जीतन राम मांझी भी नहीं लगा सके पुत्र की नइया पार

Published at :08 Nov 2015 7:00 PM (IST)
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जीतन राम मांझी भी नहीं लगा सके पुत्र की नइया पार

जीतन राम मांझी भी नहीं लगा सके पुत्र की नइया पारकांग्रेस के राजेश ने संतोष को हराया (कुटुंबा विधानसभा) औरंगाबाद (ग्रामीण)कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से वर्षों बाद हाथ को लोगों का साथ मिला है. पूर्व मंत्री दिलकेश्वर राम के पुत्र व कांग्रेस प्रत्याशी राजेश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन […]

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जीतन राम मांझी भी नहीं लगा सके पुत्र की नइया पारकांग्रेस के राजेश ने संतोष को हराया (कुटुंबा विधानसभा) औरंगाबाद (ग्रामीण)कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से वर्षों बाद हाथ को लोगों का साथ मिला है. पूर्व मंत्री दिलकेश्वर राम के पुत्र व कांग्रेस प्रत्याशी राजेश कुमार ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष कुमार सुमन को शिकस्त दी है. कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में पंजा को आम अवाम का भरपूर साथ मिला है. वैसे यहां का चुनाव चौकाने वाला है. चुनावी चर्चा कुछ और थी. चर्चा के अनुसार संतोष कुमार सुमन आगे चल रहे थे, लेकिन मतगणना के बाद सभी चुनावी चर्चा पर विराम लग गया. कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र के लोगों ने पूर्व मंत्री के पुत्र राजेश पर अपना विश्वास जताया और उन्हें कुटुंबा की बागडोर दी. जैसे ही राजेश कुमार की जीतने की खबर मतगणना केंद्र से बाहर आयी, लोगों ने जम कर खुशियां मनायी. पटाखे फोड़े और एक-दूसरे को गुलाल-अबीर लगा कर होली खेली. नीतीश कुमार जिंदाबाद, सोनिया-राहुल जिंदाबाद के नारे गूंजते रहे, तो दूसरे तरफ हम प्रत्याशी संतोष के समर्थकों में निराशा की लहर दौड़ गयी.जनता के उम्मीदों पर उतरूंगा खरा : राजेशकुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से हम पार्टी के प्रत्याशी संतोष कुमार को शिकस्त देकर जीत का झंडा बुलंद करनेवाले कांग्रेस प्रत्याशी राजेश कुमार ने जनता का अभिवादन किया और कहा कि यह जनता की जीत है. कुटुंबा की जनता ने जो हम पर भरोसा किया है उसे ताउम्र याद रखूंगा. उन्होंने कहा कि आम अवाम की परेशानी हमारी परेशानी होगी. हम किसी भी कीमत पर अपने जनता जनार्दन को परेशानियों का सामना नहीं करने देंगे. हर खेत में पानी पहुंचेगा तो हर हाथ को काम मिलेगा. गांव से लेकर टोला तक बिजली से जगमगायेंगे .नहरों का सौंदर्यीकरण होगा और किसानों के खेत लहलहायेंगे. गरीबी-अमीरी का भेदभाव नहीं होगा. आपसी भाईचारे के साथ लोग गले से गले मिला कर रहेंगे. हमारा प्रयास होगा कि हम रूकी हुई योजनाओं का कार्यान्वयन कराना. राजेश ने कहा कि हम पूरी तरह से आश्वस्त थे कि जनता ने हमें अपना आशीर्वाद दिया है. उनके आशीर्वाद का ही परिणाम है कि एक बार फिर स्व दिलकेश्वर राम के परिवार पर अपनी उम्मीदें कायम रखी है. हम अपने पिता के अधूरे सपने को हर हाल में पूरा करेंगे.बीए ऑनर्स राजेश ने समाजसेवा को दी प्राथमिकता कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जीत का परचम लहराये राजेश कुमार पूर्व मंत्री दिलकेश्वर राम के पुत्र हैं. पिता के सान्धिय में राजनीति की ककहरा सीखी. पिता के गुजरने के बाद पिता के अधूरे कार्यों को पूरा कराने का संकल्प लिया और उसी कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र को अपना हथियार बनाया. समाज सेवा के कई कार्य किये. कांग्रेस पार्टी में रह कर संगठन मजबूती के लिए काम किया. राजेश का जन्म 28 जनवरी 1967 को हुआ. इनकी मां माया देवी भी समाजसेवी महिला थी. 1984 में सुरखी से मैट्रिक की परीक्षा पास की. 1986 में संत कोलंबस कॉलेज हजारीबाग से इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की. 1988 में बीए की परीक्षा पास की और 1989 में बीए ऑनर्स किया. इनके दो पुत्र है सिद्धार्थ हर्ष राज और आभार्या हर्ष राज. फिलहाल ओबरा को उन्होंने अपना गृह क्षेत्र बनाया है. जबकि बहादुरपुर पटना में भी इनका आवास है. मांझी का प्रयास भी नहीं लाया रंगकुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हम प्रत्याशी संतोष कुमार सुमन की करारी हार हुई है. उनके पिता व पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी का प्रयास भी कोई रंग नहीं दिखाया. जनता ने संतोष को नकार दिया. कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र में जीतन राम मांझी ने खुद कैंपेन किया. एनडीए के स्टार प्रचारकों ने कुटुंबा विधानसभा के गांवों में जम कर चुनाव प्रचार किये, लेकिन इसका असर मतदाताओं पर नहीं पड़ा. यहां के मतदाताओं ने पूरी तरह संतोष के जीत के दावे को खारिज कर दिया. बाहरी व भीतरी ने बिगड़ा खेल कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी के रूप में पूर्व मंत्री डाॅ सुरेश पासवान व प्रखंड प्रमुख सुदेश्वर कुमार को चुनाव लड़ने की चर्चा थी. लेकिन इन दोनों को पार्टी ने टिकट से वंचित कर दिया और संतोष कुमार सुमन को हम पार्टी का प्रत्याशी घोषित कर दिया. संतोष को चुनाव मैदान में उतरते ही कुटुंबा में बाहरी व भीतरी का नारा लग गया. कई जगहों पर विरोध का सामना भी करना पड़ा. आखिरकार वही हुआ जो लोगों ने तय किया था.

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