भाजपा शासित राज्यों में डीजे पर रोक, फिर झारखंड में क्यों बजवाना चाहते हैं विधायकजी?

Updated at : 12 Mar 2026 5:32 PM (IST)
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DJ Ban Jharkhand

झारखंड में डीजे बजाने पर लगा है प्रतिबंध. एआई जेनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर.

DJ Ban Jharkhand: झारखंड में डीजे पर लगे प्रतिबंध को लेकर सियासत तेज हो गई है. हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने विधानसभा में डीजे बजाने की मांग उठाई. हाईकोर्ट के आदेश के बाद राज्य में डीजे पर रोक है, जबकि कई भाजपा शासित राज्यों में भी इसी तरह के नियम लागू हैं. फिर भी हजारीबाग के विधायक झारखंड में डीजे बजवाना चाहते हैं और सरकार पर आरोप लगा रहे हैं. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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DJ Ban Jharkhand: झारखंड में डीजे बजाने पर भाजपा के विधायक पूरी तरह उतावले दिखाई दे रहे हैं. रामनवमी का त्योहार आने वाला है और अभी से ही भाजपा के विधायक सूबे में डीजे बजवाने को लेकर सरकार को घेर रहे हैं. झारखंड में शादी-समारोह और धार्मिक आयोजनों में 10.30 बजे के बाद डीजे बजाने पर रोक लगी है. सरकार की तरफ से यह रोक हाईकोर्ट के निर्देश के बाद लगाई गई हैं. हालांकि, जो विधायक झारखंड में रात 10.30 बजे के बाद डीजे बजवाना चाहते हैं, उन्हें यह भी जान लेना चाहिए कि देश में कई भाजपा शासित राज्यों में भी डीजे बजाने पर रोक लगी हुई है.

भाजपा शासित किन राज्यों में डीजे बजाने पर रोक

  • बिहार
  • उत्तर प्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • ओडिशा
  • महाराष्ट्र
  • तेलंगाना

झारखंड में डीजे बजाने का क्या है नियम

झारखंड में डीजे बजाने के लिए ध्वनि प्रदूषण (नियम और नियंत्रण) कानून का पालन करना जरूरी है. रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक डीजे बजाने पर पूरी तरह से रोक है. दिन के दौरान आवासीय क्षेत्रों में 55 डेसिबल और रात 10 बजे से पहले 45 डेसिबल में डीजे बजाना है. इसके अलावा, शांत क्षेत्रों में दिन के समय 50 डेसिबल और रात के समय 40 डेसिबल की निर्धारित सीमा के अंदर ही डीजे की आवाज रखनी है.

डीजे बजाने के लिए किससे लेनी होगी इजाजत

झारखंड में किसी सार्वजनिक स्थलों पर डीजे या लाउडस्पीकर बजाने के लिए स्थानीय प्रशासन से इजाजत लेना जरूरी है. इसमें स्थानीय थाना प्रभारी और सब-डिवीजन ऑफिसर (एसडीओ) शामिल हैं.

नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई

अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करता है, तो उस पर ध्वनि प्रदूषण (नियम और नियंत्रण) अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है. इसमें डीजे या लाउडस्पीकर को जब्त किया जा सकता है. संबंधित व्यक्ति पर जुर्माना लगाया जा सकता है या कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है.

किसके आदेश से झारखंड में लगा डीजे पर प्रतिबंध

पूरे झारखंड में डीजे, शोर और ध्वनि प्रदूषण से संबंधित हाईकोर्ट की ओर से 19 सितंबर, 2023 से लेकर 20 अगस्त 2025 के बीच कई आदेश दिए गए. हर बार सरकार और पुलिस-प्रशासन को ताकीद किया गया. यहां तक कि अदालत ने डीजे पर पूरी तरह से रोक लगाने की बात भी कही. लेकिन, कार्रवाई जमीन पर उतरती नजर नहीं आई.

2024 से झारखंड में डीजे पर लगा पूर्ण प्रतिबंध

16 जुलाई 2024 को अधिवक्ता शुभम कटारुका, उष्मा पांडेय और नेहा भारद्वाज की याचिका पर मुख्य न्यायाधीश डॉ बीआर षाड़ंगी और न्यायमूर्त सुजीत नारायण प्रसाद की बेंच ने सुनवाई की. बेंच ने डीजे के शोर को ‘आउट ऑफ कंट्रोल’ माना. इसे मरीजों, बुजुर्गों और हृदय रोगियों के लिए गंभीर बताया. अदालत ने पूरे झारखंड में डीजे बजाने पर रोक लगा दी. अदालत ने साफ किया था कि किसी भी जुलूस या समारोह में डीजे की अनुमति नहीं दी जा सकती. उल्लंघन करने पर स्थानीय थाना प्रभारी की जिम्मेदारी तय होगी. एसपी और एसएसपी को कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया था.

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किस विधायक ने उठाई डीजे बजाने की मांग

हजारीबाग के विधायक प्रदीप प्रसाद ने बुधवार 11 मार्च 2024 को विधानसभा में पूरे लाव-लस्कर और बैनर-पोस्टर के साथ प्रदर्शन करते हुए रामनवमी पर डीजे बजाने की मांग उठाई. रामनवमी जुलूस में डीजे बजाने पर रोक और मंगला जुलूस में डीजे जब्त करने के प्रशासनिक निर्देश का हजारीबाग विधायक प्रदीप प्रसाद ने विधानसभा में विरोध किया. बुधवार को उन्होंने विधानसभा परिसर में धरना देकर इस निर्णय को धार्मिक परंपराओं के विरुद्ध बताया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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