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बिहार के इस जिले में फैल रही लेमन ग्रास की खेती, किसानों को हो रही है लाखों की आमदानी

Updated at : 25 Aug 2020 9:01 AM (IST)
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बिहार के इस जिले में फैल रही लेमन ग्रास की खेती, किसानों को हो रही है लाखों की आमदानी

बांका : बिना खाद, पानी और जानवर से नीडर होकर एक फसल किसानों के लिए लाखों की आमदानी का सूत्रधार बनता जा रहा है. जी हां, बात हो रही है लेमन ग्रास की. विगत जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी झारखंड की महिला किसान जो लेमन ग्रास की खेती कर रही थी, तारीफ की थी. बात लेमन ग्रास की खेती की करें तो केवल झारखंड ही नहीं बांका में भी यह खेती बड़े पैमाने पर शुरु हो गयी है. डीएम सुहर्ष भगत ने विशेष रुप से बंजर भूमि चयन कर उसमें लेमन ग्रास से हरियाली का एक मिशन छेड़ा है.

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बांका : बिना खाद, पानी और जानवर से नीडर होकर एक फसल किसानों के लिए लाखों की आमदानी का सूत्रधार बनता जा रहा है. जी हां, बात हो रही है लेमन ग्रास की. विगत जुलाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी झारखंड की महिला किसान जो लेमन ग्रास की खेती कर रही थी, तारीफ की थी. बात लेमन ग्रास की खेती की करें तो केवल झारखंड ही नहीं बांका में भी यह खेती बड़े पैमाने पर शुरु हो गयी है. डीएम सुहर्ष भगत ने विशेष रुप से बंजर भूमि चयन कर उसमें लेमन ग्रास से हरियाली का एक मिशन छेड़ा है. लिहाजा, यह मिशन अब एकड़-दर-एकड़ से निकलकर 700 एकड़ तक पहुंच गया है. बांका, कटोरिया, धोरैया, फुल्लीडुमर, रजौन सहित अन्य प्रखंडों में लेमन ग्रास की खेती से सैकड़ों किसान जुड़ चुके हैं.

प्रति एकड़ किसान को मिलता है 8000 रुपये का अनुदान

युवा किसान अभिषेक चौधरी की एक टीम भी विशेष रुप से लेमन ग्रास की मुहिम में जुटा हुआ है. लेमन ग्रास की खेती से प्रभावित होकर किसान सह फुल्लीडुमर निवासी परिमल सिंह ने भी 25 एकड़ में लेमन ग्रास की खेती शुरु की है. इसके अलावा रजौन के रवि सिंह, धोरैया के सलीम, कमलेश्वरी चौधरी सहित कई ऐसे किसान हैं, जो इसे प्रमुखता से कई एकड़ में कर रहे हैं. जानकारी के मुताबिक लेमन ग्रास की खेती को केन्द्र सरकार भी महत्व दे रही है. यहां तक की सरकारी स्तर पर प्रति एकड़ किसान को 8000 रुपये का अनुदान तक दिया जा रहा है. आज तेजी से बंजर व कई वर्षों से खेती से वंचित क्षेत्र में लेमन ग्रास ने हरियाली ला दी है.

सिंचाई की भी आवश्यकता नहीं

लेमन ग्रास की खेती में सिंचाई व खाद की झंझट नहीं होती है. यह पानी के अभाव वाले इलाके में भी आसानी से विकसित हो सकता है. इसमें खाद की भी जरुरत नहीं पड़ती है. इससे भी अधिक लाभदायक यह है कि जानवर से क्षति होने का डर नहीं होता है. बताया जाता है कि इस फसल में जानवर अटैक नहीं करता है. इसके अलावा एक दफा फसल लगाने के बाद पांच बार कटाई की जा सकती है.

तेजी से लगेंगे तेल निकासी यूनिट

मौजूदा समय में समुखिया मोड़ के निकट राजपुर व कटोरिया में लेमन ग्रास तेल निकासी यूनिट की स्थापना की गयी है. बताया जाता है कि मशीन की कीमत चार लाख के करीब है. सरकार कलस्टर पर 90 फीसदी अनुदान भी दे सकती है. अलबत्ता, यहां 50 से अधिक तेल निकासी यूनिट की भी स्थापना होगी. यद्यपि, राजपुर व अन्य स्थानों पर लेमन ग्रास की कटाई के बाद तेल की तैयारी भी शुरु कर दी गयी है. जानकारी के मुताबिक एक लीटर तेल की कीमत एक हजार रुपया होता है. लिहाजा, इसमें लाखों की कमाई से इंकार नहीं किया जा सकता है.

एक एकड़ में उपजे घास से 100 लीटर तेल

अभिषेक उर्फ सोनू चौधरी कहते हैं कि लेमन ग्रास की खेती यदि एक एकड़ में करते हैं तो 100 लीटर तेल लायक घास प्राप्त हो जायेगा. लेमन ग्रास की खेती काफी लाभदायक है. विभाग भी सहायता दे रही है. इसीलिए जिन किसानों के पास बेकार व बंजर भूमि हैं, वे लेमन ग्रास की खेती कर जमीन के साथ आय में भी हरियाली ला सकते हैं.

posted by ashish jha

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यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

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