकारियों से गुलजार होंगे.
शहर के गौरीशंकर राजकीय मध्य विद्यालय राहत शिविर
में बाढ़ पीड़ितों की दास्तान
लगभग 150 की संख्या में शिविर में रह रहे हैं बाढ़ पीड़ित
अधिकांश लोग रहनेवाले हैं हनुमानगढ़ी के खुशबूनगर
व सलामपुर के
राहत सामग्री मिलने से खुश
हैं बाढ़ पीड़ित
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