H-1B Visa : एच-1 बी वीजा एक बार फिर चर्चा में है. इसकी वजह यह है कि इस वीजा को लेकर एक नया बिल अमेरिकी संसद, कांग्रेस में पेश किया गया है. इस बिल को कांग्रेस की मेंबर एली क्रेन ने 22 अप्रैल को पेश किया है. इस बिल में जिस तरह के प्रावधान किए गए हैं वे एच-1बी वीजा पाने वालों की राह में बड़ा बाधक हो सकते हैं. एच-1बी वीजा से जुड़े नए बिल में क्या है खास? एच-1 बी वीजा पाने वालों में सबसे बड़ा हिस्सा भारतीयों का है. 2022-2023 के आंकड़ों के अनुसार एच-1बी वीजा पाने वालों में लगभग 72%-73% लोग भारतीय थे. यह आंकड़ा कई सालों में 75% तक गया है, इसलिए एच 1बी वीजा पर आए नए बिल के बारे में भारतीय जानना चाहते हैं कि इसमें क्या है खास? नए बिल को नाम दिया गया है- एंड H-1B वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026. इस बिल में यह प्रावधान किया गया है कि नए H-1B वीज़ा पर तीन साल की रोक लगा दी जाए. यानी अगले तीन साल तक किसी को भी नया एच-1 बी वीजा नहीं दिया जाएगा. बिल में यह बात की भी कही गई है कि प्रति वर्ष सिर्फ 25 हजार ही वीजा दिए जाएं, जो वर्तमान में 85 हजार के करीब है. बिल में यह व्यवस्था करने की भी बात की गई है ताकि जिसकी सैलरी न्यूनतम $200,000 होगी उन्हें ही वीजा मिलेगा, बाकियों को नहीं. OPT (अमेरिका में काम करने की अस्थायी अनुमति) के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया जा सकता है. इन बदलावों की वजह से अमेरिका में स्किल्ड माइग्रेशन सिस्टम पूरी तरह बदल जाएगा. विषय🔸 अभी का नियम🔻 बिल लागू होने पर बदलावनए H-1B वीजाहर साल जारी होते हैं3 साल तक पूरी तरह रोक सालाना वीजा संख्या 85,000 प्रति वर्षघटाकर 25,000सेलेक्शन सिस्टमलॉटरी सिस्टमसैलरी (wage-based) आधारित चयनन्यूनतम सैलरीतय सीमा नहीं (लोअर लेवल भी संभव)कम से कम $200,000 अनिवार्यOPT (काम की अनुमति)1–3 साल तक काम की अनुमतिखत्म या सख्त बदलावग्रीन कार्ड (PR) जारी (लंबी वेटिंग के साथ)स्टेटस एडजस्टमेंट पर रोक संभवडिपेंडेंट्स (परिवार)साथ ले जा सकते हैंपरिवार ले जाने पर रोकस्टूडेंट से वर्कर का रास्ताF-1 → OPT → H-1Bपूरी पाइपलाइन टूट सकती हैमिड-लेवल प्रोफेशनल्सअच्छे मौकेलगभग बाहर हो जाएंगेभारतीयों पर असरसबसे ज्यादा लाभार्थी (70%+)सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीयों पर क्या हो सकता है प्रभाव? एच-1बी वीजा के जरिए हर साल बड़ी संख्या में भारतीय स्टूडेंट्स और कामगार अमेरिका जाते हैं, अगर तीन साल तक के लिए वीजा नहीं दिया जाएगा, तो हजारों भारतीय पढ़ाई और नौकरी के लिए अमेरिका नहीं जा पाएंगे. वीजा देने में भी कैप लगाया जा रहा है, यानी एक सीमित संख्या में ही वीजा दिया जाएगा. इससे कंपीटिशन बहुत बढ़ जाएगा और बहुत संभव है कि भारतीयों को अमेरिका का वीजा ना मिले. OPT खत्म करने से भारतीयों को बड़ा झटका लगेगा. उनके लिए पढ़ाई के बाद अमेरिका में नौकरी के अवसर लगभग समाप्त हो जाएंगे. ग्रीन कार्ड को रोकने से वैसे भारतीयों को झटका लगेगा जो स्थायी तौर पर वहां बसने के इच्छुक हैं. एच-1 बी वीजा होल्डर अपने साथ अपने परिजनों को नहीं ले जा पाएंगे क्योंकि डिपेंडेंट्स पर रोक लगाने का प्रावधान बिल में है. कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि विदेशी कामगारों को अमेरिका में नौकरी ना मिले इसकी पूरी व्यवस्था इस बिल में की गई है. क्या यह कठोर बिल पास होगा? अमेरिका में टेक, हेल्थकेयर, रिसर्च जैसे सेक्टर में स्किल्ड वर्कर्स की हमेशा कमी रहती है. एच-1बी वीजा पर जाने वाले लोग इस कमी को पूरा करते हैं, जिसकी वजह से वहां काम समय पर हो पाते हैं और इनोवेशन, कंपनियों की ग्रोथ और ग्लोबल प्रतिस्पर्धा में अमेरिका बना रहता है. इस परिस्थिति में इतना कठोर बिल पास हो पाएगा, इसकी उम्मीद बहुत कम है. आमतौर पर ऐसे बिल पॉलिटिकल गेन के लिए लाए जाते हैं, सीनेट से इनके पक्ष में 60 वोट लेना बहुत मुश्किल होता है. हां, यह जरूर है कि एच-1 बी वीजा भारतीयों के लिए परेशानी का सबब तो बन गया है. ये भी पढ़ें : बंगाल में लोकतंत्र की ‘सुनामी’, 74 साल का रिकॉर्ड टूटा, रात 9 बजे तक 92.35 फीसदी मतदान, क्या यह महा-परिवर्तन की आहट?