बांका में दाल-तेल से लेकर चावल तक महंगा, आखिर क्यों बढ़ रही हैं रोजमर्रा की चीजों की कीमतें?
Published by : Pratyush Prashant Updated At : 02 Jun 2026 7:06 AM
सांकेतिक तस्वीर
Banka Mandi: रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ सकता है. बांका मंडी से आई ताजा रिपोर्ट बता रही है कि खाद्यान्न, दाल और खाद्य तेल के दाम लगातार चढ़ रहे हैं. सवाल यह है कि आखिर महंगाई की यह मार कब थमेगी?
बांका से मदन कुमार की रिपोर्ट.
Banka Mandi: बिहार के बांका जिले की मंडी में इन दिनों महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है. खाद्यान्न, दाल, तेल और मसालों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. आटा, चना और अरहर दाल के बढ़े भाव ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है. हालांकि आलू और प्याज की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं, लेकिन अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम लगातार ऊपर जा रहे हैं.
विक्रमशिला सेतु संकट और बढ़ी ढुलाई लागत
व्यापारियों का कहना है कि महंगाई के पीछे केवल बाजार की मांग नहीं, बल्कि परिवहन व्यवस्था भी बड़ी वजह बन गई है. बांका की मंडी में खाद्यान्न और अन्य जिंस मुख्य रूप से पूर्णिया के गुलाबबाग और कोलकाता की मंडियों से पहुंचते हैं. भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद मालवाहक वाहनों को मुंगेर के कृष्ण सेतु होकर लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है.
इसके साथ ही डीजल और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों ने माल ढुलाई का खर्च बढ़ा दिया है. परिणामस्वरूप थोक बाजार से लेकर खुदरा दुकानों तक हर स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है.
मंडी में क्या है आज का ताजा भाव?
स्थानीय कारोबारियों के अनुसार गेहूं 2600 से 2650 रुपये प्रति क्विंटल और मक्का 2100 से 2150 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है. मंसूरी चावल का भाव 3250 से 3400 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि अरवा मोटा चावल 3100 से 3250 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. बासमती चावल की कीमत 12500 से 13500 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई है.
दालों में सबसे ज्यादा तेजी अरहर दाल में देखने को मिल रही है, जिसका भाव 11000 से 14500 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है. मसूर दाल 5550 से 6750 रुपये और मूंग दाल 9540 से 9600 रुपये प्रति क्विंटल बिक रही है. वहीं 15 लीटर सरसों तेल की कीमत 2070 से 2470 रुपये के बीच बनी हुई है.
किसानों और उपभोक्ताओं के लिए अहम सलाह
व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में बाजार के भाव तेजी से बदल रहे हैं. ऐसे में किसानों को फसल बेचने और उपभोक्ताओं को बड़ी खरीदारी करने से पहले मंडी के ताजा भाव की जानकारी जरूर लेनी चाहिए. सही समय पर लिया गया फैसला आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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