अगस्त 2026 में दिखेगा ‘ब्लड मून’, आसमान में नजर आएगा अद्भुत चंद्र ग्रहण

लगने जा रहा है ब्लड मून चंद्र ग्रहण
Blood Moon Lunar Eclipse 2026: अगस्त 2026 में लगने वाला ब्लड मून चंद्र ग्रहण आसमान में अद्भुत नजारा पेश करेगा. जानें ग्रहण का समय, भारत में दृश्यता और चांद के लाल दिखने का वैज्ञानिक कारण.
Blood Moon Lunar Eclipse 2026: अगस्त 2026 में आसमान एक बेहद खास खगोलीय घटना का गवाह बनने जा रहा है. 27 और 28 अगस्त की रात लगने वाला चंद्र ग्रहण दुनियाभर के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा. इस दौरान चंद्रमा लाल रंग में दिखाई देगा, जिसे आम भाषा में “ब्लड मून” कहा जाता है. खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए यह नजारा बेहद रोमांचक और दुर्लभ माना जा रहा है.
कब लगेगा चंद्र ग्रहण?
जानकारी के अनुसार यह आंशिक चंद्र ग्रहण 27 अगस्त की रात 10:33 बजे EDT (28 अगस्त को 02:33 GMT) से शुरू होगा. ग्रहण का चरम 28 अगस्त को रात 12:12 बजे देखने को मिलेगा. यह खगोलीय घटना कई घंटों तक प्रभाव में रहेगी और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई देगी.
उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका के साथ यूरोप और अफ्रीका के कई क्षेत्रों में यह ग्रहण शुरू से अंत तक साफ नजर आएगा. भारत में भी इसके कुछ चरण आंशिक रूप से देखे जा सकेंगे.
क्यों लाल दिखता है चांद?
पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है. ऐसी स्थिति में सूर्य की सीधी रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती. हालांकि पृथ्वी के वातावरण से गुजरने वाली लाल रंग की किरणें चंद्रमा तक पहुंच जाती हैं.
इसी वजह से चांद लाल, नारंगी या तांबे जैसे रंग का दिखाई देता है. इस अनोखी खगोलीय घटना को ही “ब्लड मून” कहा जाता है. पूर्ण ग्रहण के समय चंद्रमा का रंग सबसे ज्यादा गहरा लाल नजर आता है और यही पल सबसे खास माना जाता है.
करीब 5 घंटे तक रहेगा असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक यह चंद्र ग्रहण लगभग 5 घंटे तक प्रभाव में रहेगा. ग्रहण के दौरान कई चरण देखने को मिलेंगे, जिनमें उपच्छाया ग्रहण, आंशिक चंद्र ग्रहण और पूर्ण चंद्र ग्रहण शामिल हैं.
खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार पूर्ण ग्रहण का समय सबसे आकर्षक होगा, क्योंकि इसी दौरान चंद्रमा सबसे ज्यादा लाल दिखाई देगा. साफ मौसम वाले क्षेत्रों में लोग इसे बिना किसी विशेष उपकरण के भी देख सकेंगे.
चंद्र ग्रहण कितनी बार होता है?
वैज्ञानिकों के मुताबिक चंद्र ग्रहण पृथ्वी की दो प्रकार की छाया के कारण होता है. पहली हल्की बाहरी छाया “पेनम्ब्रा” कहलाती है, जबकि दूसरी गहरी केंद्रीय छाया “अम्ब्रा” होती है.
पेनम्ब्रल चंद्र ग्रहण हर साल कम से कम दो बार होते हैं, लेकिन इसकी छाया हल्की होने के कारण ज्यादातर लोग इसे देख नहीं पाते. वहीं अम्ब्रा वाले ग्रहण लगभग हर 2 से 3 साल में दिखाई देते हैं. कई बार एक ही साल में दो चंद्र ग्रहण भी लग सकते हैं.
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By Shaurya Punj
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