ePaper

मवेशियों को होने लगी चारा की कमी, शहर की सड़कों पर भटकने को विवश हैं पशुपालक

Updated at : 17 Aug 2024 9:06 PM (IST)
विज्ञापन
मवेशियों को होने लगी चारा की कमी, शहर की सड़कों पर भटकने को विवश हैं पशुपालक

बाढ़ पीड़ित पशुपालकों को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है. दियारा में हरा चारा डूबने से यह हालात हुआ है. वहीं, चारा का भाव बढ़ने लगा है. इतना ही नहीं चारा ढूढने के लिए शहर की सड़कों पर मवेशी भटक रहे हैं.

विज्ञापन

बाढ़ पीड़ित पशुपालकों को पर्याप्त चारा नहीं मिल पा रहा है. दियारा में हरा चारा डूबने से यह हालात हुआ है. वहीं, चारा का भाव बढ़ने लगा है. इतना ही नहीं चारा ढूढने के लिए शहर की सड़कों पर मवेशी भटक रहे हैं. इससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. चौक-चौराहे पर जाम भी लग रहा है. यह समस्या सराय, नया बाजार, बूढ़ानाथ चौक, दीपनगर चौक, माणिक सरकार चौक, आदमपुर, आकाशवाणी चौक पर दिखाई देती है. दियारा में बाढ़ आने के बाद सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा बढ़ गया है. सबसे अधिक समस्या मुख्य रोड व कचहरी चौक के पास है. आये दिन वाहन चालक दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं.

पशु चारा का स्टॉक हो रहा है खत्म, बढ़ने लगी कीमत

पशु आहार कारोबारी की मानें तो भूसा व पुआल की कुट्टी का स्टॉक खत्म हो रहा है. मांग बढ़ने और आपूर्ति घटने के कारण पशु आहार का दाम बढ़ रहा है. गुड़हट्टा चौक के गौ पालक लाल बहादुर ने बताया कि पहले 500 रुपये क्विंटल पुआल मिलता था, जो अभी 600 रुपये में भी आसानी से नहीं मिल पा रहा है. बाढ़ पीड़ित पशुपालक घनश्याम मंडल ने बताया कि जो भूसा पहले 600-700 रुपये क्विंटल खरीदते थे, वह अभी 800 से 1000 प्रति क्विंटल तक मिल रहा है. पुआल कुट्टी, चोकर, दाना और खल्ली के भाव भी बढ़ गये हैं. दूसरे बाढ़ पीड़ित पशु पालक देवघर यादव ने बताया कि अभी तो पशुओं को भूसा या कुट्टी ही नसीब हो जाये, यही काफी है. पशुओं को ठीक से चारा नहीं मिलने के कारण अधिकांश पशु बीमार हो रहे हैं. परशुराम पासवान ने बताया कि चारा की कमी को पूरा करने के लिए सरकारी स्तर पर चारा बांटा जा रहा है, लेकिन वह पर्याप्त नहीं है. इससे कई स्थानों पर चारा के लिए मारामारी की स्थिति बनी.

मवेशी का चारा खरीद रहे, पानी खरीदना संभव नहीं

शरण स्थली के लोग पीने व अन्य काम के लिए पानी जहां-तहां से जुटा रहे हैं, लेकिन मवेशी को पानी का अभाव हो रहा है. चिलचिलाती धूप में भैंस, गाय व बकरी को अधिक प्यास लगती है. यहां चापाकल तो है, लेकिन पानी नहीं आ रहा है. मवेशी के लिए भूसा की कोई व्यवस्था नहीं है. भूसा बाजार से खरीदकर ला रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन