भैया दूज व चत्रिगुप्त पूजा आज

Published at :12 Nov 2015 6:55 PM (IST)
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भैया दूज व चत्रिगुप्त पूजा आज

भैया दूज व चित्रगुप्त पूजा आजबहन अपने भाइयों के लिए करेंगी लंबी आयु की कामना औरंगाबाद (नगर)जिले में दीपावली मनाने के बाद शुक्रवार को चित्रगुप्त पूजा व भैया दूज मनाये की तैयारी में जुटे रहे. इसको लेेकर गुरुवार को महिलाएं व कायस्थ परिवार के लोगों ने बाजार में पूजा-पाठ व अन्य सामग्रियों की खरीदारी की. […]

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भैया दूज व चित्रगुप्त पूजा आजबहन अपने भाइयों के लिए करेंगी लंबी आयु की कामना औरंगाबाद (नगर)जिले में दीपावली मनाने के बाद शुक्रवार को चित्रगुप्त पूजा व भैया दूज मनाये की तैयारी में जुटे रहे. इसको लेेकर गुरुवार को महिलाएं व कायस्थ परिवार के लोगों ने बाजार में पूजा-पाठ व अन्य सामग्रियों की खरीदारी की. यह प्रत्येक साल कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को ही मनायी जाती है. इस दिन महिलाएं गोधन कूट कर अपने भाईयों के लिए लंबी आयु की कामना करती हैं. कहते हैं कि कार्तिक माह की द्वितीया तिथि को यमराज ने अपनी बहन यमुना के घर भोजन किया था. तब यमुना ने यमराज को लंबी आयु का वरदान दिया था. इस कारण इस पर्व का नाम यम द्वितीया भी पड़ गया और इस दिन पूजा करने की परंपरा विख्यात हो गयी. इसी दिन कायस्थ जाति के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा करते हैं. इस पूजा के पीछे ऐसी मान्यता है कि भगवान चित्रगुप्त की पूजा करने से समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है और देव लोक को प्राप्त होता है. ब्रहृा के शरीर से उत्पन्न हुए थे चित्रगुप्त : चित्रगुप्त पूजा को लेकर ऐसी मान्यताएं हैं कि भगवान चित्रगुप्त का जन्म ब्रहृा के शरीर से हुआ था. कहा जाता है कि ब्रह ने एक बार एकाग्रचित होकर 10 हजार दस सौ वर्ष की समाधि लगायी थी. जब समाधि खत्म हुई तो उनके काया से बड़े-बड़े भुजाओं वाले, श्यामवर्ण, तेजस्वी, अतिबुद्धिमान, हाथ में कलम-दावात लिए एक पुरुष उत्पन्न हुआ. ब्रहृा ने अपने काया से उत्पन्न हुए उस पुरुष को कायस्थ की संज्ञा दी और कहा कि पृथ्वी पर चित्रगुप्त के नाम से विख्यात होंगे, जिनका काम यमलोक में स्थिर होकर पृथ्वी के समस्त प्राणियों के कर्मों का हिसाब रखना होगा. बाद में इसी चित्रगुप्त के श्रीवास्तव, अंबष्ठ, कर्ण, गौड़, माथुर, भटनागर, सेनक व अहिगण आदि पुत्र हुए. उनके वंशज आज कायस्थ जाति के नाम से विख्यात हैं. कहा जाता है कि चित्रगुप्त ने ही भीष्म पितामह की भक्ति से खुश होकर इच्छा मृत्यु का वरदान दिया था. भीष्म पितामह को ऐसा वरदान प्राप्त था कि जब तक वे मृत्यु का आह्नाव नहीं करेंगे, तब तक उनकी मृत्यु नहीं होगी. किं वदंतियों में भगवान चित्रगुप्त की कई कथाएं प्रचलित है. जिसमें कहा गया है कि चित्रगुप्त की भक्ति व पूजा से पाप रहित होकर स्वर्ग लोक तक की प्राप्ति होती है.

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