प्रभात खबर एक्सक्लूसिव: बिहार की बेटियों को गायब करनेवाले 3-लेवल के सिंडिकेट का खुलासा
Published by : Karuna Tiwari Updated At : 11 Jun 2026 11:10 AM
सांकेतिक तस्वीर
Prabhat Khabar Exclusive रिपोर्ट में खुलासा हुआ है बिहार में सक्रिय 3-लेवल मानव तस्करी सिंडिकेट का, जो गांवों से बेटियों को गायब कर बड़े शहरों में बेच रहा है. जानिए पूरा नेटवर्क और चौंकाने वाले आंकड़े.
Prabhat Khabar Exclusive: (अनिकेत त्रिवेदी की रिपोर्ट)
बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में गरीब एवं दलित परिवारों की किशोरियां एक बेहद सुनियोजित और क्रूर त्रिस्तरीय मानव तस्करी (थ्री-टियर ट्रैफिकिंग) नेटवर्क के निशाने पर हैं. यह नेटवर्क केवल अपराध नहीं बल्कि एक संगठित सिस्टम के रूप में काम करता है, जो गांवों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर, धोखे से या दबाव में लेकर देश के बड़े शहरों तक पहुंचाता है. वहां उन्हें घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी या जबरन विवाह जैसे अमानवीय हालात में धकेल दिया जाता है. हालिया आंकड़े इस भयावह सच्चाई की पुष्टि करते हैं कि बिहार अब देश के प्रमुख “सोर्स स्टेट” में शामिल हो चुका है.
चौंकाने वाले आंकड़े: बिहार में गुमशुदगी का बढ़ता संकट
हर साल हजारों बच्चे हो रहे लापता
बिहार में हर वर्ष औसतन 12,000 से 14,000 बच्चे लापता हो रहे हैं. वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 14,699 तक पहुंच गया.
किशोरियां सबसे अधिक निशाने पर
गायब होने वाले कुल बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत संख्या 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की है.
2023 के आंकड़े और भी चिंताजनक
साल 2023 में कुल 12,299 लापता बच्चों में से लगभग 75 प्रतिशत केवल लड़कियां थीं, यानी हर चार में से तीन बच्चियां थी.
रेस्क्यू ऑपरेशन के आंकड़े
पिछले दो वर्षों में पुलिस और सामाजिक संगठनों ने मिलकर हजारों बेटियों को बचाया है. 2024-25 में 1,970 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया और 2025-26 में 1,492 लड़कियों का रेस्क्यू किया गया.
कैसे काम करता है त्रिस्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क
यह पूरा सिंडिकेट तीन अलग-अलग स्तरों पर बेहद संगठित तरीके से काम करता है.
लेवल-1: लोकल ट्रैपर्स (स्थानीय एजेंट)
गांवों में स्थानीय युवाओं को एजेंट बनाकर लड़कियों को निशाना बनाया जाता है.
- दोस्ती, प्रेम, शादी या नौकरी का लालच दिया जाता है.
- 1 से 2 महीने के भीतर टारगेट पूरा करने का दबाव होता है.
- परिवार से दूर कर भरोसे में लेकर लड़कियों को गांव से बाहर निकालना होता है.
लेवल-2: ट्रांजिट एजेंट (परिवहन गिरोह)
जैसे ही लड़की गांव से बाहर निकलती है, उसे दूसरे नेटवर्क को सौंप दिया जाता है.
- रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर हैंडओवर कर दिया जाता है.
- नशा देकर या धमकी देकर नियंत्रण में रखना.
- लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए अन्य राज्यों में भेजना.
लेवल-3: खरीद-बिक्री करने वाला नेटवर्क
महानगरों में यह अंतिम और सबसे खतरनाक स्तर सक्रिय होता है.
- लड़कियों को अज्ञात स्थानों पर कैद रखना
- मानसिक और शारीरिक शोषण करना
- पहचान मिटाकर जबरन शादी या बंधुआ मजदूरी के लिए बेचना
हाल की घटनाएं: कैसे रची गई तस्करी की साजिश
दास्तान-1: हैदराबाद कनेक्शन

साहेबगंज की 19 वर्षीय रूपा (बदला हुआ नाम) 9 फरवरी 2026 को आधार कार्ड सुधरवाने निकली थी. सहेली के ननिहाल से उसे हैदराबाद पहुंचा दिया गया, जहां पार्किंग में नौकरी के बहाने उसे शादी के लिए बेचने की तैयारी थी. पुलिस ने समय रहते काजीगुड़ा से बचाया.
दास्तान-2: सिकंदराबाद तक अपहरण

कोचस की 15 वर्षीय छात्रा प्रीति (बदला हुआ नाम) 1 जून 2026 को कोचिंग जाते समय लापता हो गयी. दोस्त ने झांसा देकर उसे सासाराम स्टेशन पर अपने जीजा को सौंप दिया. नशा देकर उसे सिकंदराबाद ले जाया गया. बाद में स्टेशन से उसका रेस्क्यू हुआ.
दास्तान-3: मोबाइल नंबर का जाल

मोतिहारी के पिपरा की 18 वर्षीय संजना (बदला हुआ नाम) सहेली से मिले मोबाइल नंबर के झांसे में आकर सिकंदराबाद भाग गयी. वहां उससे 12 घंटे बंधुआ मजदूरी करायी गयी. जबरन शादी की तैयारी थी, पर पुलिस ने उसे बचा लिया.
दास्तान-4: कोलकाता में बेचने की कोशिश
गोपालगंज के महम्मदपुर की 22 वर्षीय रीतु (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को दवा लेने निकली थी. इसके बाद नहीं लौटी. आरोपी उसे शादी व नौकरी का झांसा देकर कोलकाता ले गया, जहां बेचने की तैयारी थी. 15 दिन बाद बरामद हुई.
दास्तान-5: हैदराबाद से रेस्क्यू
सीवान जामो बाजार की 21 वर्षीय रश्मि (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को फॉर्म भरने निकली और गायब हो गयी. मानव तस्करी नेटवर्क के जरिये उसे भी हैदराबाद पहुंचाया गया, जहां से पुलिस ने उसे मुक्त कराया.
सिर्फ हैदराबाद-सिकंदराबाद से ही रेस्क्यू की गयी छह लड़कियां
पिछले छह माह में हमारे संगठन ने पुलिस के साथ मिलकर सिर्फ हैदराबाद-सिकंदराबाद से ही छह से अधिक लड़कियों को बराबद किया है. ये लड़कियां बिहार के विभिन्न जिलों से आयी थीं. उन्हें शादी या स्थायी नौकरी देने का झांसा दिया गया था. पहले उन्हें 12-12 घंटे का काम दिया गया और बाद में शादी के लिए बेचने की तैयारी की जा रही थी.
“राजू ओझा, चेयरमैन बिहार समाज सेवा संघ“
पुलिस की कार्रवाई और आधिकारिक बयान
सुहिता अनुपम, ADG, कमजोर वर्ग अपराध अनुसंधान विभाग
Q. घटनाएं बढ़ी हैं, खासकर बिहार में मानव तस्करी और लड़कियों की तस्करी के मामले, इस पर क्या कहना है?
ANS- ट्रैफिकिंग के हॉट स्पॉट चिह्नित किये जा रहे हैं. इस पर विशेष निगरानी रखी जा रही है. आर्केस्ट्रा संस्थानों के लिए पंजीवन अनिवार्य कर दिया गया है.
Q. बिहार में इसके कई हॉट स्पॉट हैं, उसके लिए पुलिस क्या कर रही है?
ANS- कुछ ऐसे गांव भी चिह्नित किये जा रहे हैं, जहां मानव व्यापार की घटनाएं लगातार हो रही हैं. ऐसे गांवों में दलाल टाइप लोग बेहतर जीवन का झांसा देकर लड़कियों को ठग लेते हैं. इस काम में एनजीओ की भी मदद ली जा रही है.
Q. मानव तस्करी को रोकने के लिए क्या किया जा रहा है?
ANS- मुख्यालय स्तर पर भी इसकी सीधे ऑनलाइन मॉनिटरिंग की व्यवस्था बहाल कर दी गयी है. समाज को भी सजग रहना होगा और अपनी सोच में बदलाव लाना होगा.
“इनपुट: सविता और मनोज कुमार“
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लेखक के बारे में
By Karuna Tiwari
करुणा तिवारी पत्रकारिता में अपने करियर की शुरुआत Doordarshan Bihar के साथ की. 8 वर्षों तक टीवी और डिजिटल माध्यम में सक्रिय रहने के बाद, वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल, बिहार टीम के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. उन्हें बिहार की राजनीति, ग्राउंड रिपोर्टिंग और सामाजिक मुद्दों में विशेष रुचि है. अपने काम के प्रति समर्पित करुणा हर दिन कुछ नया सीखने और बेहतर करने की कोशिश करती हैं.
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