सत्तू, सूर्य पूजा और परंपरा, झारखंड में बिसुआ का खास अंदाज

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झारखंड का लोक पर्व बिसुआ कल

Bisua Parv 2026: झारखंड में बिसुआ पर्व 2026 पर सत्तू, सूर्य पूजा और नई फसल का उत्सव मनाया जाएगा, जो समृद्धि, स्वास्थ्य और शुभ कार्यों की शुरुआत का प्रतीक है.

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Bisua Parv 2026: बिसुआ पर्व इस वर्ष 14 अप्रैल, मंगलवार को पूरे श्रद्धा और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा. झारखंड सहित बिहार के कई क्षेत्रों में इस लोकपर्व का विशेष महत्व है. यह पर्व चैत्र माह के अंतिम दिन और वैशाख मास के प्रथम दिन के संयोग पर मनाया जाता है, जो नए समय की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. गायत्री पीठ के पंडित बितुन पांडे ने बताया कि रांची के ग्रामीण इलाकों में इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिलता है, जहां लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ इसे मनाते हैं.

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कृषि और परंपरा से जुड़ा पर्व

बिसुआ पर्व को रबी फसल की कटाई और नए कृषि वर्ष के आगमन का संकेत माना जाता है. इस दिन किसान नई फसल के प्रति आभार व्यक्त करते हैं और समृद्धि की कामना करते हैं. परंपरा के अनुसार, लोग नए अन्न से बने सत्तू का सेवन करते हैं, जो इस पर्व का मुख्य आहार माना जाता है. सत्तू न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक और ऊर्जा भी प्रदान करता है.

सूर्य गोचर और शुभ संयोग

ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस पर्व का विशेष महत्व है. सूर्य देव 13 अप्रैल को दोपहर 12:06 बजे मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसके कारण 14 अप्रैल को बिसुआ पर्व मनाया जाएगा. सूर्य के इस गोचर के साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है. इसके बाद विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे सभी मांगलिक कार्यों की शुरुआत शुभ मानी जाती है.

पूजा-विधि और लोक मान्यताएं

बिसुआ पर्व के दिन लोग अपने कुलदेवताओं की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करते हैं. इस अवसर पर सत्तू, कच्चा आम (टिकोला) और शीतल जल अर्पित करने की परंपरा है. मान्यता है कि इन चीजों का अर्पण करने से परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है. साथ ही, यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने और सादगीपूर्ण जीवन अपनाने का संदेश भी देता है.

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वैशाख मास का महत्व

बिसुआ पर्व के साथ ही वैशाख मास की शुरुआत होती है, जिसे ‘मधुमास’ भी कहा जाता है. यह महीना धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है. इस दौरान दान, तप और पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है, जिससे जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और उन्नति के मार्ग खुलते हैं.

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