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दिव्यांगों में आर्टिफिशियल अंग से संबंधित जागरूकता की कमी

Updated at : 05 Nov 2024 9:20 PM (IST)
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दिव्यांगों में आर्टिफिशियल अंग से संबंधित जागरूकता की कमी

दिव्यांगों में आर्टिफिशियल अंग से संबंधित जागरूकता की कमी

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वरीय संवाददाता, भागलपुर सड़क व रेल यात्रा के दौरान लोग आये दिन दुर्घटना के शिकार रहे हैं. कई बार लोग एक्सीडेंट के कारण लोग स्थायी दिव्यांगता का शिकार हो जाते हैं. पैर व हाथ कटने से लोगों का जीवन कष्टप्रद हो गया है. ऐसी स्थिति में दिव्यांगों के लिए आर्टिफिशियल अंग बनाने, इसे शरीर में लगाने से संबंधित चिकित्सा विज्ञान को प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स कहा जाता है. इससे संंबंधित जागरूकता को लेकर पटना में प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स चिकित्सकों के लिए सेमिनार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में शरीक हुए प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स दिवस विशेषज्ञ व आरबीएसके के नोडल पदाधिकारी डॉ अनमोल आनंद ने बताया कि कार्यक्रम में दिव्यांगों को फिर से मुख्यधारा में जोड़ने को लेकर चर्चा हुई. डॉ अनमोल ने बताया कि जेएलएनएमसीएच समेत बिहार के किसी भी मेडिकल काॅलेज में इसका अलग से विभाग नहीं है. सरकारी स्तर पर सीआरसी पटना में दिव्यांगों के लिए आर्टिफिशियल अंग को तैयार किया जाता है. सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों में दिव्यांगता को लेकर एसएसए कार्यालय खिरनीघाट में कृत्रिम अंग बनाये जाते हैं. वहीं मायागंज अस्पताल के ओपीडी में छोटे बच्चों में पैर का टेढ़ापन यानी क्लबफुट से पीड़ित बच्चों को जूतों का वितरण किया जाता है. प्रोस्थेटिक्स एंड ऑर्थोटिक्स को लेकर लोगों में जागरूकता फैलाने की जरूरत है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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