पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य कैसे दें? जानें विधि और जरूरी सावधानियां

Published by : Neha Kumari Updated At : 30 May 2026 11:20 AM

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अधिक पूर्णिमा 2026

Adhik Purnima 2026: पूर्णिमा के दिन चंद्रमा की पूजा कर उन्हें अर्घ्य देने का विधान है. मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य दिए बिना पूर्णिमा का व्रत अधूरा माना जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन चंद्रदेव को अर्घ्य देने की सही विधि क्या है और किन जरूरी सावधानियों का पालन करना चाहिए.

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Adhik Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना गया है. वर्ष में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं, अर्थात हर महीने एक पूर्णिमा पड़ती है. इस दिन दान, पवित्र नदी में स्नान, मंत्र जाप, पूजा-पाठ और अन्य पुण्य कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है. जब यह पूर्णिमा तिथि तीन वर्ष में एक बार आने वाले अधिक मास में पड़ती है, तो इसे अधिक पूर्णिमा कहा जाता है.

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रदेव की पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है, आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. हालांकि, अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. कहा जाता है कि इस दिन की गई छोटी-सी गलती भी व्रत और पूजा के फल को कम कर सकती है.

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि

  • पीतल या चांदी के लोटे में शुद्ध जल भरें.
  • उसमें थोड़ा-सा कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी-सी मिश्री डालें.
  • ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा का संबंध सफेद वस्तुओं से माना गया है.
  • चंद्रोदय के बाद चंद्रमा की रोशनी में खड़े हो जाएं.
  • लोटे को अपने सीने की ऊंचाई तक उठाकर धीरे-धीरे जल की धारा चंद्रमा को अर्पित करें.
  • अर्घ्य देते समय चंद्रदेव के मंत्रों का जाप करें.
  • अर्घ्य अर्पित करने के बाद अपने स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें और चंद्रदेव से सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना करें.

भूलकर भी न करें ये गलतियां

अक्सर लोग अनजाने में पूजा और अर्घ्य के दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता. इसलिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल की धारा सीधे आपके पैरों पर या किसी गंदे स्थान पर नहीं गिरनी चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है. अर्घ्य देते समय नीचे एक साफ थाली या गमला रख लें, ताकि जल उसमें एकत्र हो जाए. बाद में उस जल को किसी पौधे की जड़ में अर्पित कर दें.
  • पूर्णिमा के दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें. इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • अधिक मास में क्रोध करने, किसी का अपमान करने या कटु वचन बोलने से भी बचना चाहिए.
  • जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, उन्हें चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए. बिना चंद्र दर्शन और अर्घ्य के पूर्णिमा व्रत अधूरा माना जाता है.

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Neha Kumari

लेखक के बारे में

By Neha Kumari

नेहा कुमारी प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं. उन्हें लेखन के क्षेत्र में एक वर्ष से अधिक का अनुभव है. पिछले छह महीनों से वे राशिफल और धर्म से जुड़ी खबरों पर काम कर रही हैं. उनका मुख्य कार्य व्रत-त्योहारों, पौराणिक कथाओं और भारतीय रीति-रिवाजों से जुड़ी जानकारी को सरल भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. नेहा का हमेशा यह प्रयास रहता है कि वे कठिन से कठिन विषय को भी इतना आसान और रोचक बना दें कि हर कोई उसे सहजता से पढ़ और समझ सके. उनका मानना है कि यदि धर्म और संस्कृति से जुड़ी जानकारी सरल शब्दों में मिले, तो लोग अपनी परंपराओं से बेहतर तरीके से जुड़ पाते हैं. डिजिटल मीडिया में अपने करियर की शुरुआत उन्होंने प्रभात खबर में ही ‘नेशनल’ और ‘वर्ल्ड’ डेस्क पर छह महीने की इंटर्नशिप के साथ की थी. इस दौरान उन्होंने रियल-टाइम खबरों पर काम करना, तेजी और सटीकता के साथ कंटेंट लिखना, ट्रेंडिंग विषयों की पहचान करना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा. इस अनुभव ने उनकी न्यूज़ सेंस, लेखन क्षमता और खबरों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की समझ को और अधिक मजबूत बनाया.

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