एक जैसे दिखने वाले इन दो शब्दों में क्या है अंतर? समझिए कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए क्यों हैं ये खास
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 26 May 2026 1:06 PM
DA vs DR
DA vs DR : क्या आप भी DA और DR को एक ही समझते हैं? भले ही दोनों का मकसद महंगाई से लड़ना हो, लेकिन इनमें बड़ा अंतर है. जानिए 7वें वेतन आयोग के तहत कैसे होती है इनकी गणना.
DA vs DR : सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच डीए (DA) और डीआर (DR) दो ऐसे शब्द हैं, जो सबसे ज्यादा चर्चा में रहते हैं. जब भी सरकार इनमें बढ़ोतरी करती है, तो देश के लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों के चेहरे खिल जाते हैं.
भले ही इन दोनों का मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई के असर को कम करना और जीवन-यापन को आसान बनाना हो, लेकिन तकनीकी रूप से ये दोनों एक-दूसरे से काफी अलग हैं. आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि इन दोनों में क्या अंतर है और इनकी गणना कैसे होती है.
क्या होता है महंगाई भत्ता (DA) ?
DA यानी डियरनेस अलाउंस (Dearness Allowance): यह केंद्र और राज्य सरकार के मौजूदा (वर्किंग) कर्मचारियों की सैलरी का एक अहम हिस्सा होता है.
- बढ़ती महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों को संतुलित करना.
- इसे हर छह महीने में ‘ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ (AICPI) के आंकड़ों के आधार पर साल में दो बार (आमतौर पर मार्च और अक्टूबर में) रिवाइज किया जाता है, जो जनवरी और जुलाई से प्रभावी होता है.
यह कर्मचारी की ‘कॉस्ट-टू-कंपनी’ (CTC) और मासिक सैलरी को सीधे बढ़ाता है.
क्या होती है महंगाई राहत (DR) ?
DR यानी डियरनेस रिलीफ (Dearness Relief): यह नौकरी से सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके कर्मचारियों यानी पेंशनर्स को मिलने वाली पेंशन का एक हिस्सा होता है.
रिटायरमेंट के बाद बुजुर्गों को बढ़ती महंगाई के खर्चों से बचाना.
इसे भी DA के साथ ही साल में दो बार संशोधित किया जाता है.
यह उन पूर्व कर्मचारियों की मासिक व्यक्तिगत या पारिवारिक पेंशन (Family Pension) की रकम को बढ़ाता है.
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लेखक के बारे में
By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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