विद्यालय नहीं आने पर भी हो रहा मानदेय का भुगतान

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 30 Nov 2014 8:02 PM

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देवकुंड (औरंगाबाद)सरकार शिक्षा के क्षेत्र में महादलितों के उत्थान के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है. टोला सेवकों को विद्यालय में तीन से चार बजे तक वैसे बच्चों को शिक्षा देने को कहा गया जो पढ़ने में काफी कमजोर है. लेकिन, गोह प्रखंड के अधिकतर टोला सेवक विद्यालय भी नहीं पहुंचते हैं. लोगांे […]

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देवकुंड (औरंगाबाद)सरकार शिक्षा के क्षेत्र में महादलितों के उत्थान के लिए कई तरह की योजनाएं चला रही है. टोला सेवकों को विद्यालय में तीन से चार बजे तक वैसे बच्चों को शिक्षा देने को कहा गया जो पढ़ने में काफी कमजोर है. लेकिन, गोह प्रखंड के अधिकतर टोला सेवक विद्यालय भी नहीं पहुंचते हैं. लोगांे का कहना है कि टोला सेवक को विद्यालय नहीं आने का खामियाजा कमजोर छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. इतना ही नहीं टोला सेवक प्रत्येक दिन विद्यालय जाकर अपनी उपस्थिति भी दर्ज कराना मुनासिब नहीं समझते हैं. विद्यालय प्रधानाध्यापक भी इस ओर ध्यान नहीं देते, अगर प्रधानाध्यापक द्वारा वैसे टोला सेवक जो विद्यालय नहीं आते हैं उन्हें उपस्थिति दर्ज करने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता तो शायद उनकी विद्यालय न आने वाली आदत में सुधार हो सके. अभिभावकों का कहना है कि सरकार द्वारा वैसे छात्रों को पोशाक व छात्रवृत्ति योजना की राशि से वंचित रखा जाता है जिनकी उपस्थिति 75 प्रतिशत से कम है. लेकिन, सवाल यह उठता है कि अगर शिक्षक और टोला सेवक विद्यालय नहीं आते है, तो उनकी मानदेय का भुगतान क्यों किया जाता है? उनका उपस्थिति के आधार पर मानदेय का भुगतान क्यों नहीं किया जाता.

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