औरंगाबाद में दहेज के लिए बहू को प्रताड़ित करने वाले पति व सास-ससुर को सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना

Published by : Vivek Pandey Updated At : 11 Jun 2026 1:32 PM

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Aurangabaad News: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने दहेज उत्पीड़न मामले में पति, सास और ससुर को दोषी करार देते हुए 498ए और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत सजा सुनाई. जानिए पूरी घटना और अदालत का फैसला.

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Aurangabad News: (सुजीत कुमार सिंह) औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय में दहेज उत्पीड़न से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में एसडीजेएम अनीस कुमार ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पति, सास और ससुर को दोषी करार दिया है और सजा सुनाई है. यह मामला महिला थाना कांड संख्या-17/24, जीआर संख्या-667/24 तथा टीआर संख्या-1814/26 से संबंधित है.

तीनों आरोपितों को मिली सजा

न्यायालय ने अभियुक्त पति अजीत कुमार, सास उर्मिला देवी और ससुर योगेंद्र सिंह (सभी निवासी जम्होर) को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत दोषी पाते हुए प्रत्येक को दो-दो वर्ष का साधारण कारावास और पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.

इसके साथ ही दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धारा-4 के तहत नौ-नौ माह का अतिरिक्त कारावास और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी.

Ai तस्वीर

गवाहों की गवाही से साबित हुआ मामला

अभियोजन पदाधिकारी विकास कुमार ने बताया कि मुकदमे में कुल पांच गवाहों की गवाही कराई गई. शिकायतकर्ता सहित अन्य गवाहों ने अदालत में घटना की पुष्टि की, जिसके आधार पर आरोप साबित हुए.

गवाहों के अनुसार विवाह के लगभग दो महीने बाद ही ससुराल पक्ष द्वारा क्रेटा कार की मांग शुरू कर दी गई थी. मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता को शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया.

पंचायत में भी सामने आया दबाव

अभियोजन पक्ष के अनुसार 6 मार्च 2024 को हुई पंचायत में पति ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि “यदि फोर व्हीलर मिलेगा तभी पत्नी को साथ रखेगा. इसके अलावा 7 नवंबर 2023 को विवाहिता के गहने छीनकर उसे घर से निकाल देने की घटना भी अदालत में साबित हुई.

एफआईआर से लेकर सजा तक की प्रक्रिया

अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि पीड़िता ने 13 मार्च 2024 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उसकी शादी 6 जून 2023 को हिंदू रीति-रिवाज से एक नौकरीपेशा युवक के साथ हुई थी.

शादी में लगभग 30 लाख रुपये मूल्य के उपहार दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर लगातार प्रताड़ना दी गई.

मामले में 23 अक्टूबर 2024 को आरोप गठन किया गया था और सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने यह फैसला सुनाया.

अदालत का सख्त संदेश

यह फैसला दहेज उत्पीड़न के मामलों में न्यायिक सख्ती और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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लेखक के बारे में

By Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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