आठ वर्षों का स्वच्छता शुल्क एकमुश्त वसूली के खिलाफ आवाज, ईओ को सौंपा ज्ञापन

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आठ वर्षों का स्वच्छता शुल्क एकमुश्त वसूली के खिलाफ आवाज, ईओ को सौंपा ज्ञापन

कार्यपालक पदाधिकारी को ज्ञापन सौंपते समाजसेवी बिनोद यादव

Sultanaganj Swachhta Shulk: ज्ञापन में कहा गया है कि एक साथ आठ वर्षों का स्वच्छता शुल्क वसूलने से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. ऐसे में नगर परिषद को इस निर्णय को वापस लेने अथवा इसमें संशोधन कर करदाताओं के हितों के अनुरूप व्यावहारिक व्यवस्था लागू करनी चाहिए.

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सुलतानगंज (भागलपुर) से शुभंकर की रिपोर्ट:

Sultanaganj Swachhta Shulk: नगर परिषद सुलतानगंज द्वारा आम होल्डिंग करदाताओं से एकमुश्त आठ वर्षों का स्वच्छता शुल्क वसूलने के प्रस्तावित निर्णय का विरोध शुरू हो गया है. इस मुद्दे को लेकर गुरुवार को श्यामबाग निवासी समाजसेवी एवं होल्डिंग टैक्सदाता बिनोद यादव ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) को ज्ञापन सौंपकर निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की.

ज्ञापन में कहा गया है कि एक साथ आठ वर्षों का स्वच्छता शुल्क वसूलने से आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. ऐसे में नगर परिषद को इस निर्णय को वापस लेने अथवा इसमें संशोधन कर करदाताओं के हितों के अनुरूप व्यावहारिक व्यवस्था लागू करनी चाहिए.

करदाताओं की क्षमता के अनुरूप बने व्यवस्था

बिनोद यादव ने कार्यपालक पदाधिकारी से आग्रह करते हुए कहा कि स्वच्छता शुल्क की वसूली ऐसी प्रणाली के तहत की जानी चाहिए, जिससे आम लोगों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े. उन्होंने कहा कि करदाताओं की भुगतान क्षमता को ध्यान में रखते हुए किस्तों या अन्य व्यवहारिक विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए.

जनहित में पुनर्मूल्यांकन की मांग

ज्ञापन में नगर परिषद से इस निर्णय का पुनर्मूल्यांकन करने और जनहित में उचित कदम उठाने की मांग की गई है. उनका कहना है कि नगर परिषद को किसी भी शुल्क निर्धारण या वसूली प्रक्रिया में आम नागरिकों की आर्थिक स्थिति और हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए.

नगर परिषद की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल नगर परिषद प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. हालांकि ज्ञापन दिए जाने के बाद अब करदाताओं की नजर नगर परिषद के अगले कदम पर टिकी हुई है.

स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि एकमुश्त आठ वर्षों का शुल्क वसूला जाता है तो कई परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है. ऐसे में प्रशासन को इस विषय पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

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Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।

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