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5 जिले के 30 पंचायत व 171 गांवों का होगा संस्थागत विकास, अर्जुन मुंडा बोले- जनजातीय कानून व नियमों के बारे में जागरूक होंगे ग्रामीण

Updated at : 27 Oct 2020 7:27 PM (IST)
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5 जिले के 30 पंचायत व 171 गांवों का होगा संस्थागत विकास, अर्जुन मुंडा बोले- जनजातीय कानून व नियमों के बारे में जागरूक होंगे ग्रामीण

Jharkhand news, Saraikela news : जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) ने मंगलवार को आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से जनजातीय वर्गों के कल्‍याण के लिए 2 सेंटर आर्ट ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की. इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्‍थापक आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर भी उपस्थित थे.

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Jharkhand news, Saraikela news : सरायकेला- खरसावां (शाचीन्द्र दाश/प्रताप मिश्रा) : जनजातीय मामलों के केंद्रीय मंत्री अर्जुन मुंडा (Arjun Munda) ने मंगलवार को आर्ट ऑफ लिविंग के सहयोग से जनजातीय वर्गों के कल्‍याण के लिए 2 सेंटर आर्ट ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत की. इस अवसर पर आर्ट ऑफ लिविंग के संस्‍थापक आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर भी उपस्थित थे.

वेबिनार के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री मुंडा ने कहा कि जनजातियों, किसानों और निचले तबके के लोगों के लिए केंद्र सरकार ने बहुत अच्छी योजनाएं बनायी है. आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए झारखंड के 5 जिले सरायकेला, पूर्वी एवं पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी और गुमला जिला के 30 ग्राम पंचायतों और 171 गांवों में पंचायती राज संस्‍थाओं को मजबूत करने की दिशा में प्रयास होंगे, ताकि इन संस्‍थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों को जनजातीय कानूनों और नियमों के बारे में जागरूक बनाया जा सके.

इसका उद्देश्‍य ऐसे युवकों को उनके कल्‍याण की विभिन्‍न योजनाओं के बारे में जागरूक करना है, ताकि वे इन योजनाओं का लाभ ले सकें. इस मॉडल के तहत जनजातीय युवकों के बीच से ही युवा स्‍वयंसेवियों को व्‍यक्ति विकास प्रशिक्षण प्रदान कर उनमें सामाजिक जिम्‍मेदारी की भावना का सृजन करना है, ताकि वे जनजा‍तीय समुदाय के लिए काम करें और लोगों में जागरूकता का प्रसार कर सकें.

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मंत्री मुंडा ने कहा कि आर्ट ऑफ लिविंग यानी जीने की कला को हम वास्तविक रूप से कैसे समझे, इसके लिए गुरु रविशंकर जी देश में ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व में अभियान चला रहे हैं. इस नयी योजना के तहत पंचायती राज संस्थाओं का संस्थागत विकास कैसे हो, इन सारे विषयों को ध्यान में रखी गयी है.

2 लाख करोड़ का बजट का है प्रस्ताव

सरकार जनजाति समाज के सशक्तीकरण के लिए बहुत सारे कानून बनाये हैं. उनके विकास के लिए केंद्र और राज्य सरकारों का 2 लाख करोड़ का बजटीय उपबंध है. श्री मुंडा ने कहा कि हमें इस बात का ध्यान रखना है कि उनके पारंपरिक व्यवस्था को अक्षुण्ण रखते हुए उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों के बारे में जागरूक करना जरूरी है.

जनजातियों से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता : रविशंकर

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर ने कहा कि जनजातियों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है. वे पर्यावरण और स्वच्छता के प्रति बहुत जागरूक हैं. उनकी संस्कृति और परंपरा को यथावत रखते हुए उन्हें आधुनिक शिक्षा देने की जरूरत है. कार्यक्रम में राज्यमंत्री रेणुका सिंह सरुता, मंत्रालय के सचिव दीपक खंडूकर सहित वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे.

Posted By : Samir Ranjan.

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