दीपावली के दूसरे दिन दीपदान का विशेष महत्व

Published at :09 Nov 2015 6:48 PM (IST)
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दीपावली के दूसरे  दिन दीपदान का विशेष महत्व

दीपावली के दूसरे दिन दीपदान का विशेष महत्व हसपुरा (औरंगाबाद)दीपावली के दूसरे दिन देवों के दीपदान का दिवस कहा जाता है. दीपदान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष चतुदर्शी को छोटी दीपावली कहते हैं. इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य पंडित लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि इसी तिथि को देवताओं के समीप दीपदान देव […]

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दीपावली के दूसरे दिन दीपदान का विशेष महत्व हसपुरा (औरंगाबाद)दीपावली के दूसरे दिन देवों के दीपदान का दिवस कहा जाता है. दीपदान कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष चतुदर्शी को छोटी दीपावली कहते हैं. इसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य पंडित लाल मोहन शास्त्री ने बताया कि इसी तिथि को देवताओं के समीप दीपदान देव मंदिर, देव वृक्ष, गोशाला आदि स्थानों पर करने का विशेष महत्व है. उन्होंने कहा कि इसी तिथि को आधी रात में माता अंजनी के गर्भ से श्रीराम भक्त हनुमान का जन्म हुआ था. लंका से विजय के बाद अयोध्या में आये भगवान श्रीराम के समक्ष सीता जी ने प्रसन्न होकर अपने गले की माला हनुमान जी के गले में डाल दी थी. यह माला बहुमूल्य रत्नों से विभूषित थी. किंतु राम नामांकित नहीं थी. हनुमान ने राम नामांकित वस्तु चाहते थे. हनुमान ने जब नहीं रखा तो सीता ने अपने ललाट का सिंदूर लगा कर अजर अमर होने का आशीर्वाद दिया. तब से हनुमान जी के सर्वाधिक पसंद लाल रंग रहता है. इसी तिथि को भगवान श्रीराम ने नरका सूर का वध किया था और उसके कारागार में 16 हजार बंदी को मुक्त कराया था.

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