अधिक मास में करें ये काम, बदल सकती है आपकी किस्मत

Published by :Shaurya Punj
Published at :15 Apr 2026 8:00 PM (IST)
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Adhik Maas 2026

अधिक मास 2026 कब से शुरु

Adhik Maas 2026: अधिक मास 2026 में ज्येष्ठ के साथ दुर्लभ संयोग बना है. इस दौरान पूजा, दान और जप का विशेष महत्व होता है, जिससे कई गुना पुण्य फल प्राप्त होता है.

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Adhik Maas 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में 12 महीने होते हैं, लेकिन लगभग हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है. इस मास को “पुरुषोत्तम मास” के नाम से भी जाना जाता है और यह भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है. वर्ष 2026 में ज्येष्ठ मास के साथ अधिक मास का विशेष संयोग बन रहा है, जो इसे धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बना देता है. इस दौरान पूजा-पाठ, दान और साधना का महत्व कई गुना बढ़ जाता है.

अधिक मास 2026 कब से कब तक?

साल 2026 में अधिक मास की शुरुआत 17 मई, रविवार से होगी और इसका समापन 15 जून को होगा. इस अवधि को अत्यंत शुभ और पुण्यकारी माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान किए गए जप, तप और दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में दस गुना अधिक मिलता है. इसलिए श्रद्धालु इस समय को विशेष साधना और भक्ति के लिए उपयोग करते हैं.

अधिक मास क्यों आता है?

अधिक मास का संबंध खगोलीय गणना से है. चंद्र वर्ष लगभग 355 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का होता है. इस प्रकार हर वर्ष लगभग 10 दिनों का अंतर उत्पन्न होता है. इसी अंतर को संतुलित करने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है. यह व्यवस्था पंचांग को संतुलित बनाए रखने में सहायक होती है.

2026 में दो ज्येष्ठ मास का विशेष योग

विक्रम संवत 2083 में एक अनोखी स्थिति बन रही है, जिसमें दो ज्येष्ठ मास पड़ेंगे. एक सामान्य ज्येष्ठ मास और दूसरा अधिक ज्येष्ठ (पुरुषोत्तम) मास होगा. अधिक ज्येष्ठ मास 17 मई से 15 जून तक रहेगा, जबकि सामान्य ज्येष्ठ मास 22 मई से शुरू होकर 29 जून तक चलेगा. इस कारण ज्येष्ठ माह की अवधि लगभग 58-59 दिनों तक विस्तारित हो जाएगी, जो इसे और भी विशेष बनाती है.

अधिक मास में क्या करें?

इस पवित्र महीने में भगवान विष्णु की उपासना करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है. प्रतिदिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें और श्रीमद्भागवत कथा या गीता का पाठ करें. अपनी क्षमता के अनुसार अनाज, जल, वस्त्र, फल और दीपदान करना शुभ होता है. विशेष रूप से कांसे के बर्तन में मालपुआ रखकर दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है. अधिक मास आत्मिक उन्नति और पुण्य अर्जन का श्रेष्ठ अवसर होता है. यह समय व्यक्ति को भक्ति, दान और सेवा के माध्यम से जीवन में सकारात्मकता और शांति प्राप्त करने का मार्ग दिखाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

मैंने डिजिटल मीडिया में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. पिछले 6 वर्षों से मैं विशेष रूप से धर्म और ज्योतिष विषयों पर सक्रिय रूप से लेखन कर रहा हूं. ये मेरे प्रमुख विषय हैं और इन्हीं पर किया गया काम मेरी पहचान बन चुका है. हस्तरेखा शास्त्र, राशियों के स्वभाव और उनके गुणों से जुड़ी सामग्री तैयार करने में मेरी निरंतर भागीदारी रही है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद. इसके साथ साथ कंटेंट राइटिंग और मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम करते हुए मेरी मजबूत पकड़ बनी. इसके अलावा, एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी मैंने गहराई से लेखन किया है, जिससे मेरी लेखन शैली संतुलित, भरोसेमंद और पाठक-केंद्रित बनी है.

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