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बेगूसराय : एक साल की उम्र में पास की मैट्रिक परीक्षा!

Updated at : 10 Sep 2018 8:49 AM (IST)
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बेगूसराय : एक साल की उम्र में पास की मैट्रिक परीक्षा!

अजीत कुमार बेगूसराय : एपीएस हाईस्कूल नावकोठी के छात्र नीतीश कुमार ने महज एक साल की उम्र में ही मैट्रिक परीक्षा पास की है. बात थोड़ी-सी अटपटी है, लेकिन यह सत्य है. दरअसल बिहार बोर्ड से निर्गत छात्र की मार्कशीट में अंकित जन्मतिथि इसकी पुष्टि कर रही है. बिहार बोर्ड के इस कारनामे से छात्र […]

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अजीत कुमार
बेगूसराय : एपीएस हाईस्कूल नावकोठी के छात्र नीतीश कुमार ने महज एक साल की उम्र में ही मैट्रिक परीक्षा पास की है. बात थोड़ी-सी अटपटी है, लेकिन यह सत्य है.
दरअसल बिहार बोर्ड से निर्गत छात्र की मार्कशीट में अंकित जन्मतिथि इसकी पुष्टि कर रही है. बिहार बोर्ड के इस कारनामे से छात्र के भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है. मार्कशीट में इस त्रुटि के कारण वह दो वर्षों से इंटरमीडिएट में नामांकन से वंचित हो रहा है. कोई भी कॉलेज इंटरमीडिएट में उसका नामांकन नहीं ले रहा है. वह न्याय की आस में दर-दर की ठोकरें खाने को विवश है, लेकिन कोई सुधि लेने वाला नहीं है. सदर प्रखंड क्षेत्र के नीमा निवासी नवल पोद्दार के पुत्र नीतीश कुमार ने वर्ष 2017 में मैट्रिक परीक्षा दी थी.
उसका रोल नंबर- 1710355 और कोड नंबर 26079 है, जबकि पंजीयन संख्या 26079-31491-15 अंकित है. रिजल्ट आने पर उसने सेकेंड डिवीजन से परीक्षा पास की. सेकेंड डिवीजन होने पर खुशियां मनायीं, लेकिन छात्र ने जब मार्कशीट प्राप्त कर उसमें जन्मतिथि 1 अप्रैल, 2016 अंकित देखी तो उसका सिर चकरा गया. परेशान होकर छात्र ने विद्यालय पहुंचकर हेडमास्टर से गुहार लगायी.
हेडमास्टर ने बिहार बोर्ड का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया. छात्र नीतीश ने बताया कि जन्मतिथि में त्रुटि रहने के कारण कॉलेजों में इंटरमीडिएट में नामांकन के लिए दिये गये आवेदन नामंजूर हो जा रहे हैं. उसने बताया कि वास्तविक जन्मतिथि चार अप्रैल, 2001 है, लेकिन बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने मार्कशीट में 1 अप्रैल, 2016 दर्ज कर सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
बिहार बोर्ड की कारगुजारी उजागर
छात्र को नहीं मिल पा रहा इंटर में एडमिशन
कंपार्टमेंटल परीक्षा में हुआ था उत्तीर्ण
नीतीश कुमार ने 2017 में बिहार बोर्ड की वार्षिक परीक्षा दी थी. सभी विषयों में अच्छे अंक प्राप्त हुए थे, लेकिन गणित में क्राॅस मार्क्स आने पर वह फेल हो गया. इसके बाद उसने कंपार्टमेंटल परीक्षा दी. इसमें उसे सेकेंड डिवीजन उत्तीर्ण घोषित किया गया. बिहार बोर्ड की लापरवाही सिर्फ मार्कशीट ही नहीं, बल्कि पंजीयन में देखने को मिली है. पंजीयन में भी जन्मतिथि गलत अंकित है.
डीईओ से बोर्ड तक लगायी गुहार
पीड़ित छात्र के चाचा वीरेश कुमार कहते हैं कि जन्मतिथि ठीक कराने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी के दफ्तर से लेकर बिहार बोर्ड ऑफिस में भी गुहार लगायी, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. ऐसी स्थिति रही तो अदालत की शरण लेने को मजबूर होना पड़ेगा. पीड़ित छात्र के पिता नवल पोद्दार हाथ से दिव्यांग है. नावकोठी बाजार में पान की छोटी दुकान चलाते हैं और इसकी आमदनी से पूरे परिवार का भरण-पोषण करते हैं. मुफलिसी के बीच बच्चों की पढ़ाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते हैं. पुत्र नीतीश के मार्कशीट में जन्मतिथि की त्रुटि रहने से वह भी काफी चिंतित है.
स्कूल के माध्यम से भेजें आवेदन : डीईओ
बेगूसराय के जिला शिक्षा पदाधिकारी श्याम बाबू राम ने कहा कि जिन छात्रों की उम्र में गड़बड़ी हुई है, वे संबंधित स्कूल में आवेदन दें. ऐसी गड़बड़ी को जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय के माध्यम से ठीक कराया जायेगा, ताकि किसी भी छात्र को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े.
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