छात्र नदारद, सुविधाओं का भी है अभाव

Published at :21 Jul 2017 12:34 PM (IST)
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छात्र नदारद, सुविधाओं का भी है अभाव

सरकार के आदेशों की उड़ रहीं धज्जियां विद्यालय में बनी रहती है जलजमाव की स्थिति छात्रों व शिक्षकों को आने जाने में काफी कठिनाई होती है जगदीशपुर : सरकार द्वारा शिक्षा में सुधार करने के लिए रोज-रोज घोषणाएं की जाती है और वाहवाही लूटने का प्रयास किया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई सुधार नहीं […]

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सरकार के आदेशों की उड़ रहीं धज्जियां
विद्यालय में बनी रहती है जलजमाव की स्थिति
छात्रों व शिक्षकों को आने जाने में काफी कठिनाई होती है
जगदीशपुर : सरकार द्वारा शिक्षा में सुधार करने के लिए रोज-रोज घोषणाएं की जाती है और वाहवाही लूटने का प्रयास किया जाता है, लेकिन धरातल पर कोई सुधार नहीं हो रहा है. स्थितियां अभी भी बदतर बनी हुई है.
इससे छात्रों के भविष्य पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है. सरकार के दावों की पोल सरकारी विद्यालयों में खुल जाती है. लगभग सभी विद्यालयों में संसाधनों का काफी अभाव है. प्रखंड क्षेत्र के नारायणपुर उत्क्रमित मध्य विद्यालय में प्रभात खबर की टीम जब शिक्षा से छल योजना के तहत ऑन द स्पॉट जानकारी लेने पहुंची तो विद्यालय में कई चौंकाने वाली बातें सामने आयी, जिस विद्यालय में छात्रों की संख्या काफी है पर मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है. बेंच की कमी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. वहीं शौचालय में गंदगी का साम्राज्य है इस कारण छात्र- छात्राओं को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. मजबूरी में छात्र-छात्राओं को शौचालय के लिए बाहर करना पड़ता है. वहीं विद्यालय परिसर में कीचड़ का अद्भूत नजारा देखने को मिल रहा है.
कीचड़ से दुर्गंध निकलता है. इससे छात्रों को वर्ग में पढ़ाई करने में काफी परेशानी होती है. इतना ही नहीं विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम यह है कि पढ़ाई के समय बच्चे विद्यालय कैंपस में खेलते रहते हैं. वहीं शिक्षक अनावश्यक बैठ कर बातें करते रहते हैं. बच्चों के शिक्षा के अधिकार का यहां हनन हो रहा है. सरकार ने प्राथमिक शिक्षा को अनिवार्य बनाया है, पर विद्यालय के हालात से पता चलता है कि सरकार के इस सोच की धज्जी उड़ायी जा रही है. वहीं अभी तक छात्रों को पुस्तकें नहीं दी गयी है. पुस्तकों के अभाव में पढ़ाई की प्रगति के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है. विद्यालय में जलजमाव की स्थिति बनी रहती है. छात्रों व शिक्षकों को आने जाने में काफी कठिनाई होती है. वहीं विद्यालय में छात्रों की उपस्थिति काफी कम रहती है.
जबकि सरकार छात्रों की शत-प्रतिशत उपस्थिति के लिए काफी प्रयास करती है. फिर भी हालात में कोई परिवर्तन होते नहीं दिख रहा है. हालांकि मध्याह्न भोजन सभी छात्रों का बनाया जाता है. वहीं बेंच के अभाव में बच्चे जमीन पर बैठ कर पढ़ने को मजबूर है.
एक ही कमरे में पढ़ते हैं वर्ग एक से चार तक के छात्र: विद्यालय में पढ़ाई की स्थिति ऐसी है कि एक ही कमरे में वर्ग एक से चार तक के छात्र पढ़ाई करते हैं. एक ही कमरे में इतने वर्ग के छात्र कैसे पढ़ते होंगे. इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन द्वारा इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. वहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी भी इस पर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं. इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है और उनकी पढ़ाई बाधित हो रही है.
अभी तक नहीं मिली है पुस्तक: वर्तमान सत्र के तीन माह बीत चुके हैं, पर सरकार द्वारा छात्रों को पढ़ाई के लिए पुस्तकें उपलब्ध नहीं करायी गयी है. इस कारण छात्रों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी हो रही है. छात्रों को शिक्षकों द्वारा मौखिक ही पढ़ाई की जा रही है. इससे छात्रों को गुरुकुल की याद आ रही है. जबकि सरकार शिक्षा में विकास के दावे करती है, पर प्रशासनिक लापरवाही के कारण पुस्तकें अभी तक नहीं उपलब्ध करायी गयी है
शौचालय भी गंदा
विद्यालय में शौचालय का निर्माण कराया गया है. पर साफ-सफाई की व्यवस्था दयनीय है. इस कारण शौचालय में काफी गंदगी फैली हुई है. जबकि केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ भारत मिशन के तहत कार्यक्रम चलाया जा रहा है. विद्यालय में इस योजना के धज्जी उड़ायी जा रही है. शिक्षा के संस्थान में जब गंदगी का अंबार रहेगा तो अन्य जगहों पर स्थिति क्या होगी. शौचालय का निर्माण का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है. इसके निर्माण पर खर्च की गयी राशि का कोई अर्थ नहीं रह गया है.
जमीन पर बैठते हैं छात्र
विद्यालय में बेंच की काफी कमी है. इस कारण छात्रों को जमीन पर बैठ कर पढ़ाई करनी पड़ती है, जबकि सरकार वर्षों से विद्यालयों में संसाधन को पूरा करने का प्रयास कर रही है. इस पर करोड़ों रुपये खर्च किये जाते हैं, फिर भी विद्यालय में संसाधनों का काफी अभाव है. जमीन पर बैठ कर पढ़ते छात्र गुरुकुल की याद ताजा करते हैं. वहीं जमीन पर बैठ कर पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते हैं. इस ओर प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है ऐसे में बच्चों की पढ़ाई कैसे होगी. बारिश के दिनों में फर्श पर बैठने को बच्चों को परेशानी होती है. लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है.543 छात्रों पर नौ शिक्षक
उत्क्रमित मध्य विद्यालय नारायणपुर में शिक्षकों की संख्या छात्रों की संख्या के अनुपात में काफी कम है. 543 छात्र पर महज नौ शिक्षक ही कार्यरत हैं. इसके अनुसार विद्यालय में 60 छात्रों पर एक शिक्षक हैं. सरकार द्वारा निर्धारित मानदंड 40 छात्र पर एक शिक्षक का है. शिक्षकों की कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है. छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो रहा है.
आधे से भी कम छात्र थे उपस्थित
विद्यालय में जब प्रभात खबर की टीम पहुंची तो विद्यालय में छात्रों की उपस्थित 50 प्रतिशत से भी कम थी. मध्याह्न भोजन पूरे छात्रों के लिए बनाने का दावा किया जा रहा था. इससे मध्याह्न भोजन में गड़बड़ी का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है.
छह शिक्षक-शिक्षिकाएं ही थे उपस्थित
विद्यालय में 6 शिक्षक- शिक्षिकाएं ही उपस्थित थे. जबकि विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई की जाती है. एक शिक्षिका विशेष अवकाश पर थी तो दूसरी शिक्षिका भी अवकाश पर ही थी.
बोले प्रधानाध्यापक
5 जुलाई को पदभार ग्रहण किया हूं. गंदगी से मुझे सख्त एलर्जी है.विद्यालय का सफाई कार्य के अलावे हर त्रुटियों को दूर करना मेरा मक्सद है. छात्रों की पढ़ाई सुचारू ढंग से हो इसके लिए हर संभव प्रयास करूंगा.
मुशर्रफ आलम, प्रधानाध्यापक
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