बांका के दो भाइयों मोहन-राकेश ने स्वरोजगार में बनायी ग्लोबल पहचान, 2000 लोगों को दे रहे रोजगार

Edited by AMIT KR SINHA
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मोहन व राकेश की जोड़ी.

Banka brothers startup success story : गरीबी, संघर्ष और कठिन हालात भी जिनका रास्ता नहीं रोक पाये, वे आज बिहार और झारखंड में स्वरोजगार के क्षेत्र में बड़ा नाम बन चुके हैं. बांका के दो सगे भाई मोहन यादव और राकेश यादव ने अपने हुनर से ऐसा ब्रांड खड़ा किया है जो अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुका है.

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कटोरिया (बांका) से दीपक चौधरी की रिपोर्ट

Banka brothers startup success story : बांका जिले के चांदन प्रखंड के पिंड़रा गांव से निकलकर मोहन यादव व राकेश यादव ने स्वरोजगार में ग्लोबल पहचान बनायी है. दोनों भाइयों ने बिहार और झारखंड में 32 से अधिक ब्रांच स्थापित कर दिये और 2000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध करा रहे हैं. वर्ष 2025 में हेयर कलरिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज कराया है.

संघर्ष भरा बचपन, मेहनत से मिली पहचान

दोनों भाइयों का जीवन आसान नहीं रहा. बचपन में ही पिता पैरू उर्फ परमेश्वर यादव का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी बहुत कम उम्र में उनके कंधों पर आ गयी. आर्थिक तंगी के कारण मोहन मजदूरी करने कोलकाता चले गये, जबकि राकेश अपने ननिहाल में पशुपालन और अन्य काम करने लगे. शिक्षा से दूर रहने के बावजूद दोनों ने हार नहीं मानी और जीवन को एक नयी दिशा देने का निर्णय लिया.

Banka brothers startup success story: हुनर से बदली जिंदगी की दिशा

करीब पांच वर्षों तक अलग-अलग जगहों पर काम करके दोनों भाइयों ने प्रसाधन का हुनर सीखा. अनुभव हासिल करने के बाद वर्ष 2013 में धनबाद से स्वरोजगार की शुरुआत की. यहीं से सफलता का सफर शुरू हुआ, जो आज कई राज्यों तक फैल चुका है.

बिहार-झारखंड में कई ब्रांच

आज स्थिति यह है कि दोनों भाइयों का यह स्वरोजगार की शाखा बिहार व झारखंड के कई शहरों तक फैल चुकाीहै. प्रत्येक ब्रांच में भारी निवेश के साथ आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं. इस नेटवर्क के जरिए 2000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जबकि 1000 से ज्यादा युवाओं को ट्रेनिंग देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है.

ग्लोबल पहचान और वर्ल्ड रिकॉर्ड

गिनिज वर्ड रिकॉर्ड प्रमाण पत्र

वर्ष 2025 में हेयर कलरिंग के क्षेत्र में अनोखा वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर मोहन और राकेश ने अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल की. उनके इस कारनामे को गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है. इसके बाद उनके ब्रांड की लोकप्रियता और भी बढ़ गई.

युवाओं के लिए प्रेरणा बने दोनों भाई

मोहन और राकेश यादव आज सिर्फ सफल व्यवसायी नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं. उनका मानना है कि सही दिशा और मेहनत से कोई भी व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है. दोनों भाई लगातार युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए हैं.

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