लखनऊ के बटर चिकन के दीवाने हैं मिचेल मार्श

Edited by Rajneesh Anand
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Mitchell Marsh : आईपीएल के 19वें सीजन में लखनऊ का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है, लेकिन फैंस का प्यार पाकर टीम के ओपनर मिचेल मार्श बहुत खुश हैं. उन्होंने एक कार्यक्रम के दौरान फैंस के प्यार की प्रशंसा की और कहा कि मुझे यहां का बटर चिकन बहुत पसंद है.

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Mitchell Marsh :ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर मिचेल मार्श लखनऊ को अपना दूसरा घर बताते हैं. उनका कहना है कि यहां के लोगों ने उन्हें बहुत प्यार दिया है, इसी वजह से वे हर साल यहां कुछ समय गुजारते हैं. उन्हें यहां का खाना भी बहुत पसंद है.

लखनऊ के बटर चिकन के दीवाने हैं मिचेल मार्श

लखनऊ सुपर जायंट्स के ओपनर मिचेल मार्श ने एक कार्यक्रम में कहा कि आईपीएल का यह सीजन अबतक उनके लिए अच्छा नहीं गया है, लेकिन लखनऊ के लोगों का उन्हें बहुत प्यार मिला है. उन्होंने शहर के सपोर्ट की तारीफ की और कहा कि मुझे यहां का बटर चिकन बहुत पसंद है.मार्श ने लखनऊ में फ्रेंचाइजी के स्टार खिलाड़ियों के साथ एक्सक्लूसिव मीट एंड ग्रीट के मौके पर बात की. इस कार्यक्रम को टीम के मुख्य स्पॉन्सर जेके सीमेंट ने होस्ट किया था. इस इवेंट में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों में कप्तान ऋषभ पंत, ऑस्ट्रेलियाई ऑल-राउंडर मिचेल मार्श और युवा भारतीय टैलेंट अर्जुन तेंदुलकर और मुकुल चौधरी शामिल थे.

खुशकिस्मत हूं, मुझे प्यार मिला

मार्श ने कहा लखनऊ मुझे घर की बहुत याद दिलाता है. यहां मुझे बहुत प्यार मिला है.फैंस के जबरदस्त सपोर्ट के लिए उनका शुक्रिया अदा करते हुए, मार्श ने कहा- हम खुशकिस्मत हैं कि हमारे पास इतने जबरदस्त फैंस हैं. हालांकि इस सीजन की शुरुआत हमारी सबसे अच्छी नहीं रही, लेकिन उनका सपोर्ट हमेशा बना रहा है. यहां के लोग बहुत अच्छे हैं और टीम को लेकर बहुत पैशनेट हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि हम जल्द ही फैंस को जीत का तोहफा देंगे. इस सीजन में मार्श ने लखनऊ के लिए सात इनिंग्स में 30 के एवरेज से 210 रन बनाए हैं, जिसमें उनके नाम एक फिफ्टी भी है.अभी लखनऊ दो जीत और पांच हार के साथ पॉइंट्स टेबल में नौवें स्थान पर है, जिसमें उन्हें चार पॉइंट्स मिले हैं.

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लेखक के बारे में

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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