झारखंड की अनोखी होली, परंपरा, शालीनता और संस्कृति का रंग

Published by :Shaurya Punj
Published at :04 Mar 2026 9:26 AM (IST)
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Holi in Jharkhand

झारखंड की होली

Holi in Jharkhand: झारखंड के गांवों में होली शालीनता और परंपरा के साथ मनाई जाती है. राख की होली, डोल जतरा और भजन-कीर्तन के जरिए संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम दिखता है.

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Holi in Jharkhand: होली को अक्सर रंग, मस्ती और हुड़दंग से जोड़ा जाता है. कई जगहों पर तेज संगीत, अश्लील गाने और नशे का माहौल भी देखने को मिलता है. लेकिन झारखंड के कई गांवों में होली बिल्कुल अलग अंदाज में मनाई जाती है. यहां न तो अश्लील गाने बजते हैं और न ही हुड़दंग होता है. यहां होली शालीनता, परंपरा और आपसी सम्मान के साथ खेली जाती है. इन गांवों में होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि अपनी विरासत और संस्कृति को आगे बढ़ाने का अवसर है. लोग मौज-मस्ती भी करते हैं, लेकिन मर्यादा और परंपरा का पूरा ध्यान रखते हैं.

लातेहार के पोचरा गांव की राख वाली होली

लातेहार मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर पोचरा गांव में होली आज भी प्राचीन रीति-रिवाजों के साथ मनाई जाती है. होलिका दहन के अगले दिन सुबह ग्रामीण मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं. इसके बाद “चुलेही होली” की शुरुआत होती है. यहां लोग राख से होली खेलते हैं. राख को अहंकार और नकारात्मकता के अंत का प्रतीक माना जाता है. ग्रामीणों का कहना है कि यह परंपरा उन्हें अपने पूर्वजों से मिली है. ढोलक और मजीरे की थाप पर लोकगीत गाए जाते हैं. यहां की होली राधा-कृष्ण के प्रेम और वसंत ऋतु के आगमन का संदेश देती है.

कोडरमा में कीर्तन और कीचड़ की होली

कोडरमा जिले के सतगावां प्रखंड के कई गांवों में आज भी पारंपरिक होली मनाई जाती है. होलिका दहन के दिन ढोलक-झाल के साथ गाना-बजाना होता है. मरचोई, माधीपुर, टेहरी, शिवपुर, नावाडीह और समलडीह जैसे गांवों में लोग पौराणिक शैली में होली खेलते हैं. गांव के चौक-चौराहों पर कीर्तन मंडली द्वारा भजन-गीत प्रस्तुत किए जाते हैं. कुछ स्थानों पर कीचड़ की होली खेलने की भी परंपरा है. इसके बाद होलिका दहन की राख को उड़ाने की रस्म निभाई जाती है. यह सब मिलकर होली को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप देते हैं.

गुमला में तीन दिन का डोल जतरा

गुमला जिले में होली के साथ “डोल जतरा” का आयोजन होता है. यह उत्सव तीन दिनों तक चलता है. आदिम जनजातियां आज भी इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं. बिशुनपुर प्रखंड के पतारी क्षेत्र के पौलपील पाट में हर साल डोल जतरा लगता है. इस दौरान पूजा-पाठ, नृत्य और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं. पढ़े-लिखे युवक-युवती भी अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाते हैं. वे इसे केवल त्योहार नहीं, बल्कि अपनी पहचान मानते हैं.

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बिशुनपुर में परंपरा और पकवान

बिशुनपुर क्षेत्र में डोल जतरा के दौरान पारंपरिक खान-पान का खास आकर्षण होता है. यहां आदिम जनजाति के लोग अपने पारंपरिक व्यंजन बनाकर स्टॉल लगाते हैं. इस मौके पर शादी-ब्याह के लिए लड़का-लड़की देखने की परंपरा भी निभाई जाती है. बदलते समय के साथ रहन-सहन और पहनावे में बदलाव आया है, लेकिन परंपरा आज भी जीवित है.

जरियागढ़ की ऐतिहासिक डोल होली

झारखंड में ब्रज जैसी होली का अनुभव करना हो, तो जरियागढ़ की डोल होली खास मानी जाती है. यह परंपरा करीब 300 साल पुरानी बताई जाती है. यहां होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि आस्था और अनुशासन का प्रतीक है. सखुआ की डालियों और पलाश के फूलों से भगवान कृष्ण, सुभद्रा और बलभद्र की डोली सजाई जाती है. भजन-कीर्तन के साथ शोभायात्रा निकाली जाती है. जनजातीय और स्थानीय भाषा में गीत गाए जाते हैं, जिससे माहौल भक्तिमय बन जाता है.

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परंपरा में बसती है असली होली

झारखंड के इन गांवों में होली सिर्फ रंगों की नहीं, बल्कि संस्कृति और सम्मान की होली है. यहां लोग नशा या अश्लीलता से दूर रहकर प्रेम और भाईचारे के साथ त्योहार मनाते हैं. इन परंपराओं को देखकर यह समझ आता है कि होली का असली अर्थ आपसी मेल-मिलाप, खुशी और संस्कृति को सहेजने में है. ऐसी होली न केवल त्योहार को खास बनाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़कर भी रखती है.

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लेखक के बारे में

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शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में डिजिटल कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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