बिहार में 5% खतियानी जमीन लापता, सरकार चलाएंगी सर्च आपरेशन

Deputy Chief Minister Vijay Kumar Sinha
Bihar Bhumi: बिहार विधानसभा के बजट सत्र में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सदन में बताया कि राज्य में करीब 45 प्रतिशत जमीन खतियानी है, जबकि लगभग 5 प्रतिशत जमीनों के अभिलेख गायब कर दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने ऐसे रिकॉर्ड खोजने के लिए विशेष मैकेनिज्म तैयार किया है और राज्यभर में भूमि सर्वेक्षण अभियान तेज कर दिया गया है.
Bihar Bhumi: उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने विधानसभा में कहा कि कई मामलों में जानबूझकर जमीन के दस्तावेज छिपाने या नष्ट करने की शिकायतें मिली हैं. ऐसे लोगों से अभिलेख उपलब्ध कराने को कहा गया है और प्रशासनिक स्तर पर भी रिकॉर्ड खोजे जा रहे हैं.
सरकार की कोशिश है कि विवादरहित जमीनों का सर्वे जल्द पूरा किया जाए, ताकि भविष्य के भूमि विवाद कम हों. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जमीन से जुड़े मामलों में न्यायालय का विकल्प हमेशा खुला रहेगा.
सिर्फ 45% जमीन ही शुद्ध खतियानी
विधानसभा में दिए आंकड़ों के अनुसार राज्य में केवल 45 प्रतिशत जमीन ही पूरी तरह खतियानी श्रेणी में आती है. सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि लगभग 5 प्रतिशत जमीनों के अभिलेख या तो गुम हैं या उन्हें साजिशन नष्ट कर दिया गया है. सरकार का दावा है कि अब ऐसी तकनीकी व्यवस्था लागू की जा रही है जिससे कोई भी दस्तावेज छिपाया नहीं जा सकेगा और हर जमीन का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से ट्रैक किया जा सकेगा.
श्री विजय कुमार सिन्हा ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यह महज इत्तेफाक नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश है. लेकिन अब सरकार ऐसी ‘हाई-टेक’ तकनीक लेकर आई है जिससे कोई भी दस्तावेज अब छिप नहीं सकेगा.
खोई जमीन का हिसाब लेने की तैयारी
उपमुख्यमंत्री श्री विजय कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि जमीन एक तकनीकी मामला है और इसके लिए सरकार ने जो मैकेनिज्म तैयार किया है, वह हर इंच जमीन का हिसाब रखेगा. हालांकि, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि अगर कोई तकनीकी त्रुटि होती है, तो नागरिकों के लिए न्यायालय का रास्ता हमेशा खुला रहेगा.
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य भविष्य में होने वाले खूनी जमीनी विवादों को जड़ से खत्म करना और एक पारदर्शी लैंड रिकॉर्ड सिस्टम बनाना है.
बक्सर-गोपालगंज सर्वे में गड़बड़ी
भू-सर्वे को लेकर बक्सर और गोपालगंज से गंभीर शिकायतें सामने आई हैं. डुमरांव क्षेत्र में 1989 के सर्वे में कई जमीनों को ‘अनाबाद बिहार सरकार’ खाते में डालने का मामला उठा, जिससे स्थानीय लोग परेशान हैं. सरकार ने साफ कहा है कि यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो कठोर कार्रवाई की जाएगी.
सदन में जब डुमरांव विधायक राहुल सिंह ने बक्सर का मुद्दा उठाया, तो हर कोई दंग रह गया. वहां 1989 के सर्वे के दौरान असली रैयतों के वंशजों का नाम होने के बावजूद जमीन को ‘अनाबाद बिहार सरकार’ के खाते में डाल दिया गया. इसी तरह की शिकायतें गोपालगंज से भी आई हैं.
सरकार ने साफ कर दिया है कि जिन अधिकारियों ने अपनी कलम से जनता की जमीन ‘हड़पने’ का खेल खेला है, उन पर अब कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग अब हर जिले की फाइलों को खंगालने की तैयारी में है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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