Chhath Puja 2025: खरना पूजा में केले के पत्तों का विशेष महत्व, जानिए स्वास्थ्य के लिए क्यों है फायदेमंद

खरना पूजा में केले के पत्तों का विशेष महत्व
Chhath Puja 2025: क्या आप जानते हैं कि छठ पूजा में खरना के दिन प्रसाद केले के पत्तों पर ही क्यों रखा जाता है? क्या केवल परंपरा का पालन है या इसके पीछे कोई गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक कारण है? आइए जानते हैं इस पावन परंपरा का महत्व.
Chhath Puja 2025: छठ पूजा का दूसरा दिन, खरना, श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है. इस दिन व्रती मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर और रोटी तैयार करते हैं और उन्हें भोग के रूप में सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित करते हैं. इस दौरान केले के पत्तों का उपयोग विशेष महत्व रखता है. माना जाता है कि इन्हें पूजा में शामिल करने से प्रसाद अधिक पवित्र और शुद्ध बनता है और भगवान की कृपा बनी रहती है.

पूजा सामग्री के रूप में महत्व
खरना के प्रसाद को मिट्टी या पीतल के बर्तन में तैयार किया जाता है. इसे केले के पत्ते पर रखा जाता है ताकि सूर्य देव और छठ मैया को अर्पित किया जा सके. यह पवित्र परंपरा आत्म-शुद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति का प्रतीक मानी जाती है.
धार्मिक मान्यता
केले के पेड़ में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का वास माना जाता है. इसलिए केले के पत्ते पर प्रसाद रखना शुभ माना जाता है और इसे करने से घर में समृद्धि और सुख-शांति बनी रहती है. शास्त्रों के अनुसार, केले के पत्तों पर भोग लगाने से अन्न भंडार हमेशा भरा रहता है और जीवन में समृद्धि आती है.
स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद
केले के पत्तों में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को हानिकारक तत्वों से बचाते हैं. यह प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायक है और पाचन संबंधी समस्याओं से बचाता है. साथ ही, केले के पत्ते और उनका पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है.
पर्यावरणीय संदेश
केले के पत्तों का इस्तेमाल केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं है, बल्कि यह प्राकृतिक संसाधनों का सम्मान करने और पर्यावरण के अनुकूल जीवन जीने का संदेश भी देता है.
खरना में प्रसाद बनाने में और कौन-सी सामग्री उपयोग की जाती है?
खीर, गुड़ और रोटी जैसे पकवान मिट्टी या पीतल के बर्तन में बनते हैं और इन्हें केले के पत्ते पर रखकर सूर्य देव और छठी मैया को अर्पित किया जाता है.
केले के पत्तों का आध्यात्मिक महत्व क्या है?
केले के पेड़ को भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का निवास माना जाता है. इसलिए इसे प्रसाद रखने के लिए उपयोग करने से धार्मिक और आध्यात्मिक लाभ दोनों मिलते हैं.
क्या खरना में अन्य पत्तियों का उपयोग भी किया जा सकता है?
परंपरा के अनुसार सिर्फ केले के पत्ते ही शुभ और पवित्र माने जाते हैं. अन्य पत्तियों का इस्तेमाल शास्त्रों में उचित नहीं माना गया है.
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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी केवल मान्यताओं और परंपरागत जानकारियों पर आधारित है.
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लेखक के बारे में
By JayshreeAnand
कहानियों को पढ़ने और लिखने की रुचि ने मुझे पत्रकारिता की ओर प्रेरित किया. सीखने और समझने की इस यात्रा में मैं लगातार नए अनुभवों को अपनाते हुए खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करती हूं. वर्तमान मे मैं धार्मिक और सामाजिक पहलुओं को नजदीक से समझने और लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रही हूं.
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