अरवल-जहानाबाद लाइफलाइन पर संकट: किंजर पुल से भारी वाहनों की एंट्री बंद

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 14 May 2026 5:02 PM

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कंक्रीट का स्लैब पुल पर

Arwal News: अरवल और जहानाबाद को जोड़ने वाला किंजर पुल खतरनाक रूप से जर्जर हो गया है. प्रशासन ने इस पर बड़े वाहनों का चलना बंद कर दिया है, जिससे अब छोटी गाड़ियां ही आवागमन का साधन बची हैं. पुल की मरम्मत में करीब डेढ़ महीने का समय लगेगा, तब तक व्यापारियों और आम जनता को महंगे सफर और अतिरिक्त भाड़े की मार झेलनी होगी.

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Arwal News (निशिकांत):अरवल और जहानाबाद को जोड़ने वाला प्रमुख एनएच-33 स्थित किंजर पुल जर्जर होने के कारण खतरे के निशान पर है. सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुल पर भारी और व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर पूरी तरह रोक लगा दी है. अब इस मार्ग पर केवल छोटी गाड़ियां ही आवाजाही कर सकेंगी, जिससे आम लोगों और व्यापारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं.

‘कभी भी गिर सकता है पुल’

जिला पदाधिकारी अमृषा बैंस ने बताया कि तकनीकी जांच में पुल की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई है. उन्होंने कहा पुल की जांच कराई गई थी, जिसमें इसे बहुत कमजोर पाया गया है. यदि इस पर भारी व्यावसायिक वाहन चलते रहे, तो पुल कभी भी गिर सकता है. जनहानि को रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से बड़ी गाड़ियों पर रोक लगाई गई है.

डीएम ने आगे बताया कि पुल की मरम्मत का कार्य शुरू किया जा रहा है, जिसे पूरा होने में 30 से 45 दिन का समय लग सकता है. इसके बाद ही स्थिति की समीक्षा कर परिचालन बहाल किया जाएगा.

महंगाई की मार,अतिरिक्त भाड़े का बोझ

पुल बंद होने का सबसे बुरा असर माल के आवाजाही पर पड़ा है. जहानाबाद और गया से आने वाला माल अब लंबे रूट से घूमकर अरवल पहुँचेगा. जिससे व्यापार पर खासा असर पड़ने की संभावना है. इमामगंज, करपी और तेलपा के व्यापारियों का सामान अब देरी से पहुँचेगा. वहीं खाद और निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने की भी संभावना है, जैसा कि खाद का रेक जहानाबाद में लगता है, तो अब वहां से खाद लाने में अधिक खर्च होगा. साथ ही गिट्टी, बालू, छड़ और सीमेंट के दामों में भी बढ़ोतरी की आशंका है क्योंकि दुकानदारों को अतिरिक्त भाड़ा देना पड़ रहा है.

ऑटो चालकों की ‘चांदी’, आम जनता परेशान

बस और ट्रक जैसी बड़ी गाड़ियां बंद होने का फायदा छोटे वाहन चालक उठा रहे हैं.जहानाबाद जाने के लिए लोग अब पूरी तरह ऑटो पर निर्भर हैं. आरोप है कि ऑटो चालक मजबूरी का फायदा उठाकर यात्रियों से मनमाना किराया वसूल रहे हैं.

किंजर पुल दोनों जिलों की लाइफलाइन है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुल गिर गया, तो स्थिति और भी भयावह हो जाएगी और वैकल्पिक व्यवस्था बनाने में वर्षों लग सकते हैं.

बैरियर तोड़ने वाले डंपरों पर प्रशासन का ‘कंक्रीट प्रहार’

किंजर पुनपुन नदी के इस जर्जर पुल पर बड़े वाहनों को रोकने के लिए एनएच-33 और किंजर थाना पुलिस ने संयुक्त रूप से मोर्चा संभाल लिया है. अब तक दर्जनों बार लोहे के बैरियर लगाए गए थे, जिन्हें बेलगाम डंपर चालक हर बार तोड़ देते थे।. इस ‘तू डाल-डाल, मैं पात-पात’ की लुकाछिपी को खत्म करने के लिए एनएच-33 के आला अधिकारियों ने अब कंक्रीट के भारी-भरकम स्लैब का सहारा लिया है.

हाइड्रा मशीन के जरिए पुल के दोनों छोर पर कंक्रीट के बड़े-बड़े स्लैब रख दिए गए हैं, जिससे ट्रक, बस, टैंकलोरी और डंपर जैसे भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह नामुमकिन हो गया है. हालांकि, प्रशासन ने मानवीय पहलू का ध्यान रखते हुए एंबुलेंस के निकलने के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी है, ताकि मरीजों को कोई असुविधा न हो.

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