सोनमेर मंदिर, जहां सच्चे मन से मांगी मन्नत जरूर होती है पूरी

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सोनमेर माता मंदिर

Sonmer Mata Mandir: रांची के पास स्थित सोनमेर माता मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है. यहां मुंडारी भाषा में पूजा होती है और मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत माता जरूर पूरी करती हैं.

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Sonmer Mandir: झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित सोनमेर माता मंदिर श्रद्धालुओं के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. यह मंदिर खासतौर पर मां दुर्गा के दस भुजाओं वाले रूप की पूजा के लिए प्रसिद्ध है. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद माता सोनमेर जरूर पूरी करती हैं.

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मंदिर के पाहन (पुजारी) बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति लापता हो जाए और उसके लिए यहां माता से प्रार्थना की जाए तो वह सुरक्षित घर लौट आता है. यहां तक कि यदि किसी की गाड़ी चोरी हो जाए, तो भक्त माता से प्रार्थना करते हैं और उनकी आस्था है कि माता उनकी मदद करती हैं. इसी वजह से इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है.

मुंडारी भाषा में होती है माता की पूजा

सोनमेर माता मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां पूजा संस्कृत मंत्रों से नहीं बल्कि स्थानीय मुंडारी भाषा में की जाती है. आदिवासी परंपरा के अनुसार मंदिर में पूजा-पाठ का कार्य पाहन यानी पुजारी करते हैं.

भक्त जब माता से मन्नत मांगते हैं, तो वे पूजा सामग्री के साथ “रंगुवा मुर्गा” चढ़ाते हैं. वहीं जब उनकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो वे माता को बकरे की बलि देकर धन्यवाद प्रकट करते हैं. इस परंपरा के कारण सोनमेर माता को “मन्नत पूरी करने वाली माता” भी कहा जाता है.

मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्रि के समय यहां विशेष रूप से भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं. पूरे मंदिर परिसर में उस समय मुंडारी मंत्रों की गूंज सुनाई देती है, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है.

मंगलवार को विशेष पूजा का महत्व

सोनमेर माता का यह मंदिर झारखंड के खूंटी जिले के कर्रा क्षेत्र में स्थित है और लाखों आदिवासी तथा गैर-आदिवासी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.

यहां हर दिन भक्त आते हैं, लेकिन मंगलवार का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन दस भुजाधारी माता की पूजा करने से विशेष आशीर्वाद मिलता है और भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं.

सोनमेर मंदिर का इतिहास और प्रसिद्धि

बताया जाता है कि सोनमेर माता का पिंड लगभग 200 साल पुराना है. वर्तमान मंदिर की नींव वर्ष 1981 में धल परिवार के सहयोग से रखी गई थी. मंदिर के निर्माण को और भव्य बनाने के लिए ओडिशा के कारीगरों द्वारा यहां 51 फीट ऊंचा गुंबद बनाया गया है, जो इसकी सुंदरता को और भी आकर्षक बनाता है.

आज यह मंदिर केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है. भक्त यहां अपनी मनोकामना लेकर आते हैं और पूरी होने पर माता का आभार व्यक्त करते हैं.

श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यदि सच्चे मन से माता सोनमेर से प्रार्थना की जाए, तो वे भक्तों की हर इच्छा जरूर पूरी करती हैं.

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