एक जैसे दिखने वाले इन दो शब्दों में क्या है अंतर? समझिए कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए क्यों हैं ये खास
Dearness Allowance Hike
DA vs DR : क्या आप भी DA और DR को एक ही समझते हैं? भले ही दोनों का मकसद महंगाई से लड़ना हो, लेकिन इनमें बड़ा अंतर है. जानिए 7वें वेतन आयोग के तहत कैसे होती है इनकी गणना.
DA vs DR : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच डीए (DA) और डीआर (DR) दो ऐसे शब्द हैं, जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं. जब भी सरकार इनमें बढ़ोतरी करती है, तो देश के लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के चेहरे खिल जाते हैं.
भले ही इन दोनों का मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई के असर को कम करना और जीवन-यापन को आसान बनाना हो, लेकिन तकनीकी रूप से ये दोनों एक-दूसरे से काफी अलग हैं. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और इनकी गणना कैसे होती है.
क्या होता है महंगाई भत्ता (DA) ?
DA यानी डियरनेस अलाउंस (Dearness Allowance): यह केंद्र और राज्य सरकार के मौजूदा (वर्किंग) कर्मचारियों की सैलरी का एक अहम हिस्सा होता है.
- बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को संतुलित करना.
- इसे हर छह महीने में ‘ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ (AICPI) के आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार (आमतौर पर मार्च और अक्टूबर में) रिवाइज किया जाता है, जो जनवरी और जुलाई से प्रभावी होता है.
यह कर्मचारी की ‘कॉस्ट-टू-कंपनी’ (CTC) और मासिक सैलरी को सीधे बढ़ाता है.
क्या होती है महंगाई राहत (DR) ?
DR यानी डियरनेस रिलीफ (Dearness Relief): यह नौकरी से सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके कर्मचारियों यानी पेंशनर्स को मिलने वाली पेंशन का एक हिस्सा होता है.
रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों को बढ़ती महंगाई के खर्चों से बचाना.
इसे भी DA के साथ ही साल में दो बार संशोधित किया जाता है.
यह उन पूर्व कर्मचारियों की मासिक व्यक्तिगत या पारिवारिक पेंशन (Family Pension) की रकम को बढ़ाता है.
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