बेगूसराय में CM सम्राट चौधरी के सख्त बयान के बाद भी सरकारी जमीन पर दबंगों का कब्जा, नहीं हो रही प्रशासनिक कार्रवाई

अतिक्रमण किया गया जमीन
Begusarai News:बेगूसराय जिले के चेरियाबरियारपुर प्रखंड के पबरा पंचायत में पंचायत सरकार भवन निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्यशैली और सरकार के दावों पर सवाल खड़ा हो गया है. बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने में एक कहा मेरे घर की सीढ़ी भी सरकारी जमीन पर होगी तो उसे भी तोड़ दिया जाएगा . लेकिन पबरा पंचायत की स्थिति इस दावे से मेल खाते नजर नहीं आ रही है. उक्त जमीन पर वर्षो से पंचायत के कुछ प्रभावशाली लोगों एवं वर्तमान मुखिया का अवैध कब्जा बना हुआ है.
Begusarai News: (इफ्तेखार आलम ) बेगूसराय जिले के चेरियाबरियारपुर प्रखंड के पबरा पंचायत में पंचायत सरकार भवन निर्माण को लेकर विवाद उठ रहा है. प्रशासनिक कार्यशैली और सरकार के दावों पर सवाल खड़ा करने लगा है. यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से स्पष्ट कहा था.
अगर मेरे घर की सीढ़ी भी सरकारी जमीन पर होगी तो उसे भी तोड़ दिया जाएगा . मुख्यमंत्री सम्राट के इस सख्त बयान को अतिक्रमण के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के रूप में देखा गया है. लेकिन पबरा पंचायत की स्थिति इस दावे से मेल खाते नजर नहीं आ रही है.
दस्तावेजों के अनुसार
प्राप्त जानकारी और उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, मौजा पबरा,थाना संख्या-193, खाता संख्या-288, खेसरा संख्या-647 में लगभग 15 कट्ठा 7 धूर गैर मजरुआ आम भूमि सरकारी अभिलेख में दर्ज है. आरोप है कि उक्त जमीन पर वर्षो से पंचायत के कुछ प्रभावशाली लोगों एवं वर्तमान मुखिया का अवैध कब्जा बना हुआ है.
प्रशासनिक कार्रवाई और नोटिस के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण
हैरानी की बात यह है कि इस अतिक्रमण को लेकर पूर्व में प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू की गई थी. बताया जाता है कि 23 जनवरी 2015 को तत्कालीन अंचलाधिकारी द्वारा ज्ञापांक 122 के तहत अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर 31 जनवरी तक जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था. इसके बाद 23 फरवरी 2015 को पत्रांक 280 के माध्यम से अनुमंडल पदाधिकारी मंझौल से भी अतिक्रमण हटाने के लिए सूचित किया गया था.
उस समय जलमीनार निर्माण के लिए करीब 3 कट्ठा भूमि चिन्हित की गई थी. बावजूद इसके न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई की गई है. इसके बाद में जलमीनार का निर्माण किसी अन्य स्थान पर कर दिया गया. जबकि मूल जमीन पर कब्जा यथावत बना हुआ है. अब करीब एक दशक बाद पंचायत सरकार भवन निर्माण की योजना सामने आई है.
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन द्वारा पहले से उपलब्ध सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया जा रहा
सूत्रों के अनुसार, इस बार मौजा पबरा, खाता संख्या-287, खेसरा संख्या-850 में जमीन चिन्हित की जा रही है. जो बूढ़ी गंडक नदी से महज 30 से 40 मीटर की दूरी पर स्थित है. स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह क्षेत्र बाढ़ और नदी कटाव की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है.
ऐसे में यहां स्थायी भवन निर्माण करना भविष्य में जोखिम भरा साबित हो सकता है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा पहले से उपलब्ध सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के बजाय नए और संवेदनशील स्थल का चयन किया जा रहा है, जो समझ से परे है.
सरकारी अभिलेखों में दर्ज जमीन को भी कब्जामुक्त नहीं कराया गया
लोगों का कहना है कि यदि प्रशासन चाहे तो सरकारी अभिलेखों में दर्ज जमीन को कब्जामुक्त कराकर उसी स्थान पर पंचायत सरकार भवन सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जा सकता है.इस पूरे मामले को लेकर अब स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं.
एक ओर मुख्यमंत्री द्वारा अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही जा रही है. वहीं दूसरी ओर पबरा पंचायत में वर्षों से चले आ रहे अवैध कब्जे पर कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से क्या मांग की है?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए और उसी भूमि पर पंचायत सरकार भवन का निर्माण सुनिश्चित किया जाए.
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या मुख्यमंत्री के सख्त संदेश का असर जमीनी स्तर पर दिखेगा या फिर यह मामला भी पूर्व की तरह फाइलों तक सीमित रह जाएगा.
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