सरहुल, प्रकृति को धन्यवाद कहने का पर्व
Published by : Shaurya Punj Updated At : 21 Mar 2026 8:02 AM
प्रकृति पर्व सरहुल आज
Sarhul 2026: सरहुल आदिवासी पर्व है जो प्रकृति के प्रति आभार, सखुआ फूलों के स्वागत और नई फसल व नववर्ष की खुशियों का प्रतीक है.
Sarhul 2026: प्रकृति पर्व सरहुल आज 21 मार्च 2026 को मनाया जा रहा है. सरहुल पर्व आदिवासी समाज का एक महत्वपूर्ण उत्सव है, जो प्रकृति के प्रति आभार और सम्मान को दर्शाता है. यह पर्व इस विश्वास पर आधारित है कि प्रकृति ही जीवन का आधार है और मनुष्य का अस्तित्व उसी पर निर्भर करता है. पतझड़ के मौसम से पहले जब सखुआ (साल) के फूल खिलते हैं, तब सरहुल का आगमन होता है. इस पूजा के साथ ही आदिवासी नववर्ष की शुरुआत मानी जाती है. इस दिन घरों में विशेष पकवान जैसे गुड़ पिठ्ठा और अन्य पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और सामूहिक रूप से खुशियां मनाई जाती हैं.
पर्व के अलग-अलग नाम
सरहुल शब्द दो भागों से मिलकर बना है—‘सर’ और ‘हुल’. ‘सर’ का अर्थ सखुआ का फूल या ‘सर्व’ होता है, जबकि ‘हुल’ का अर्थ क्रांति या परिवर्तन से है. इस प्रकार, सखुआ फूलों के खिलने को एक नई शुरुआत और परिवर्तन के प्रतीक के रूप में देखा जाता है. अलग-अलग जनजातीय भाषाओं में इस पर्व के विभिन्न नाम हैं. मुंडारी, संताली और हो भाषा में इसे ‘बा’ या ‘बरहा पोरोब’ कहा जाता है, खड़िया में ‘जॉकौर’, कुड़ुख में ‘खही’ या ‘खेखेल बेजा’, जबकि नागपुरी, कुरमाली और खोरठा भाषाओं में इसे सरहुल ही कहा जाता है.
मछली और केकड़े का महत्व
सरहुल पर्व में मछली और केकड़ा पकड़ने की परंपरा का विशेष महत्व है. आदिवासी मान्यताओं के अनुसार, ये जीव पृथ्वी के पूर्वज माने जाते हैं. एक लोककथा के अनुसार, मछली और केकड़े ने समुद्र की गहराई से मिट्टी निकालकर धरती के निर्माण में मदद की थी. पकड़े गए केकड़ों को खेतों में डालने की परंपरा है, जिससे अच्छी फसल होने की कामना की जाती है.
1967 में सरहुल का विस्तार
सन् 1967 में सरहुल की शोभायात्रा ने एक बड़े सामाजिक आयोजन का रूप लिया. इस वर्ष राजनीतिक और सामाजिक नेतृत्व के उभरने के कारण इस पर्व को व्यापक पहचान मिली. इसके बाद आसपास के गांवों और जिलों में भी सरहुल की धूम बढ़ने लगी और यह एक बड़े सांस्कृतिक उत्सव के रूप में स्थापित हो गया.
केकड़े से जुड़ी मान्यताएं
आदिवासी समाज में केकड़े को विशेष महत्व दिया जाता है. मान्यता है कि केकड़े ने पूर्वजों को संकट के समय आश्रय दिया था, इसलिए सरहुल के दिन उसकी पूजा भी की जाती है. केकड़े को धागे में बांधकर घर में सुरक्षित रखा जाता है और बाद में उसका चूर्ण बनाकर धान के बीज और गोबर में मिलाया जाता है. यह विश्वास है कि जैसे केकड़ा अधिक संख्या में अंडे देता है, वैसे ही फसल भी भरपूर होगी.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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