गांव में शौचालय नहीं और मुखिया को मिल गया प्रशस्ति-पत्र

Updated at : 02 Jul 2018 5:46 AM (IST)
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गांव में शौचालय नहीं और मुखिया को मिल गया प्रशस्ति-पत्र

अकबरनगर : नमामि गंगे के तहत अकबरनगर पंचायत के वार्ड संख्या एक से आठ तक शौचालय बना नहीं. जो कुछ बना, वह अधूरा पड़ा है. पंचायत में बसे लोग रेलवे लाइन के किनारे और खेतों में शौच के लिए जाते हैं और दूसरी ओर पंचायत को ओडीएफ घोषित कर मुखिया को प्रशासन ने प्रशस्ति-पत्र से […]

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अकबरनगर : नमामि गंगे के तहत अकबरनगर पंचायत के वार्ड संख्या एक से आठ तक शौचालय बना नहीं. जो कुछ बना, वह अधूरा पड़ा है. पंचायत में बसे लोग रेलवे लाइन के किनारे और खेतों में शौच के लिए जाते हैं और दूसरी ओर पंचायत को ओडीएफ घोषित कर मुखिया को प्रशासन ने प्रशस्ति-पत्र से नवाज दिया गया.
पंचायत के वार्ड संख्या पांच के गंगापुर गांव में किसी भी घर में शौचालय नहीं है. यहां के लोगों को शौच के लिए रेलवे की पटरियों के किनारे ठिकाना ढूंढना पड़ता है. गांव की लाभुक उषा देवी, आशा देवी, सरिता देवी, माला देवी, रेशमा देवी, बॉबी देवी, निशा देवी, जवाहर यादव, अनिल यादव, केदार यादव सहित दर्जनों लोगों ने बताया कि शौचालय निर्माण के लिए कई बार मुखिया से आग्रह किया गया. मुखिया ने आश्वस्त किया था कि जल्द ही शौचालय का निर्माण करा दिया जायेगा.
मालूम हो कि इस वार्ड में करीब 400 परिवार गुजर-बसर करते हैं. यहां के अधिकांश लोग खेतीबाड़ी पर निर्भर हैं. किसी के घर में शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया है. सरकारी आंकड़ा कहता है कि पूरा गांव ओडीएफ है.
मुखिया का गांव भी शौचालय विहीन
अकबरनगर पंचायत के मुखिया उषा देवी का गंगापुर गांव भी शौचालय विहीन है. वर्ष 2005, 2011 में अकबरनगर पंचायत को पीएचइडी विभाग के द्वारा शौचालय निर्माण की जिम्मेदारी दी गयी थी. इस दौरान पीएचइडी विभाग ने करीब 500 से अधिक शौचालय निर्माण की योजना बनायी.
शौच जाते चार लोग गंवा चुके हैं जान
बहियार में जाने के दौरान अब तक दो बच्चे की मौत सर्पदंश से हो चुकी है. गंगापुर के रामबालक यादव बताते हैं कि शौचालय के अभाव में रेल पटरी पर जाना पड़ता है. दो साल पूर्व शौच करने के दौरान शांति देवी व मनकी देवी की ट्रेन से कट कर जान चली गयी. इस वर्ष मुखिया चुनाव के पहले मोतिचक गांव में एक लड़की की शौच जाने के दौरान दुष्कर्म कर गला रेत कर हत्या कर दी गयी थी.
कहती हैं मुखिया, सैकड़ों शौचालय अधूरा
वर्ष 2016 के तत्कालीन बीडीओ ने सभी वार्ड से ओडीएफ प्रपत्र पर हस्ताक्षर करा गांव को ओडीएफ घोषित कर दिया. बताया था कि ओडीएफ घोषित होने के बाद तुरंत भुगतान हो जायेगा. लेकिन अब तक 30 प्रतिशत लोगों को भी भुगतान नहीं किया गया. सैकड़ों शौचालय अधूरा पड़ा हुआ है. यहां के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं. शौचालय बनाने में असक्षम हैं. समय पर भुगतान कर दिया जाये, तो शत-प्रतिशत लोग शौचालय बना लेंगे.
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