कहां गया कृषि विभाग का 1.65 करोड़? पलामू में दफ्तर बनाने के लिए 15 साल पहले हुआ था आवंटित

पलामू में 91 साल पुरानी बिल्डिंग, जिसमें कृषि विभाग के चलते हैं छह कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर
Palamu News: पलामू में कृषि विभाग का संयुक्त भवन 15 साल बाद भी नहीं बन पाया. इसके लिए 1.65 करोड़ रुपये आवंटित कर निकासी भी कर ली गई थी, लेकिन टेंडर नहीं निकला. फिलहाल, छह विभाग 1935 के जर्जर भवन में चल रहे हैं. अधिकारियों ने जल्द नए भवन के निर्माण की जरूरत बताई है. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.
पलामू से शिवेंद्र कुमार की रिपोर्ट
Palamu News: पलामू प्रमंडल मुख्यालय में कृषि विभाग का अपना भवन नहीं है. झारखंड सरकार की ओर से संयुक्त कृषि भवन बनाने के लिए 15 साल पहले एक करोड़ 65 लाख 77 हजार 124 रुपये आवंटित किए गए थे. पूर्व डीसी के आदेश से बुक ट्रांसफर के माध्यम से भवन निर्माण विभाग की ओर से दो किस्तों में इन पैसों की निकासी भी कर ली गई थी. इसके बावजूद न तो टेंडर निकाला गया और न ही पैसे सरेंडर किए गए. 29 मार्च 2012 को कोषागार से एक करोड़ 29 लाख और 31 मार्च 13 को 36 लाख 77 हजार 124 रुपये की निकासी की गई थी. फिर 18 मार्च 2023 को एस्टीमेट को रिवाइस करते हुए तीन करोड़ 97 लाख दो हजार 200 रुपए का राज्य सरकार को भेजा गया है. लेकिन अभी तक इसकी स्वीकृति नहीं मिलने के कारण आगे की प्रक्रिया रूकी हुई है.
91 साल पुराने जर्जर भवन में संचालित हो रहा है छह विभाग
संयुक्त कृषि भवन नहीं बनने के कारण इससे जुड़े हुए छह विभाग 91 साल पुराने जर्जर भवन में संचालित हो रहा है. यह भवन आजादी के पहले 1935 का बना हुआ है. इस भवन में जिला कृषि कार्यालय, अनुमंडल कृषि कार्यालय, जिला उद्यान कार्यालय, आत्मा, जिला भूमि संरक्षण कार्यालय, भूमि संरक्षण कार्यालय और कनीय पौधा संरक्षण कार्यालय चल रहा है. कर्मचारी और अधिकारियों का कहना है कि यह मकान काफी पुराना है. कभी भी कोई हादसा हो सकता है. खासकर, बरसात के दिनों में अधिकारी और कर्मचारी काफी डरे सहमे रहते हैं.
गुण नियंत्रण भवन में बैठते हैं कृषि पदाधिकारी
वर्तमान में गुण नियंत्रण भवन 75 लाख की लागत से बनाया गया है. इसका निर्माण फर्टिलाइजर जांच के लिए किया गया था. लेकिन इसके लिए कोई अधिकारी नहीं है, क्योंकि राज्य सरकार के स्तर से किसी तरह का पद स्वीकृति नहीं है. सिर्फ भवन बना दिया गया है. इसी भवन में जिला कृषि पदाधिकारी बैठते हैं.
इसे भी पढ़ें: पेट्रोलियम कंपनियों का दावा, रांची में नहीं है गैस की कोई किल्लत! अफवाहों से न हों पैनिक
काम करने में हो रही है परेशानी: डीएओ
जिला कृषि पदाधिकारी दीपक कुमार वर्मा ने कहा कि एक जगह भवन नहीं रहने से काम करने में परेशानी होती है. कहा कि जी प्लस टू भवन बनना है. उसके बनने से सभी कार्यालय एक जगह पर काम करने लगेंगे. इससे आम लोगों को भी आसानी होगी.
इसे भी पढ़ें: पलामू में पुलिस-प्रशासन चुस्त, डीआईजी ने सिविल कोर्ट परिसर और कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




